अभी-अभी: कक्षा 7 के छात्र की हार्ट अटैक से हुई मौत

कानपुर के बीएनएसडी शिक्षा निकेतन स्कूल के कक्षा 7 के छात्र शिवम गुप्ता की मौत हार्ट अटैक से हुई थी। इसकी पुष्टि शुक्रवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुई है। शिवम के चाचा पुरुषोत्तम सुबह पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। उन्होंने भैरोघाट पर शिवम का अंतिम संस्कार किया। इस दौरान हास्टल के लोग और शिवम के सहपाठी मौजूद रहे, लेकिन स्कूल प्रबंधन की तरफ से कोई नहीं पहुंचा। इसे लेकर पुरुषोत्तम ने नाराजगी भी जताई।अभी-अभी: कक्षा 7 के छात्र की हार्ट अटैक से हुई मौत Breaking: दुखद जानेमाने इतिहासकार सतीश चंद्रा का निधन, शोक की लहर!

बुधवार को भी लोगों ने इस बात पर नाराजगी जताई थी कि छात्र की तबियत खराब होने पर उसे अस्पताल के बजाय हास्टल क्यों भेज दिया गया। झारखंड के गिरीडीह जिले के खडगडीहा निवासी पुरुषोत्तम गुप्ता गाजियाबाद में एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। पुरुषोत्तम ने बताया कि हास्टल प्रबंधन के लोगों ने उन्हें मोबाइल के जरिए भतीजे शिवम की मौत की खबर दी थी।

पुरुषोत्तम ने बताया कि शिवम के पिता संजय संत हैं। मां विद्यावती की मौत हो चुकी है। शिवम छह साल से बिठूर के सिद्धधाम आश्रम परिसर में स्थित देवदूत हास्टल में रहता था। शिवम बीएनएसडी शिक्षा निकेतन में सातवीं कक्षा का छात्र था। हॉस्टल के वार्डन सुधीर मिश्रा ने उन्हें बताया कि गुरुवार को शिवम की स्कूल में तबियत बिगड़ गई थी। उसे बस से हॉस्टल लाया गया, वहां डॉक्टर ने उसका इलाज किया। हालत में सुधार नहीं होने पर देर शाम उसे हैलट ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। थानाध्यक्ष ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शिवम की हार्ट अटैक से मौत की पुष्टि हुई है। 

एक्सपर्ट कमेंट

कक्षा 7 के बच्चे में हार्ट अटैक कम ही होता है। कुछ बच्चों में जन्मजात हृदय रोग होता है तो ऐसा हो सकता है। स्क्रीनिंग से इनका पता लगाया जा सकता है। कभी-कभी एल्क्युटी सिंड्रोम की वजह से भी अचानक धड़कन बहुत बढ़ जाती है, जिससे उसकी मौत हो जाती है। ईको, ईसीजी, एक्सरे से भी कई हृदय रोगों का पता चल जाता है। डॉ. संतोष कुमार सिन्हा, कार्डियोलॉजिस्ट, हृदय रोग संस्थान

13 साल के किशोर के शव के पोस्टमार्टम के दौरान यदि हार्ट अटैक से मौत का पता चला था तो हमारे संस्थान को सूचना दी जानी चाहिए थी या वहां से हार्ट को निकालकर लाया जाता, जिसकी जांच कर मौत की सही वजह पता चल सकती थी। डॉ. विनय कृष्णा, निदेशक, हृदय रोग संस्थान

ये जन्मजात बीमारियां हो सकती हैं 
वाल्व खराब होना या ठीक से न बनना – धमनियों की खराबी – फैनोटिक हार्ट डिसीज, इसमें बच्चा नीला पड़ने लगता है ।
अलकापा हार्ट डिसीज – इसमें हृदय से खून की नसें जिस स्थान से निकलनी चाहिए, वहां के बजाय कहीं और से निकलती हैं। ऐसे बच्चों को एक साल में ही अटैक पड़ जाता है।
 कावासाकी डिसीज – हृदय की नसों में सिकुड़न या नसें फैलना , बच्चों को खेलते समय सीने में दर्द, घबराहट, अत्यधिक पसीना आना, शरीर नीला पड़ना आदि।

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