अखिलेश राज से मुसलमानों को 85 विभागों में मिल रहा 20 फीसदी कोटा खत्म होगा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे अखिलेश यादव द्वारा मुसलमानों के लिए शुरू की गई 85 विभागों में 20 फीसदी को कोटे को आगामी कैबिनेट की बैठक में यूपी सरकार खत्म करने जा रही है। इसकी पूरी तैयारी यूपी की योगी सरकार ने कर ली है।अखिलेश राज से मुसलमानों को 85 विभागों में मिल रहा 20 फीसदी कोटा खत्म होगायह भी पढ़े: पत्नी ने गुस्से में हसिए से काट दिया पति का सिर! फिर पहुंच गई थाने

कुल 85 योजनाओं में अल्पसंख्यकों को 20 प्रतिशत कोटे का लाभ दिया जा रहा है। इनमें सबसे ज्यादा समाज कल्याण और ग्राम विकास विभाग की हैं। अब तक तमाम शासनादेशों में लिखा जाता था कि योजना में कम-से-कम 20 प्रतिशत अल्पसंख्यकों को कवर किया जाए। साथ ही जिन क्षेत्रों में कम-से-कम 25 प्रतिशत आबादी अल्पसंख्यकों की होती थी, वहां योजनाओं को सख्ती से लागू किए जाने के निर्देश होते थे।

इस संबंध में पहला शासनादेश मुख्य सचिव जावेद उस्मानी की तरफ से जारी हुआ था। इसके बाद समय-समय पर इसे सख्ती से लागू करने के निर्देश जारी किए जाते रहे हैं। सभी जिला अधिकारियों के अधीन एक कमिटी बनाई गई थी, जो इसकी निगरानी करती थी।

यूपी सरकार के समाज कल्याण विभाग की तमाम योजनाओं में अल्पसंख्यकों को दिया जाने वाला 20 प्रतिशत कोटा खत्म होगा। समाजवादी पार्टी की सरकार में कैबिनेट ने शुरुआती साल में ही 20 प्रतिशत कोटे को मंजूरी दी थी। इसके लिए विशेष गाइडलाइन जारी की गई थी।

मौजूदा समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री ने इस कोटे को खत्म करने की सहमति दे दी है। उन्होंने कहा, ‘योजनाओं में कोटा देना उचित नहीं है। हम इसे समाप्त करने के पक्षधर हैं। योजनाओं से बिना भेदभाव के सभी का विकास होना चाहिए।’

इस प्रस्ताव को कैबिनेट के सामने ले जाया जाएगा, जहां इसे स्वीकृति मिलने के पूरे आसार हैं। इसके पहले अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी भी इस कोटे को खत्म करने की सहमति दे चुके हैं। दरअसल, नई सरकार के गठन के साथ ही अल्पसंख्यकों को दिए जा रहे इस कोटे को खत्म किए जाने की बात शुरू हो गई थी।

इन विभागों में मिलता था कोटा

कृषि, गन्ना विकास, लघु सिंचाई, उद्यान, पशुपालन, कषि विपणन, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, लोक निर्माण, सिंचाई, ऊर्जा, लघु उद्योग, खादी ग्रामोद्योग, रेशम विकास, पर्यटन, बेसिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, युवा कल्याण, नगर विकास, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन, पिछड़ा वर्ग कल्याण, व्यावसायिक शिक्षा, समाज कल्याण, विकलांग कल्याण, महिला कल्याण, दुग्ध विकास, समग्र ग्राम विकास में कोटा का लाभ अल्पसंख्यकों को मिल रहा था।

सर्वे की रिपोर्टों के बाद लागू हुई थी योजना

अखिलेश सरकार ने यह फैसला नैशनल सैंपल सर्वे की रिपोर्टों के बाद लिया था। सर्वे की रिपोर्टों में धार्मिक समूहों में रोजगार और बेरोजगारी की स्थिति को आधार बनाया गया था। रिपोर्टों में कहा गया था कि मुसलमानों का औसत प्रति व्यक्ति खर्च रोजाना सिर्फ 32.66 रुपये है। ग्रामीण क्षेत्रों में मुसलमान परिवारों का औसत मासिक खर्च 833 रुपये, जबकि हिंदुओं का 888, ईसाइयों का 1296 और सिखों का 1498 रुपये बताया गया था। शहरी इलाकों में मुसलमानों का प्रति परिवार खर्च 1272 रुपये था जबकि हिंदुओं का 1797, ईसाइयों का 2053 और सिखों का 2180 रुपये था।

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