अब 20 हजार से ज्यादा फीस वाले स्कूलों पर CM योगी कसेंगे शिकंजा…

फीस वसूली के नाम पर छात्रों और अभिभावकों का शोषण करने वाले यूपी के वित्तविहीन स्कृलों पर योगी सरकार शिकंजा कसेगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने कहा है कि 20 हजार रुपये से अधिक सालाना फीस वसूलने वाले केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, यूपी माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और इंडियन सर्टिफिकेट ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन से संबद्ध वित्तविहीन स्कूल अधिकतम 5 फीसदी फीस ही बढ़ा सकेंगे। अभी तक ये स्कूल हर साल 15-20 फीसदी तक फीस बढ़ा देते हैं।अब 20 हजार से ज्यादा फीस वाले स्कूलों पर CM योगी कसेंगे शिकंजा...
विभाग के निदेशक अवध नरेश शर्मा ने कहा कि योजना तैयार हो गई है। मंगलवार को मुख्यमंत्री के सामने इसका प्रजेंटेशन होगा। विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय अग्रवाल ने सोमवार को ऐसे स्कूलों पर नियंत्रण की योजना को अंतिम रूप दिया।

योजना के अनुसार, 20 हजार रुपये से अधिक फीस वसूलने वाले स्कूलों में कक्षा के अनुसार फीस निर्धारित की जाएगी। यही नहीं,  किताबों, यूनिफार्म और सह शैक्षणिक गतिविधियों के नाम पर वसूली जाने वाली राशि को भी नियंत्रित कराया जाएगा।

अध्यापकों की वेतन वृद्धि के अनुपात में बढ़ेगी फीस
योजना के अनुसार वित्तविहीन स्कूल प्रति वर्ष अध्यापकों की वेतन वृद्धि के अनुपात में ही फीस बढ़ा सकेंगे। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के अनुसार विद्यालय अधिकतम 5 फीसदी ही फीस बढ़ा सकेंगे।

मनमानी फीस वसूली पर मंडल आयुक्त से शिकायत

वित्तविहीन स्कूलों की मनमानी फीस वसूली के मंडल आयुक्त के यहां शिकायत होगी। मंडल आयुक्त की अध्यक्षता में गठित कमेटी शिकायत की जांच करेगी और दोषी पाए जाने पर स्कूल पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगेगा। साथ ही वसूली गई अधिक फीस लौटानी होगी। दूसरी बार दोषी पाए जाने पर फीस लौटाने के साथ स्कूल पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। तीसरी बार दोषी पाए जाने पर स्कूल पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाने के साथ उनकी मान्यता रद्द करने के लिए संबंधित बोर्ड से सिफारिश की जाएगी।

अपील के लिए बनेगा ट्रिब्यूनल
मंडल आयुक्त के निर्णय पर अपील के लिए राज्य स्तर पर उच्च न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक ट्रिब्यूनल गठित किया जाएगा। विद्यालय मंडल आयुक्त के निर्णय से संतुष्ट नहीं होने पर ट्रिब्यूनल में अपील कर सकेंगे।

 

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