अब रालोद ने बीजेपी को एमपी -राजस्थान में हराने का दिया मंत्र

पुरानी कहावत है कि अब मौत ने घर देख लिया है. यह बात अब भाजपा पर पूरी तरह फिट बैठती नजर आ रही है, क्योंकि अब बीजेपी को एमपी -राजस्थान में हराने के लिए रालोद ने कांग्रेस को मंत्र दिए हैं . रालोद नेता जयंत चौधरी ने कहा कि यदि कांग्रेस एमपी-राजस्थान में भी क्षेत्रीय पार्टियों के साथ भाजपा के खिलाफ मैदान में उतरेगी तो उसे फायदा मिलेगा.पुरानी कहावत है कि अब मौत ने घर देख लिया है. यह बात अब भाजपा पर पूरी तरह फिट बैठती नजर आ रही है, क्योंकि अब बीजेपी को एमपी -राजस्थान में हराने के लिए रालोद ने कांग्रेस को मंत्र दिए हैं . रालोद नेता जयंत चौधरी ने कहा कि यदि कांग्रेस एमपी-राजस्थान में भी क्षेत्रीय पार्टियों के साथ भाजपा के खिलाफ मैदान में उतरेगी तो उसे फायदा मिलेगा.    बता दें कि पहले गोरखपुर और फूलपुर उप-चुनाव और अब कैराना और नूरपुर में मिली जीत ने गठबंधन के हौंसले बुलंद कर दिए हैं. यही कारण है कि अब आगामी लोकसभा चुनावों में भी महागठबंधन बनाने की कोशिश की जा रही है. हालांकि सीटों के बंटवारे पर पेंच फंसने से इंकार नहीं किया जा सकता. बसपा प्रमुख मायावती ने महागठबंधन में उचित सीटें नहीं मिलने पर अकेले चुनाव लड़ने की बात कही थी . अब यही बात जयंत चौधरी भी कह रहे हैं.कांग्रेस नेता मनीष तिवारी इससे सहमति जताते हुए कर्नाटक की मिसाल देते हैं.जहाँ भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए जेडीएस को बिना शर्त समर्थन दिया.    गौरतलब है कि कैराना उप-चुनाव में रालोद की प्रत्याशी तब्बसुम हसन ने भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह को बड़े अंतर से हरा कर यह सीट भाजपा से छीन ली . भाजपा के सांसद चौधरी हुकुम सिंह के देहांत के बाद इस सीट पर फिर से उप-चुनाव कराया गया था. रालोद को अपने पारंपरिक जाट मतदाता के साथ ही मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन भी मिला. वहीं रालोद को समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के साथ आने से भी बहुत फायदा मिला. यही कारण है कि अब विपक्ष की महागठबंधन की तैयारियों को रफ्तार मिल गई है.

बता दें कि पहले गोरखपुर और फूलपुर उप-चुनाव और अब कैराना और नूरपुर में मिली जीत ने गठबंधन के हौंसले बुलंद कर दिए हैं. यही कारण है कि अब आगामी लोकसभा चुनावों में भी महागठबंधन बनाने की कोशिश की जा रही है. हालांकि सीटों के बंटवारे पर पेंच फंसने से इंकार नहीं किया जा सकता. बसपा प्रमुख मायावती ने महागठबंधन में उचित सीटें नहीं मिलने पर अकेले चुनाव लड़ने की बात कही थी . अब यही बात जयंत चौधरी भी कह रहे हैं.कांग्रेस नेता मनीष तिवारी इससे सहमति जताते हुए कर्नाटक की मिसाल देते हैं.जहाँ भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए जेडीएस को बिना शर्त समर्थन दिया.

गौरतलब है कि कैराना उप-चुनाव में रालोद की प्रत्याशी तब्बसुम हसन ने भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह को बड़े अंतर से हरा कर यह सीट भाजपा से छीन ली . भाजपा के सांसद चौधरी हुकुम सिंह के देहांत के बाद इस सीट पर फिर से उप-चुनाव कराया गया था. रालोद को अपने पारंपरिक जाट मतदाता के साथ ही मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन भी मिला. वहीं रालोद को समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के साथ आने से भी बहुत फायदा मिला. यही कारण है कि अब विपक्ष की महागठबंधन की तैयारियों को रफ्तार मिल गई है.

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