अक्टूबर में लग सकता है प्रदेश की जनता को बिजली का जोर का झटका, पढि़ए क्यों!

लखनऊ: यूपी की जनता को बिजली विभाग जल्द ही एक बड़ा झटका दे सकता है। पावर कॉर्पोरेशन ने शहरी घरेलू बिजली की दर 12 फीसदी बढ़ाने का प्रस्ताव किया है तो ग्रामीण घरेलू बिजली की दरों में भी वृद्धि प्रस्तावित की गई है। कॉर्पोरेशन ने 2017-18 के लिए बिजली दरों का जो प्रस्ताव मंगलवार को राज्य विद्युत नियामक आयोग को सौंपा है उसमें सभी श्रेणियों में औसतन 24.66 फीसदी की वृद्धि का प्रस्ताव है।

कॉर्पोरेशन ने ग्रामीण मीटर्ड उपभोक्ताओं की दरों में करीब 150 फीसदी तो किसानों की बिजली दरों में भी 60 फीसदी इजाफे का प्रस्ताव किया है। हालांकि लघु एवं भारी उद्योगों को राहत देते हुए बढ़ोतरी से मुक्त रखा गया है। यह पहला मौका है जब कार्पोरेशन ने बिजली दरों में इतना ज्यादा वृद्धि का प्रस्ताव किया है। कॉर्पोरेशन ने 15,118 करोड़ रुपये के घाटे का अनुमान लगाया है। दरों में प्रस्तावित वृद्धि से करीब 11 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी होगी। यानी घाटा कम करने के लिए दरें बढ़ाने पर ही ज्यादा फोकस रखा गया है।
शहर से लेकर ग्रामीण उपभोक्ताओं की कटेगी जेब फिक्स चार्ज 90 रुपये प्रति किलोवाट से बढ़ाकर 100 रुपये प्रति किलोवाट का प्रस्ताव है। विदित हो कि प्रबंधन चालू वित्तीय वर्ष के खर्चे के लिए पहले ही 71269 करोड़ वार्षिक राजस्व आवश्यकता प्रस्ताव आयोग में दाखिल कर चुका हैए जिसमें मौजूदा दरों से 20507 करोड़ के घाटे का अनुमान लगाया गया था।

प्रबंधन का कहना है कि घाटे से पूरी तरह उबरने के लिए मौजूदा बिजली की दरों में औसतन 42 द्बक्तीसद का इजाफा चाहिए। एक साथ दरों में इतनी अधिक बढ़ोतरी न करने और सिर्फ  5500 करोड़ रुपये अनुदान मिलने से प्रस्तावित बढ़ोतरी के बाद भी 3507 करोड़ विद्युत राजस्व घटेगा। उपभोक्ताओं पर रेग्यूलेटरी सरचार्ज भी बना रहेगा। कुछ समय पहले तक कारपोरेशन प्रबंधन गांव की बिजली दरों में मामूली इजाफा ही करता रहा है लेकिन अब गांवों को ज्यादा बिजली देने के साथ ही दरों में भी रिकार्ड 350 फीसद से अधिक की बढ़ोतरी प्रस्तावित की गई है।

बिना मीटर वाले ग्रामीण उपभोक्ताओं की प्रतिमाह मौजूदा दर 180 प्रति किलोवाट को बढ़ाकर 650 रुपये प्रति किलोवाट प्रति माह प्रस्तावित की गई है। दो किलोवाट के ऊपर वाले कनेक्शन की मौजूदा 200 रुपये प्रति किलोवाट प्रति माह की दर अगले वर्ष 31 मार्च के बाद 800 रुपये रखी गई है। इसी तरह गांव के मीटर्ड किसान व अन्य उपभोक्ताओं की बिजली दर व फिक्स चार्ज में भी जबरदस्त इजाफा किया गया है। किसानों को अभी बिना मीटर ट्यूबवेल के लिए जहां 100 रुपये प्रति बीएचपी

प्रति माह देने होते हैं वहीं इसे बढ़ाकर अब 160 रुपये प्रति बीएचपी प्रति माह प्रस्तावित किया गया है।

अक्टूबर से लागू होंगी बढ़ी दरें
विद्युत नियामक आयोग ने अभी टैरिफ  प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया है। आयोग के अध्यक्ष देश दीपक वर्मा ने बताया कि कमियों पर प्रबंधन का जवाब आने के बाद आयोग टैरिफ  प्रस्ताव स्वीकार करेगा। वर्मा ने बताया कि अक्टूबर में दीपावली के आसपास बढ़ी हुई नई बिजली की दरें लागू होने की उम्मीद है।
प्रबंधन ने व्यावसायिक बिजली की दरों में भी तकरीबन 15 फीसद इजाफा प्रस्तावित किया है। इस तरह से दरें प्रस्तावित है कि ज्यादा बिजली खपत पर व्यापारियों को कहीं ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। प्रबंधन ने प्रति यूनिट दर तो बढ़ाया ही हैए बिजली की खपत बढऩे के साथ ही फिक्स चार्ज को भी बढ़ाने का प्रस्ताव किया है।

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