अब बर्फबारी में भी गर्मी का अहसास कराएगा ये सौर ऊर्जा संयंत्र….

हिमाचल के पहाड़ी इलाकों में अब कड़ाके की ठंड में ठिठुरने या दिन भर हीटर-अंगीठी जलाने की जरूरत नहीं होगी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से तैयार सौर ऊर्जा संयंत्र से आप दिनभर अपने कमरे को गर्म रख सकते हैं। अब बर्फबारी में भी गर्मी का अहसास कराएगा ये सौर ऊर्जा संयंत्र....Notebandi: पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने मनाया खजांची का बर्थडे,गिफ्ट भी दिया!

सूरज ढलने के बाद भी आपका कमरा रात नौ बजे तक गर्म ही रहेगा। मात्र पांच हजार का यह सोलर पैनल लगाकर आप सालों तक सर्दियों में गर्मी का एहसास कर सकते हैं। पैनल लगाने के बाद कमरा बाहर के तापमान से 25-30 डिग्री ज्यादा गर्म रहेगा। 

इससे बिजली की तो बचत होगी ही, 30 से 40 फीसदी लकड़ी भी कम लगेगी। केंद्र सरकार के एक शोध के अनुसार अगर एक परिवार इस पैनल को लगाता है तो साल भर में पांच मीट्रिक टन कम धुआं निकलेगा। इससे प्रदूषण भी रुकेगा।

गैस लगने से चली जाती है कई लोगों की जान

गौरतलब है कि हिमाचल में सर्दियों में अंगीठी की गैस लगने से हर साल कई लोगों की जान चली जाती है। बर्फीले क्षेत्रों में सर्दियों में बिजली का बिल दोगुना हो जाता है। 

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सीड (साइंस फार इक्विटी एम्पावरमेंट एंड डेवलपमेंट डिवीजन) विभाग के सहयोग से प्रायोजित हिमालयन रिसर्च ग्रुप ने ये सौर संयंत्र तैयार किया है। 

केंद्र के कोर स्पोर्ट प्रोग्राम के तहत इस पैनल का किन्नौर के सुंदरा, नाथपा और कुल्लू के कुछ गांवों में सफल परीक्षण किया गया है। रिसर्च ग्रुप के निदेशक डा. लाल सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर्यावरण परिषद ने भी इसे हरी झंडी दे दी है। 

केंद्र के विज्ञान व तकनीकी विभाग की टीम ने अपने इस प्रोजेक्ट का बारीकी से अध्ययन कर इसे 2000 फीट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त पाया है।

कैसे बनता है सौर संयंत्र  

इस संयंत्र को बनाने के लिए एल्यूमीनियम की पाइप की कॉयल, लोहे की चादर, लकड़ी की फ्रेम, इंसुलेशन की परत और एक पारदर्शी शीशा चाहिए। इन्हें जोड़कर सौर ऊर्जा संयंत्र बनाया जाता है।

इसे मकान की दीवार में लगाया जाता है। दिनभर की धूप में यह संयंत्र कमरे को रात  नौ बजे तक गर्म रखता है। जबकि पानी गर्म करने का पैनल 100 से 120 लीटर पानी पूरे 24 घंटे तक गर्म रखता है।

इस तरह गर्म होता है कमरा  

इस पैनल को दक्षिण दिशा में घर के कमरे की दीवार पर लगाया जाता है। दक्षिण दिशा से पैनल सबसे ज्यादा धूप को ग्रहण करता है। पैनल के ऊपर दीवार में एक और नीचे दो छेद किए जाते हैं। पैनल से जुड़े पीवीसी पाइप को कमरे में पहुंचाता जाता है।

जैसे ही सूरज की किरणें पारदर्शी शीशे पर पड़ती हैं तो सौर ऊर्जा से साथ लगी लोहे की चादर हीट पैदा करती है। ऊपर के छेद सेे गर्म हवा कमरे के अंदर और नीचे के दो छेदों से कमरे की ठंडी हवा बाहर निकलने लगती है। अगर बाहर का तापमान 5 डिग्री है तो कमरे के अंदर का तापमान 30 डिग्री के आसपास रहेगा।  

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