अगर आपको थायराइड असंतुलन से बचना है तो अंडे और स्ट्रॉबेरी खाएं

थायराइड हमारे शरीर में बनने वाला ऐसा हॉर्मोन है, जिसके असंतुलन के कारण कई शारीरिक परेशानियां और बीमारियां होती हैं। असंतुलन से जहां महिलाओं की प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है, वहीं अन्य मामलों में वजन संबंधि परेशानियों का सामना करना पड़ता है। थायराइड को नियंत्रित रखने के लिए आहार में आयोडीन की मौजूदगी बेहद अहम है। यह नमक, अंडे, मछलियों और स्ट्रॉबेरी में अच्छी मात्रा में पाया जाता है।अगर आपको थायराइड असंतुलन से बचना है तो अंडे और स्ट्रॉबेरी खाएंयह भी पढ़े: आपके पैर के तलवों में छुपा है एक राज, क्या जानते हैं आप?

गले में होती ग्रंथी
थायराइड की ग्रंथी हमारे गले में सामने की ओर स्थित होती है। हमारे शरीर के चयापचयी तंत्र में इसका अहम रोल होता है। 
 
हाइपोथायराइडिज्म के लक्षण

1-  बेहिसाब बढ़ता वजन इसकी पहली पहचान है। वजन के साथ-साथ किसी काम में मन नहीं लगना, हर समय सुस्ती और थकान महसूस करना भी इसके लक्षण हैं।
2- त्वचा और बालों में रूखापन रहता है, बाल ज्यादा झड़ते हैं। बेहिसाब खुजली होती है और अत्यधिक ठंड लगती है। हाथ व पैरों में सूजन हो जाती है और वे सुन्न भी हो जाते हैं। 
3- कब्ज की शिकायत रहती है और अक्सर पेट की समस्या बनी रहती है।

इलाज
यह ऐसी समस्या है जिसका पूरी तरह इलाज तो संभव नहीं है, मगर इसे नियंत्रित किया जा सकता है। कुछ मामलों में डॉक्टर थायराइड हॉर्मोन का इंजेक्शन देते हैं क्योंकि हमारे शरीर में इसकी कमी हो जाती है।

हाइपरथायराइडिज्म के लक्षण

-तनाव, आनुवांशिक कारणों, संक्रमण या गर्भावस्था के दौरान इस हॉर्मोन की ग्रंथी बढ़ जाती है।
– भूख ठीक से लगने के बावजूद वजन काफी तेजी से कम होने लगता है। व्यक्ति बेवजह चिंतित रहता है और उसके शरीर की चयापचयी क्रियाएं बढ़ जाती हैं। चिड़चिड़ेपन के कारण कई बार नींद भी प्रभावित होती है।
– त्वचा तैलीय हो जाती है, हृदयगति बढ़ जाती है और कभी-कभी शरीर में थरथराहट भी महसूस होने लगती है।
-पीड़ित व्यक्ति को अक्सर डायरिया के साथ-साथ अन्य पाचन संबंधी शिकायत रहती है। महिलाओं को मासिक धर्म संबंधी कई समस्याएं होती हैं। 

 इलाज
इस अवस्था से निपटने के लिए मरीज को खास दवाएं दी जाती हैं। हालांकि इसका कोई ऐसा इलाज नहीं है, जो सभी मरीजों के लिए हो।

खाने में आयोडीन की मानक मात्रा

उम्र            मात्रा 
0-7 साल – 90 माइक्रोग्राम
7-12 साल – 120 माइक्रोग्राम
12 वर्ष से अधिक – 150 माइक्रोग्राम
गर्भवती व मां बन चुकी महिलाएं – 200 माइक्रोग्राम
(यूनीसेफ ने रोजाना के खानपान में आयोडीन की ये मात्रा निर्धारित की है। )

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