अकेले घूमने के साथ ही नेचुरल ब्यूटी को करीब से देखना है तो जीरो वैली आएं

अरुणाचल प्रदेश के सुबनसिरी जिले का जीरो वैली है सोलो ट्रैवलर्स के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन। चारों ओर पाइन और ऑर्किड के जंगलों से घिरी जीरो वैली बहुत ही शांत, खूबसूरत और नेचर के करीब है। अरूणाचल प्रदेश की इस जगह को साल 2012 में वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स की लिस्ट में शामिल किया गया था। जीरो वैली तक पहुंचने के लिए डोलो मंडो का एक छोटे और खूबसूरत ट्रैक से गुजरना होता है। इसके अलावा सितंबर के अंत में 3 दिनों तक चलने वाला जीरो म्यूजिक फेस्टिवल का क्रेज भी लोगों के बीच कम नहीं। जिसमें आपको शानदार म्यूज़िक सुनने को मिलता है। जीरो वैली में घूमने के लिए आपको सरकार से खास परमिशन लेनी पड़ती है।    अरुणाचल प्रदेश के सुबनसिरी जिले का जीरो वैली है सोलो ट्रैवलर्स के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन। चारों ओर पाइन और ऑर्किड के जंगलों से घिरी जीरो वैली बहुत ही शांत, खूबसूरत और नेचर के करीब है। अरूणाचल प्रदेश की इस जगह को साल 2012 में वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स की लिस्ट में शामिल किया गया था। जीरो वैली तक पहुंचने के लिए डोलो मंडो का एक छोटे और खूबसूरत ट्रैक से गुजरना होता है। इसके अलावा सितंबर के अंत में 3 दिनों तक चलने वाला जीरो म्यूजिक फेस्टिवल का क्रेज भी लोगों के बीच कम नहीं। जिसमें आपको शानदार म्यूज़िक सुनने को मिलता है। जीरो वैली में घूमने के लिए आपको सरकार से खास परमिशन लेनी पड़ती है।       जीरो वैली की खूबसूरती  पहाड़ों से होते हुए घाटी तक पहुंचने का सफर बहुत ही सुहाना होता है। घाटी में घूमने और देखने के लिए बहुत कुछ है। यहां आसपास के इलाकों में अपतानी जनजाति के लोग रहते हैं। ये तिब्बत कल्चर को फॉलो करते हैं। और साल में 3 खास उत्सव म्योको, मुरूंग और ड्री मनाते हैं।

जीरो वैली की खूबसूरती

पहाड़ों से होते हुए घाटी तक पहुंचने का सफर बहुत ही सुहाना होता है। घाटी में घूमने और देखने के लिए बहुत कुछ है। यहां आसपास के इलाकों में अपतानी जनजाति के लोग रहते हैं। ये तिब्बत कल्चर को फॉलो करते हैं। और साल में 3 खास उत्सव म्योको, मुरूंग और ड्री मनाते हैं।

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