अगर भावनगर के इस जौहरी की सुनी होती, तो भाग न पाता मेहुल चोकसी

देश के सबसे बड़े बैंकिंग महाघोटाले की परतें धीरे-धीरे खुलती जा रही है. इस घोटाले का जिन मामा-भांजे को सूत्रधार माना जा रहा है, अगर इनके खिलाफ गुजरात के सीआईडी विभाग ने समय रहते कदम उठाए होते तो आज स्थिति दूसरी ही होती. न तो नीरव मोदी और मेहुल चोकसी देश छोड़कर बाहर जा पाते और न ही देश की बैंकिंग व्यवस्था को इस तरह की फज़ीहत का सामना करना पड़ता.अगर भावनगर के इस जौहरी की सुनी होती, तो भाग न पाता मेहुल चोकसी

भावनगर के जौहरी दिग्विजय सिंह जडेजा के मुताबिक अगर उनकी दो साल पहले की गई शिकायत को गंभीरता से लिया गया होता तो देश के बैंकिंग इतिहास में इतनी बड़ी लूट नहीं होती. दिग्विजय सिंह जडेजा का परिवार गुजरात के भावनगर में कई दशकों से हीरे और सोने के गहनों का व्यापार करता आ रहा है. लेकिन आज जडेजा इस अफसोस में डूबे हैं कि न सिर्फ पीढ़ियों से चलता उनका व्यापार तबाही की कगार पर है बल्कि उनका गुनहगार मेहुल चोकसी देश का पैसा लूट विदेश चम्पत हो गया. जडेजा के मुताबिक जिसका उन्हें सबसे ज्यादा डर था, वही हकीकत में बदल गया.  

जडेजा की मानें तो इस बात का अंदेशा उन्होंने 2015 में ही जता दिया था. तब जडेजा ने गीतांजलि ज्वेलर्स के मालिक मेहुल चौकसी के ख़िलाफ़ गुजरात पुलिस के सीआईडी विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी. जडेजा का आरोप था कि मेहुल चौकसी ने उनसे धोखाधड़ी करके करीब 90 करोड़ का चूना लगाया. मेहुल चौकसी के खिलाफ इस सिलसिले में जनवरी 2015 में FIR दर्ज हुई.

मामले के तूल पकड़ने पर मेहुल चौकसी ने गुजरात हाई कोर्ट में एफआईआर को निरस्त करने की अपील की. जडेजा ने इसके विरोध में हलफनामा दिया जिसमें ये तीन बातें अहम थीं-

1) मेहुल चौकसी के ऊपर लगभग 9872 करोड़ों रुपए का बकाया है, जिसका उल्लेख मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स की वेबसाइट पर भी है. इसके चलते मेहुल चौकसी के भी विजय माल्या की तरह विदेश भागने की संभावना है. मेहुल चौकसी की पत्नी का दुबई के पॉश बुर्ज खलीफा में भी एक फ्लैट है. अगर वो विदेश भागा तो उसके खिलाफ चल रहे तमाम मामले अधर में लटक जाएंगे. 

2) मेहुल चौकसी ने फर्जी स्कीमों के जरिए कर्मचारियों और आम जनता का पैसा लूटा है. शगुन, सुवर्णा मंगल लाभ, सुवर्णा मंगल कलश नाम की इन स्कीमों के जरिए उसने जेवर देने का वादा कर लोगों की आंखों में धूल झोंकी है. ये सारी स्कीम गीतांजलि ज्वेलर्स की ओर से लाई गई थीं.

3) यही नहीं गीतांजलि ज्वेलर्स लिमिटेड के जरिए मेहुल चौकसी ने कई लोगों को फ्रेंचाइज दी और मिनिमम गारंटी देते हुए 9 पर्सेंट से 14 पर्सेंट का इंटरेस्ट का वादा किया या फिर 41 परसेंट जेवर पर मार्जिन देने की बात की, जिसकी वजह से सब को भारी नुकसान हुआ. उसके खिलाफ केस दायर किए गए हैं.

अपने 32 पन्ने के हलफनामे के जरिए जडेजा ने गुजरात हाईकोर्ट को मेहुल के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और गहन जांच करवाने की अपील की. बहरहाल, गुजरात हाईकोर्ट ने मामले को निरस्त कर दिया और साथ ही मेहुल के विदेश जाने पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया. इसके बाद भी जडेजा ने हार नहीं मानी और गुजरात हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है. जडेजा को लगता है कि अगर उनकी 2015 में सुनी गई होती तो देश को ये दिन नहीं देखना पड़ता.

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