अभी अभी: इस कार्यकर्ता ने ओवैसी को जड़ा झन्नाटेदार थप्पड़, मचा हडकंप…

उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना के कार्यकर्ता की अगर मानें तो उन्होंने मंगलवार को एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी को संसद की पार्किंग में थप्पड़ जड़ा है। खबरों के मुताबिक, टीवी न्यूज चैनल जी-24 टास की रिपोर्ट में कहा गया है कि गोरख गोपाल ने इस बात का दावा किया है कि उसने एक तीखी बहस के दौरान ओवैसी को थप्पड़ मार दिया था। गोरख गोपाल नासिक से सांसद हेमंत गोड़से के साथी हैं। महाराष्ट्र के रहने वाले गोरख गोपाल के मुताबिक वे दिल्ली में संसद देखने आए थे।असदुद्दीन ओवैसी को मारने से पहले पूछा था कुछ सवाल

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब उन्होंने देखा कि ओवैसी संसद की पार्किंग में खड़े हैं तो वह उनके पास गए और पूछा कि आप ऐसे विवादित और भड़काऊ बयान क्यों देते हैं? इसके बाद दोनों में तीखी बहस हो गई और गोरख गोपाल ने ओवैसी को थप्पड़ मार दिया। रिपोर्ट में गोपाल ने साथ ही कहा कि ओवैसी को थप्पड़ मारने का उसे कोई पछतावा नहीं है। गोरख गोपाल खरजुल का कहना है कि इस पूरी घटना की फुटेज संसद भवन के सीसीटीवी कैमरा में कैद हुई है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी अपनी छवि को लेकर काफी सतर्क रहते हैं। ऐसा ही मामला संसद में देखने को मिला। संसद के गेट नंबर एक पर भाजपा सांसद राम विलास वेदंती अपनी गाड़ी का इंतजार कर रहे थे। वेदंती भगवा कपड़ों के साथ तिलक लगाए हुए थे। तभी ओवैसी वहां पहुंच गए, जब फोटोग्राफर्स वहीं पहुंचे तो ओवैसी वहां से तुरंत निकल गए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक बाद में असदुद्दीन ओवैसी कुछ फोटोग्राफर्स से खुद यह कहते हुए नजर कि उन्होंने जान-बूझकर ऐसा किया क्योंकि वह उनके (राम विलास वेदंती) के साथ एक ही फ्रेम में नहीं दिखना चाहते। हाल ही में रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद जमीन विवाद को लेकर भाजपा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी और एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के बीच एक टीवी चैनल पर बहस के दौरान तकरार देखने को मिली।

जब स्वामी से पूछा गया कि क्या इस मसले का कोर्ट के बार हल निकल सकता है तो उन्होंने कहा कि राम तो एक ही हैं और जन्म भूमि भी वही है। मस्जिद तो कहीं भी बनाई जा सकती हैं। इसके जवाब में ओवैसी ने कहा कि हिंदुस्तान किसी की आस्था पर नहीं चलेगा। जिन दिन यह मुल्क आस्था पर चलने लगेगा, यह तालिबान की तरह बन जाएगा। उन्होंने कहा कि जब दुनिया खत्म होगी तो सिर्फ मस्जिद बचेगी। सुप्रीम कोर्ट आस्था पर फैसला नहीं करेगा।

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