अब किसानों की मदद करेगा ‘शीतगृह’ एप…

प्राकृतिक संसाधन जैसे वन, मृदा, जल, कृषि भूमि, ऊसर आदि से जुड़ी जानकारी अब वेब पोर्टल ‘संवेदन’ पर मिल सकेगी। रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशस सेंटर (आरएसएसी) के 37वें स्थापना दिवस के अवसर पर वेबपोर्टल ‘संवेदन’ की शुरुआत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रमुख सचिव हेमंत राव ने की। उन्होंने कहा कि वेबपोर्टल के जरिए अब एक क्लिक पर प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों के डाटाबेस की जानकारी उपयोगकर्ता विभागों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा आम जनता तक आसानी से पहुंच सकेगी। इस दौरान कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, मंत्री मोहसिन रजा, प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी हेमंत राव, अध्यक्ष प्रबंध समिति आरएसएसी सुधाकर त्रिपाठी मौजूद रहे। एप से मिलेगी शीतगृह की जानकारी

आरएसएसी के प्रबंध कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष सुधाकर त्रिपाठी ने शीतगृहों की सूचना से संबंधित मोबाइल एप ‘शीतगृह’ लॉन्च किया। वहीं, फसलों के अवशेष जलाये जाने की त्वरित सूचना दिये जाने के लिए विकसित एसएमएस अलर्ट सिस्टम की शुरुआत विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी विभाग की विशेष सचिव मिनिस्ती एस.नायर ने की। केंद्र के निदेशक राजीव मोहन ने केंद्र की उपलब्धियों की जानकारी दी। भारतीय भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग के निदेशक डॉ. राजेश अस्थाना ने ‘इंडियन इंडेवर इन एक्सप्लोरिंग अंटार्टिका’ विषय पर लोकप्रिय व्याख्यान दिया। डॉ.एसपी सौदान ने बताया कि ‘शीतगृह’ एप से आलू किसान आसपास स्थित शीत गृहों के बारे में जरूरी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इसे एंड्रायड फोन पर प्ले स्टोर में ‘शीत गृह’ एप के जरिए उसकी लोकेशन, क्षमता, निजी है या सरकारी आदि जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। पराली जलाई तो एसएमएस करेगा अलर्ट

अध्यक्ष प्रबंध समिति आरएसएसी सुधाकर त्रिपाठी ने बताया कि कृषि अवशेष जलाने की रोकथाम के लिए सेंटर द्वारा एसएमएस अलर्ट सिस्टम बनाया गया है। यदि कोई फसलों के अवशेष जलाता है तो आसमानी सेटेलाइट इसकी सूचना छह घटे के भीतर देगा जिसे एक्सेल फार्म में गूगल पर डाला जाएगा जिससे आग किस जिले, ब्लॉक व गाव में लगी है इसकी जानकारी तत्काल मिल जाएगी। इसके बाद एसएमएस द्वारा संबंधित जिलाधिकारी, तहसीलदार, बीडीओ, जिला कृषि अधिकारी, थानाध्यक्ष व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को एक साथ अलर्ट एसएमएस पहुंच जाएगा जिससे त्वरित कार्रवाई हो सके। इस मौके पर

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