अगर सफलता चाहते हैं ट्रंप तो मोदी को मानें अपना रोल मॉडल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार सुबह दावोस रवाना हुए हैं. मोदी यहां वर्ल्ड इकॉनोमिक फॉरम के मंच से दुनिया को भारत की अर्थव्यवस्था और निवेश से जुड़ा मंत्र देंगे. कार्यक्रम की शुरुआत मोदी के भाषण से होगी, तो अंत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संबोधन से होगा. इस बीच मोदी के लिए विदेश से एक बड़ी खबर आई है. फोर्ब्स में छपे एक आर्टिकल में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को नरेंद्र मोदी से नसीहत लेने की बात कही गई है.अगर सफलता चाहते हैं ट्रंप तो मोदी को मानें अपना रोल मॉडल#बड़ी खबर: राष्ट्रभाषा का विरोध करते हुए सांसदों ने हिंदी और भोजपुरी में ली शपथ

यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के प्रोफेसर सालवेटोर बबोंस ने अपने लेख में पीएम मोदी की जमकर तारीफ की है. उन्होंने लिखा है कि वर्ल्ड इकॉमोनिक फॉरम में सभी की नजरें मोदी पर टिकी हैं. चूंकि अमेरिका इस समय शटडाउन की तकलीफ से जूझ रहा है, इसलिए ट्रंप का वहां आना तय नहीं है. लेकिन अगर वो आते भी हैं तो उनका इंतजार इस तरह से नहीं हो रहा है जिस तरह मोदी का हो रहा है.

लेख में उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को सलाह दी है कि उन्होंने नरेंद्र मोदी को अपना रोल मॉडल बना लेना चाहिए. उन्हें अगर अपने मिडटर्म्स चुनाव जीतने हैं तो मोदी से सलाह लेनी चाहिए. मोदी ने जिसतरह अपने देश में पिछले कुछ समय में फैसले किए हैं और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उभर कर आए हैं वह सराहनीय है. उन्होंने लिखा कि मोदी ने अपने देश की अर्थव्यवस्था को बुरी स्थिति से आगे की ओर बढ़ाया है, लेकिन ट्रंप की अगुवाई में अमेरिका आर्थिक संकट झेलने की कगार पर खड़ा है.

उन्होंने पिछले चार साल के कार्यकाल में मोदी सरकार के कई फैसले की तारीफ की. उन्होंने लिखा कि मोदी ने राजनीतिक और इकॉनोमिक लेवल पर भारत को आगे बढ़ाया है. शायद, महात्मा गांधी के बाद वह भारत के देश के अंदर और बाहर सबसे पॉपुलर नेता हैं. उन्होंने लिखा कि मोदी ने कई बार कुछ ऐसे फैसले लिए हैं जो कड़े हैं लेकिन लोगों की नजर में पसंदीदा नहीं रहे. लेकिन इन फैसलों के असर से भारत को लाभ हुआ है.

2014 के बाद से ही मोदी एक वर्ल्ड लीडर के तौर पर उभरे हैं. ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इजरायल जैसे बड़े देशों ने उनका स्वागत किया है. और सभी नेताओं ने मोदी के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की कोशिश की है.

आर्थिक संकट से जूझ रहा है अमेरिका 

बता दें कि अमेरिकी सरकार बंदी की कगार पर आ गई है. पिछले पांच वर्षों में ऐसा पहली बार इसलिए हो रहा है क्योंकि सीनेटर्स ने सदन द्वारा पारित फंडिंग बिल को खारिज कर दिया है. इसी बिल के जरिए सरकार को 16 फरवरी तक की फंडिंग सुनिश्चित थी. अमेरिकी सरकार आधिकारिक तौर पर बंदी का सामना कर रही है.

मोदी के साथ जाएगा बड़ा प्रतिनिधिमंडल

पीएम मोदी के साथ एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल इस कार्यक्रम में हिस्सा लेगा. इसमें करीब 6 केंद्रीय मंत्री, 100 सीईओ और कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हैं. मोदी के साथ वित्त मंत्री अरूण जेटली, रेल मंत्री पीयूष गोयल तथा पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान भाग ले सकते हैं. इसके अलावा आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू तथा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस भी डब्लयूईएफ की बैठक में भाग लेंगे.

आपको बता दें कि इस सालाना बैठक में 60 देशों के प्रमुखों समेत 350 राजनीतिज्ञ हिस्सा लेंगे. सम्मेलन में दुनिया की महत्वपूर्ण कंपनियों के मुख्य CEO समेत तथा विभिन्न क्षेत्रों से करीब 3,000 नेता भाग लेंगे. ऐसा बीस साल बाद होगा, जब कोई भारतीय पीएम इस कार्यक्रम में हिस्सा लेगा. इससे पहले, 1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया था. पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह अपने कार्यकाल के दौरान इस फॉरम में नहीं गए थे.

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