अभी-अभी: मुलायम लेंगे एक बड़ा फैसला, क्या अखिलेश और पिता की राहें होगी जुदा..?

यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव का फिर से समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना लगभग तय है और 5 अक्टूबर को आगरा के राष्ट्रीय अधिवेशन उन्हें दोबारा राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया जाएगा. इसबार अखिलेश यादव के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की मुहर राष्ट्रीय अधिवेशन में लगेगी.अभी-अभी: मुलायम लेंगे एक बड़ा फैसला, क्या अखिलेश और पिता की राहें होगी जुदा..? Breaking: योगी राज में अपराध बेलगाम रायबरेली में डकैतों ने पति की हत्या कर पत्नी से किया गैंगरेप!

राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के पहले अभी पार्टी और परिवार में घमासान का एक और राउंड बाकी है. सूत्रों पर अगर यकीन करें तो तो अबतक अखिलेश के हृदय परिवर्तन का इंतज़ार कर रहे मुलायम सिंह यादव अब शिवपाल यादव के स्क्रिप्ट पर अंतिम तौर पर मुहर लगा सकते हैं.

चुनाव हारने के बाद मुलायम सिंह यादव को यकीन था कि उनसे छीना गया राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद देर-सवेर अखिलेश यादव वापस कर देंगे, लेकिन जिस तरीके से अखिलेश यादव ने पार्टी पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है और जिस तरह से लगातार मुलायम सिंह की अनदेखी हुई है. इसके बाद मुलायम सिंह यादव अब आखिरी तौर पर फैसला लेने की राह पर है. लेकिन यह फैसला क्या होगा. क्या अलग पार्टी बनेगी? कोई अलग मंच होगा? या कोई मोर्चा होगा? ये पत्ते न तो मुलायम सिंह यादव खोल रहे ना ही शिवपाल यादव. इनके पास हर सवाल का बस एक ही जवाब है 25 सितंबर का इंतजार कीजिए उस दिन मुलायम सिंह यादव बड़ा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऐलान करेंगे.

राज्य सम्मलेन की तैयारियां पूरी

समाजवादी पार्टी के 8वें राज्य सम्मलेन की तैयारियां पूरी हो चुकी है. 23 सितंबर को सम्मलेन में सपा के 15000 से अधिक प्रतिनिधि भाग लेंगे. प्रतिनिधि सम्मेलन की शुरुआत राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश अपने भाषण से करेंगे. सम्मेलन में राजनैतिक और आर्थिक प्रस्ताव पर चर्चा होगी. शाम 4:30 बजे पर प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होगा. शाम 5 बजे रामगोपाल यादव सम्मेलन का समापन करेंगे.

मुलायम पर टिकी निगाहें 

 

ऐसे में आखिर 25 सितंबर को मुलायम सिंह क्या ऐलान करेंगे? क्या वह अखिलेश से राजनैतिक संबंध तोड़ लेंगे? क्या वह नई पार्टी का ऐलान करेंगे? वो क्या करेंगे? इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं. वहीं शिवपाल यादव के कैंप को उम्मीद है कि अब समाजवादी पार्टी को लेकर तमाम उम्मीदें खत्म हो चुकी है और अलग रास्ता चुनना ही एकमात्र रास्ता बचा है.

आपके पिता पुत्र के बीच क्या बचा है इसका अंदाजा 21 सितंबर को विक्रमादित्य मार्ग के दो दफ्तरों की मीटिंग से हो जाता है. समाजवादी पार्टी के दफ्तर और समाजवादी पार्टी दफ्तर से महज कुछ मीटर की दूरी पर मौजूद लोहिया ट्रस्ट के दफ्तर में अलग-अलग मीटिंग चल रही थी. अखिलेश राष्ट्रीय अधिवेशन के पहले अपनी ताकत बढ़ा रहे थे, अखिलेश हजारों की भीड़ में बीएसपी नेता इन्द्रजीत सरोज को पार्टी में शामिल कर रहे थे तो मुलायम सिंह यादव लोहिया ट्रस्ट के सचिव के पद से रामगोपाल यादव की छुट्टी कर रहे थे.

शिवपाल कैंप मानकर चल रहा है कि मुलायम सिंह यादव 25 सितंबर को नई पार्टी का ऐलान करेंगे. उसके बाद तमाम वैसे समाजवादियों को जोड़ा जा सकता है जो अखिलेश से नाराज हैं. मुलायम सिंह यादव के करीबी नेताओं ने इसके संकेत देने शुरू भी कर दिए हैं. ऐसे में 25 तारीख को तमाम नज़रें मुलायम सिंह पर टिकी होंगी कि वो क्या फैसला लेते है. शिवपाल यादव पिछले कई महीनों से अलग मोर्चे की बात कर रहे हैं जबकि उनके समर्थकों का दबाव अलग पार्टी बनाने का ह, ताकि सीधे-सीधे अखिलेश यादव को चुनौती दी जा सके. वहीं आखिरी वक्त पर मुलायम सिंह के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए फिलहाल कोई भी कयास लगाना सही नहीं होगा.

अखिलेश यादव लगातार इस सवाल को टाल रहे हैं और उनकी कोशिश पिता को अलग कर शिवपाल कैंप को कुचलने की है. बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुलायम सिंह को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में अखिलेश ने कहा कि मुलायम उनके पिता हैं लेकिन रही बात राजनीति की तो फिलहाल दोनों की लाइन अलग है. बहरहाल मुलायम सिंह हमेशा उम्मीदों के विपरीत फैसला लेने वाले माने जाते रहे हैं, ऐसे में अध्यक्ष पद दोबारा नहीं मिलने पर मुलायम क्या फैसला लेते हैं इसपर सबकी नज़र रहेगी.

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