अपने ही ‘पार्टी’ पर कुल्हाड़ी मारते कांग्रेसी नेता

 कांग्रेस पार्टी के नेताओं के बयानों को देखकर लगता है कि उन्हें खतरा मोदी या भाजपा के किसी अन्य नेता से नहीं है, बल्कि खुद कांग्रेसी नेताओं के आत्मघाती बयानों से है, हाल ही में सलमान खुर्शीद ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वार्षिकोत्सव में अपनी ही पार्टी के खिलाफ बयान देते हुए कहा था कि कांग्रेस के दामन पर मुसलमानों के खून के दाग लगे हैं. और कांग्रेस का नेता होने के नाते ये दाग मेरे दामन पर भी है. इसके बाद अब कांग्रेस के वरिष्ठ सलाहकार अहमद पटेल ने अनजाने में अपनी ही पार्टी पर वार कर दिया है.नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी के नेताओं के बयानों को देखकर लगता है कि उन्हें खतरा मोदी या भाजपा के किसी अन्य नेता से नहीं है, बल्कि खुद कांग्रेसी नेताओं के आत्मघाती बयानों से है, हाल ही में सलमान खुर्शीद ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वार्षिकोत्सव में अपनी ही पार्टी के खिलाफ बयान देते हुए कहा था कि कांग्रेस के दामन पर मुसलमानों के खून के दाग लगे हैं. और कांग्रेस का नेता होने के नाते ये दाग मेरे दामन पर भी है. इसके बाद अब कांग्रेस के वरिष्ठ सलाहकार अहमद पटेल ने अनजाने में अपनी ही पार्टी पर वार कर दिया है.  दरअसल, अहमद पटेल ने एक ट्वीट में एक ग्राफ के जरिए महंगाई का आंकड़ा पेश करते हुए कहा कि 2014 से ही खाद्य मूल्यों में गिरावट से कृषि संकट चिंताजनक हालत की ओर इशारा करता है, उन्होंने कहा कि महंगाई में कमी का भार किसानों पर पड़ रहा है, उनके पोस्ट किए गए ग्राफ के अनुसार पिछले 4 सालों में कीमतें 3.6 फीसदी ही बढ़ी हैं.   अहमद पटेल ने कभी यह सोचा नहीं होगा कि उनका यह ट्वीट उनकी ही पार्टी के लिए मुसीबत बन जाएगा, उनके इस ट्वीट पर केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने जवाब देते हुए कहा है कि "प्रिय अहमद भाई, ये मानने के लिए मैं आपको धन्यवाद कहता हूं कि यूपीए शासनकाल में खाद्य दाम महंगे थे और एनडीए सरकार ने इस पर लगाम कस रखी है. साथ ही किसानों की लागत में भी बढ़ोतरी का ख्याल रखा गया है."  दरअसल, अहमद पटेल जिन आंकड़ों से किसानों की दुर्दशा की बात कर रहे थे, जयंत सिन्हा ने उन्हीं आंकड़ों का इस्तेमाल महंगाई कम होने के सबूत के बतौर किया और बात को अपने हक की ओर मोड़ लिया. आपको बता दें कि यूपी में कांग्रेस के गठबंधन कर चुके सपा अध्यक्ष भी इसी तरह की एक  पोस्ट करके अपना मज़ाक बनवा चुके हैं, उन्होंने तो खुद की सरकार की ही नाकामी उजागर कर दी थी.

दरअसल, अहमद पटेल ने एक ट्वीट में एक ग्राफ के जरिए महंगाई का आंकड़ा पेश करते हुए कहा कि 2014 से ही खाद्य मूल्यों में गिरावट से कृषि संकट चिंताजनक हालत की ओर इशारा करता है, उन्होंने कहा कि महंगाई में कमी का भार किसानों पर पड़ रहा है, उनके पोस्ट किए गए ग्राफ के अनुसार पिछले 4 सालों में कीमतें 3.6 फीसदी ही बढ़ी हैं. 

अहमद पटेल ने कभी यह सोचा नहीं होगा कि उनका यह ट्वीट उनकी ही पार्टी के लिए मुसीबत बन जाएगा, उनके इस ट्वीट पर केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने जवाब देते हुए कहा है कि “प्रिय अहमद भाई, ये मानने के लिए मैं आपको धन्यवाद कहता हूं कि यूपीए शासनकाल में खाद्य दाम महंगे थे और एनडीए सरकार ने इस पर लगाम कस रखी है. साथ ही किसानों की लागत में भी बढ़ोतरी का ख्याल रखा गया है.”  दरअसल, अहमद पटेल जिन आंकड़ों से किसानों की दुर्दशा की बात कर रहे थे, जयंत सिन्हा ने उन्हीं आंकड़ों का इस्तेमाल महंगाई कम होने के सबूत के बतौर किया और बात को अपने हक की ओर मोड़ लिया. आपको बता दें कि यूपी में कांग्रेस के गठबंधन कर चुके सपा अध्यक्ष भी इसी तरह की एक  पोस्ट करके अपना मज़ाक बनवा चुके हैं, उन्होंने तो खुद की सरकार की ही नाकामी उजागर कर दी थी. 

 

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