अभी अभी : मोदी सरकार का बड़ा फैसला, चीन से नहीं खरीदा जाएगा कोई सामान

नई दिल्ली  : चाइना को झटका देने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी है। केंद्र सरकार सोलर पैनल की खरीद को कम करने पर विचार कर रही है।modi

सरकार देश में सोलर पैनल मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री की ग्रोथ के लिए 21,000 करोड़ रुपये की सहायता राशि जारी करने की योजना बना रही है। सरकार के दो शीर्ष अधिकारियों के मुताबिक सोलर मैन्युफैक्चरिंग के लिए प्रधानमंत्री योजना के तहत यह फंड जारी किया जाएगा। 
फिलहाल सरकार फोटोवोल्टैक ऊर्जा की सबसे ज्यादा खरीद चीन से ही करती है। इसकी वजह घरेलू स्तर पर किसी नीति का अभाव है। इस तरह केंद्र सरकार ‘प्रयास’ नाम से स्कीम चलाकर सोलर पैनल के मामले में देश को अग्रणी बनाने के प्रयासों में जुटी है।
सरकार बढ़ाएगी उर्जा क्षमता
न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग के मुताबिक मोदी सरकार नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाकर 2022 तक 175 गीगावॉट तक करने की तैयारी में है। फिलहाल यह क्षमता महज 45 गीगावॉट ही है।
सरकार ने फिलहाल इस योजना को उजागर नहीं किया है।
केंद्र सरकार सोलर ऊर्जा को लेकर नए टारगेट हासिल करना चाहती है।
ब्लूमबर्ग के अनुमान के मुताबिक सरकार को सोलर ऊर्जा के नए लक्ष्यों को हासिल करने के लिए 200 बिलियन डॉलर की राशि खर्च करनी पड़ सकती है।
सोलर उर्जा क्षमता बढ़ाकर एक्सपोर्ट करने की योजना
ब्लूमबर्ग के मुताबिक भारत सरकार सोलर ऊर्जा के विकास के मामले में चीन की इंडस्ट्री का ही अनुसरण करते हुए इस सेक्टर में एक्सपोर्ट इंडस्ट्री विकसित करने की तैयारी में है।
प्रयास प्रोग्राम मोदी सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का भी हिस्सा है। इस स्कीम के तहत सरकार 2019 तक 5 गीगावॉट ऊर्जा की उत्पादन क्षमता वाली यूनिट्स स्थापित करने की तैयारी में है। इसके बाद 2026 तक इस लक्ष्य को 20 गीगावॉट तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
अधिकारियों ने बताया कि नवीकरणनीय ऊर्जा मंत्रालय इस मामले में नीति आयोग की सलाह पर योजना तैयार कर रहा है। मंत्रालय की ओर से इस स्कीम को फाइनैंस मिनिस्ट्री के समक्ष पेश किया जाएगा। इसके बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा।
पिछले महीने ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने मुंबई में कहा था कि सरकार की नीति घरेलू स्तर पर सोलर उपकरणों को तैयार करने की है।
लाइवइंडिया.लाइव.कॉम से साभार  

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