अफगानिस्तान : अज्ञात बंदूकधारियों ने 6 भारतीयों को अगवा किया

अफगानिस्तान में अज्ञात बंदूकधारियों ने छह भारतीय और एक अफगानी नागरिक का अपहरण कर लिया. अपहृत सभी लोग बघलान स्थित एक भारतीय कंपनी केईसी में काम करते हैं. यह घटना बाग-ए-शमिल इलाके की है, जब ये लोग घूमने के लिए निकले थे. स्थानीय प्रशासन ने इस घटना के पीछे आतंकी संगठन तालिबान पर शक जाहिर किया है. कंपनी ने इस घटना पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. भारत में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि उन्हें भी भारतीयों के अगवा होने की सूचना मिली है और इस बारे में वह अफगान सरकार से संपर्क बना रहा हैं. इसके अलावा एक मतदाता रजिस्ट्रेशन केंद्र में भी धमाके के समाचार मिले हैं.

मतदाता केंद्र पर धमाका
इसके अलावा एक मतदाता रजिस्ट्रेशन केंद्र पर धमाके के समाचार हैं. स्थानीय समाचार एजेंसी TOLO न्यूज के मुताबिक, खोस्त स्थित एक मस्जिद परिसर में यह वोटर रजिस्ट्रेशन केंद्र बना हुआ है. इस धमाके में हताहतों के बारे में अभी कोई सूचना नहीं मिली है. पुलिस और सेना ने पूरे इलाके के घेर लिया लिया है. राहत और बचाव के लिए तमाम अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं.

30 अप्रैल को भी हुआ था बड़ा हमला
अफगानिस्तान में बीते 30 अप्रैल को एक बड़ा आतंकी हमला हुआ था. आतंकवादियों ने दो स्थानों पर बम धमाके किए. इन धमाकों में 10 पत्रकारों समेत करीब 40 लोगों की मौत हुई थी. एक विस्फोट वोटर रजिस्ट्रेशन केंद्र में हुआ था. इस तरह की घटनाओं से साफ है कि आतंकी यहां चुनाव के पक्ष में कतई नहीं हैं और लोगों में चुनावों को लेकर दहशत फैलाने का काम कर रहे हैं.

आतंकियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील
बता दें कि इस साल अफगानिस्तान में आम चुनाव होने हैं. राष्ट्रपति अशरफ गनी ने तालिबान को मुख्यधारा में शामिल होने का ऐतिहासिक न्योता दिया था. उन्होंने कहा, ‘‘नए सिरे से हमलों की कोई आवश्यकता नहीं है. उधर, तालिबान ने चुनावों का बहिष्कार करते हुए अफगानिस्तान पर नए सिरे से हमले करने की घोषणा की थी. 

तालिबान के 25 अप्रैल से शुरू हुए इन हमलों से लगता है कि उसने अफगानिस्तान सरकार की शांति वार्ता की पेशकश को ठुकरा दिया. तालिबान के एक बयान के मुताबिक उसका ‘आपरेशन अल खंदक’ अमेरिकी बलों को, उनके खुफिया एजेंटों और साथ ही साथ उनके अंदरूनी हिमायतियों को निशाना बनाएगा. आमतौर पर जाड़ों के मौसम में हमलों का सिलसिला बंद हो जाता है और वसंत में शुरू हो जाता है. बहरहाल, इस साल तालिबान ने अफगान और अमेरिकी बलों पर अपना हमला जारी रखा था.

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