अगर आप भी 6 घंटे से कम सोते हैं, तो ये बीमारी होना तय है…

एक ताजा अध्ययन के मुताबिक, रात में छह घंटे से कम सोने वाले लोगों को गंभीर किडनी की बीमारी (सीकेडी) होने का अंदेशा बढ़ जाता है. नींद में बार-बार बाधा पड़ने से किडनी फेल होने का जोखिम भी बढ़ जाता है. सीकेडी वाले लोगों को अक्सर उच्च रक्तचाप, मोटापे और मधुमेह के साथ होने वाली अन्य शिकायतें भी रहती हैं. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अनुसार, ऐसे व्यक्तियों में किडनी की कार्यप्रणाली को जांचना महत्वपूर्ण है, जिन्हें उच्च खतरे वाली एक या अधिक परेशानी है.अगर आप भी 6 घंटे से कम सोते हैं, तो ये बीमारी होना तय है...
 

सीकेडी का अर्थ है कि समय के साथ गुर्दे की कार्य प्रणाली में और भी नुकसान होते रहना, जिसमें सबसे अंतिम स्थिति है किडनी फेल हो जाना. ऐसे मरीजों को फिर डायलिसिस या गुर्दा प्रत्यारोपण से गुजरना पड़ सकता है. इसके लक्षण शुरू में प्रकट नहीं होते और जब दिखते हैं, तब तक बहुत नुकसान हो चुका होता है.
 

आईएमए के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने बताया कि गुर्दे खून की फिल्टरिंग में मदद करते हैं. खून से कचरा और द्रव सामग्री को बाहर निकालते हैं. वह हमारे शरीर में बनने वाले अधिकांश बेकार पदार्थो को निकाल बाहर करते हैं. लेकिन जब गुर्दे का रक्त प्रवाह प्रभावित होता है, तो वे ठीक से काम नहीं कर पाते. ऐसा किसी क्षति या बीमारी के कारण हो सकता है.
 

किडनी की परेशानी से बचने के लिए 8 नियम:
 

फिट और सक्रिय रहें, इससे आपके रक्तचाप को कम करने में मदद मिलती है और किडनी के स्वास्थ्य के लिए कदम उठाने में मदद मिलती है.
 

अपने ब्लड शुगर लेवल पर नियंत्रण रखें, क्योंकि डाइबिटीज के आधे रोगियों को गुर्दे की बीमारी हो सकती है.
 

वजन पर नजर रखें. अचानक वजन बढ़ना ठीक नहीं है. अगर ऐसा होता है तो डॉक्टर से जांच कराएं.
 

रक्तचाप की निगरानी करें. यह गुर्दे की क्षति का सबसे सामान्य कारण है। अपनी जीवनशैली और आहार में परिवर्तन करने चाहिए.
 

स्वस्थ खाएं और अपना वजन जांचते रहें. इससे मधुमेह, हृदय रोग और सीकेडी से जुड़ी अन्य स्थितियों को रोकने में मदद मिल सकती है. नमक का सेवन कम करें. दिन में 5 से 6 ग्राम नमक काफी होता है.
 

प्रतिदिन 1.5 से 2 लीटर पानी पीएं. तरल पदार्थों का सेवन अधिक करने से गुर्दे को सोडियम, यूरिया और विषैले पदार्थो को शरीर से बाहर करने में मदद मिलती है.
 

-धूम्रपान न करें. इसके कारण किडनी की ओर खून का दौरा कम हो जाता है. धूम्रपान करने पर किडनी में कैंसर का खतरा भी 50 प्रतिशत बढ़ जाता है.
 

अपनी मर्जी से दवाइयां खरीद कर सेवन न करें. इबूप्रोफेन जैसी कुछ दवाएं किडनी के लिए घातक साबित हो सकती हैं.

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