अफसरों ने कागजों में दिला दी नौकरी बेरोजगार ही बैठे हैं युवा

मुख्यमंत्री भले ही युवा बेरोजगारों को रोजगार मेलों के जरिए नौकरी दिलाने के बड़े-बड़े दावे कर रहे हों, लेकिन उनके दावों पर अफसर ही पानी फेर रहे हैं। रोजगार मेलों में ऐसी कंपनियों को बुलाया जा रहा है, जिनमें कोई पद खाली ही नहीं है। ऐसे में कंपनियां युवाओं का चयन तो कर लेती हैं, लेकिन उन्हें नौकरी के लिए नहीं बुलातीं।

अफसरों ने कागजों में दिला दी नौकरी बेरोजगार ही बैठे हैं युवा

कुछ युवाओं को तो कंपनियों ने तीन से चार बार सिलेक्ट कर लिया, लेकिन नौकरी के लिए आज तक नहीं बुलाया। पिछले दिनों मुख्यमंत्री के गृह जिले के सीहोर, गुना और राजगढ़ में रोजगार मेले में फिर यही स्थिति बनी तो युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा। बेरोजगारों ने नाराजगी जाहिर की तो कंपनियों ने सरकारी अफसरों को ही जिम्मेदार ठहरा दिया। नईदुनिया ने जब जिला दर जिला इन मेलों की हकीकत जानी तो चौंकाने वाले खुलासे हुए

मैं सोने जा रही हूं पापा, सुबह कमरे में नहीं, किराए का कमरे में जाकर देखा तो…

भले पद खाली न हों, इंटरव्यू लेने तो आ ही जाइए

राजगढ़ : 36 युवाओं को नौकरी देने का दावा, एक को भी नहीं मिली

18 नवंबर 2016 को नरसिंहगढ़ में रोजगार मेले में 13 कंपनियों ने 638 बेरोजगार युवाओं का इंटरव्यू लिया। 36 का चयन किया। नईदुनिया ने जब इन सभी युवाओं से फोन कर पूछा कि आपको नौकरी मिली या नहीं? इस पर जवाब मिला- चयन तो हो गया था लेकिन कंपनियों ने बुलाया ही नहीं। कंपनियों का कहना है कि उनके पास अभी पद रिक्त नहीं हैं।

नईदुनिया की पड़ताल में सामने आया कि ऐसी कंपनियों को मेले में बुला लिया गया जिनके पास या तो पद रिक्त नहीं हैं या फिर उनकी यूनिट बंद हो चुकी हैं। ब्यावरा की मधुमिलन इंडस्ट्रीज की 2 यूनिट लंबे समय से बंद हैं। कंपनी घाटे में है, कर्ज न चुका पाने पर बैंक ने यूनिटें सील कर दी हैं। सरकारी दबाव में इस कंपनी ने भी स्टॉल लगाकर युवाओं के इंटरव्यू ले लिए।

बीसीए पास युवा इंटरव्यू में सिलेक्ट, कंपनी ने नहीं बुलाया

राजगढ़ के मोनू शर्मा बीसीए पास हैं। 18 नवंबर को मेले में गुना से आई आईएल एंड एसएस कंपनी के प्रतिनिधि योगेंद्र मिश्रा ने साक्षात्कार लिया। सिलेक्ट होने पर कंपनी प्रबंधन ने उन्हें 15 दिन बाद ज्वाइनिंग देने की बात कही, लेकिन कोई फोन नहीं आया। जब कंपनी में फोन लगाकर पूछा तो बताया गया कि अभी जगह खाली नहीं है। नईदुनिया ने योगेंद्र मिश्रा से पूछा कि जब आपके पास पद रिक्त नहीं थे तो आपने स्टाल ही क्यों लगाया। इस पर उन्होंने कहा- अधिकारियों को पहले ही बता दिया था।

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गुना – बेरोजगार बोले- मेरा चयन हो गया, ये भी आपसे ही सुन रहा हूं

गुना जिले में 11 जुलाई 2016 को लगाए गए रोजगार मेले में विभाग ने 429 को नौकरी दिलाने का दावा किया। नईदुनिया की पड़ताल में अफसरों का दावा झूठा निकला। नईदुनिया ने सभी युवाओं से फोन कर पूछा कि क्या आपको नौकरी मिली। जवाब मिला- नहीं। कुछ युवाओं ने तो यहां तक कहा कि हमारा चयन हो गया है, ये भी आपसे ही सुन रहा हूं। ये हाल तब है, जब विभाग का दावा है कि उन्हें एक साल में 1200 नौकरी दिलाने का लक्ष्य मिला था, लेकिन हमने 1570 को नौकरी दिला दी। जबकि हकीकत यह है कि किसी भी युवा को नौकरी नहीं मिली।

पहले कहा- चयन हो गया फिर कहा- अभी जगह खाली नहीं

म्याना के हरीगिरी गोस्वामी ने भी आवेदन किया था। उस समय अधिकारियों ने बताया था कि तुम्हारा वेल्डर के लिए चयन हो गया है। लेकिन कंपनी के पास वैकेंसी नहीं है। होगी तब बुला लेंगे। लेकिन अभी तक कोई कॉल नहीं आया। गुना के रोजगार अधिकारी बीएस मीना का कहना है कि कुछ युवा ज्वाइन करने के बाद छोड़ देते हैं।

सीहोर: मेले पर मेले, लेकिन रोजगार नहीं

जिले में 2016-17 में अब तक करीब 24 रोजगार मेले लगाए गए। इनमें करीब 2200 बेरोजगार युवाओं ने पंजीयन कराया।करीब 500 युवाओं का चयन किया गया। रोजगार विभाग के अधिकारियों का दावा है कि 70 को नौकरी दी गई। 26 दिसंबर 2016 को सीहोर शहर में एक रोजगार मेला लगाया गया। इसमें सेल मेन्यूफेक्चर कंपनी और सेनापति सिक्योरिटी सर्विस के प्रतिनिधियों ने 40 युवाओं को रोजगार दिलाने दावा किया। नवदुनिया ने जब इन सभी युवाओं से फोन पर पूछा कि आपको नौकरी मिली या नहीं। 30 ने कहा- कंपनियों ने सिलेक्ट तो कर लिया था लेकिन उनका कहना था कि फिलहाल उनके पास जगह खाली नहीं है

सिलेक्ट 40 कर लिए, नौकरी किसी को नहीं दी

सीहोर के पर्वत सिंह ने बताया कि आयोजनों में बुलाकर हमें बेवकूफ बनाया जाता है। किसी को नौकरी नहीं देते। 26 दिसंबर को आयोजित दिव्यांग मेले में भी दो कंपनिया आई थी। जिन्होंने 40 युवाओं को सिलेक्ट तो कर लिया। लेकिन नौकरी किसी को भी नहीं दी।

आप ये क्या कह रहे हैं, समीक्षा में तो स्थिति संतोषजनक थी

सीधी बात, मोहम्मद सुलेमान, प्रमुख सचिव, उद्योग व रोजगार

सवाल- रोजगार मेलों में युवाओं को नौकरी देने के दावे खूब हो रहे हैं, लेकिन हकीकत में ऐसा हो नहीं हो रहा है?

जवाब- आप ये क्या कर रहे हैं, अभी तो कुछ दिन पहले रोजगार की समीक्षा हुई है। स्थिति संतोषजनक पाई गई।

सवाल- स्थिति कागजों में ही संतोषजनक है। मेलों में ऐसी कंपनियों को बुलाया जा रहा है, जिनके पास वैकेंसी ही नहीं होती?

जवाब- जिन कंपनियों के पास वैकेंसी नहीं हैं, वे क्यों शामिल हो रही हैं, ये समझ से परे है। फिर भी पता करा लेंगे।

सवाल- कई युवाओं का चार-चार बार सिलेक्शन हो गया, लेकिन ज्वाइन करने आज तक नहीं बुलाया?

जवाब- किसी के भी साथ ऐसा नहीं होना चाहिए। जिन जिलों के आपने नाम बताए हैं, वहां पता करवाते हैं।

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