अभी-अभी आई एक बुरी खबर: HC ने शिक्षामित्रों के बाद माध्यमिक शिक्षकों के समायोजन पर लगी रोक

यूपी में बेसिक शिक्षा के बाद अब माध्यमिक शिक्षा में भी समायोजन और स्थानांतरण पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। कोर्ट के इस आदेश ने बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग की तबादला नीति में पारदर्शिता के दावों की पोल खोल दी है।अभी-अभी आई एक बुरी खबर: HC ने शिक्षामित्रों के बाद माध्यमिक शिक्षकों के समायोजन पर लगी रोकबड़ी खबर: सीएम योगी का बड़ा बयान भारत को हिंदू परंपरा स्वीकर करना होगा!

बेसिक शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा विभाग ने जून में तबादला नीति जारी की थी। दोनों विभागों ने समायोजन एवं तबादले में न्यायिक प्रक्रिया से बचने के लिए पारदर्शिता और नियमों के पालन का दावा किया था।

शैलेंद्र कुमार सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि समायोजन एवं तबादला प्रक्रिया में राइट टू एजुकेशन के मापदंड को शामिल नहीं किया गया है। इस पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने माध्यमिक शिक्षा विभाग में समायोजन पर रोक लगा दी।

इस मामले में विभाग की ओर से न्यायालय में शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया गया है कि वे समायोजन व तबादले में राइट टू एजुकेशन के नियमों का पालन करेंगे। अब कोर्ट के इस आदेश से जहां कुछ स्कूलों में शिक्षक सरप्लस हो गये हैं। वहीं शिक्षण सत्र के दो महीने से ज्यादा बीतने के बाद भी बड़ी संख्या में स्कूलों में पद खाली रह गये हैं।

जुलाई में बेसिक शिक्षा विभाग में लगी थी रोक

बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश में ग्रामीण विद्यालयों में 65 हजार शिक्षक सरप्लस बताते हुए तबादला नीति 2017 के तहत समायोजन प्रक्रिया शुरू की थी। इसमें ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रिक्त पदों पर सरप्लस शिक्षकों को तैनात किया जाना था।

बीएसए स्तर पर की जा रही समायोजन प्रक्रिया को सहायक अध्यापकों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती जिसके बाद जुलाई में इस पर रोक लगा दी गई। अब विभाग ने जिलों के अंदर ही तबादले की प्रक्रिया शुरू की है।

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