अब नहीं दे रहा कोई भी साथ…तो अब ऐसे जान बचाकर भाग रहे हैं आईएसआईएस के आतंकी…

उनके झंडे का रंग भी काला है. उनके कारनामे भी काले हैं. उनका ज़ेहन भी काला है. और अब अपने अपनी जान बचाने के लिए वो तरीका भी काला अपना रहे है. जी हां. औरतों के काले बुर्कों में चेहरा छिपाकर आईएसआईएस के आतंकी इराक के मोसुल में अपनी जान बचा रहे हैं. काले बुर्के के पीछे छिपे बुज़दिल आतंकियों की पूरी कहानी हम आपको बता रहे हैं.अब नहीं दे रहा कोई भी साथ...तो अब ऐसे जान बचाकर भाग रहे हैं आईएसआईएस के आतंकी...

कहते हैं जब गीदड़ की मौत आती है तो वो शहर की तरफ भागता है. मगर इराक से बगदादी के आतंकी तो सिर्फ भाग नहीं रहे हैं बल्कि मुंह छिपा-छिपाकर भाग रहे हैं. वो भी बुर्कों के पीछे. मौत को सामने देखकर बगदादी के आतंकियों की सारी मर्दानगी काफूर हो गई है. और जान बचाने के लिए अब वो ज़नाने कपड़ों का सहारा ले रहे हैं.

मोसुल को आतंक से आज़ाद कराने के बाद जैसे ही इराकी सेना ने उसे चारों तरफ से घेरा. वैसे ही यहां चूहों की तरह बिलों में छिपे आतंकियों को मौत का खौफ घेरने लगा. जान बचाने के लिए वो ऐसे तड़प रहे हैं, जैसे बिन पानी मछली तड़पती है. कोई रास्ता नज़र नही आया तो अपनी सलामती के लिए अब इन आतंकियों ने इस महिलाओं के लिबाज का सहारा ले लिया.

बगदादी के आतंकी जिस मोसुल में बड़ी शान से गोली चलाते हुए आए थे. उसी मोसुल से बड़े बेआबरू होकर बुज़दिलों की तरह बुर्के के पीछे मुंह को छिपाकर भाग रहे हैं. आईएसआईएस के गुर्गों को पकड़े जाने का खौफ इतना है कि आंखों में सुरमा, गालों में लाली और होंठों पर लिपस्टिक भी लगा ली है. यहां तक की आई-ब्रो भी बनवा ली हैं. पकड़े न जाएं और दूर से महिलाओं जैसे दिखें इसलिए उन्होंने वैसे ही लिबास भी पहन रखे हैं. कुछ ने तो हूबहू महिलाओं जैसा दिखने के लिए और भी इंतज़ाम किए हैं.

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