अभी अभी: सिंधु नदी पर चीन के 90 हजार करोड़ की मदद से बांध बनाएगा PAK?

पाकिस्तान सरकार गिलगित-बाल्टिस्तान इलाके में सिंधु नदी पर बनने वाले बांध पर चीन के फंड से अगले साल काम शुरू करने की उम्मीद कर रही है. समाचार एजेंसी रॉयटर को दिए इंटरव्यू में पाकिस्तान के योजना मंत्री एहसान इकबाल ने बात कही.अभी अभी: सिंधु नदी पर चीन के 90 हजार करोड़ की मदद से बांध बनाएगा PAK? ट्रंप का इंतजार खत्म, व्हाइट हाऊस में रहने आईं पत्नी मेलानिया

दरअसल पाकिस्तान वर्षों से सिंधु नदी पर बांधों का जाल बिछाना चाहता है. यह इलाका पाक अधिकृत कश्मीर में आता है और भारत इन बांधों को लेकर आपत्तियां जताता रहा है. ऐसे में विवादित क्षेत्र होने के कारण पाकिस्तान को इसके लिए कोई अंतरराष्ट्रीय एजेंसी फंड देने को तैयार नहीं थी. पाकिस्तान अब चीन की तरफ से मदद मिलने की उम्मीद कर रहा है, लेकिन इससे भारत के साथ बढ़ने की भी आशंका है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की नई ‘वन बेल्ट वन रोड’ नीति के बाद से पाकिस्तान को यह उम्मीद जगी है. चीन इसके तहत आधुनिक सिल्क रोड बनाना चाहता है, जो एशिया को यूरोप और अफ्रीका से जोड़ते हुए व्यापार के लिए नई राह खोलेगा. 

सिंधु नदी पर 12 अरब से 14 अरब डॉलर की लागत से बनने वाले दियामेर-भाशा बांध से 4500 मेगावॉट बिजली के उत्पादन का अनुमान है. इसके अलावा यह पाकिस्तान में खेतों की सिंचाई के लिए पानी की सुचारू आपूर्ति भी सुनिश्चित करेगा.

चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) में पाकिस्तान का नेतृत्व करने वाले एहसन इकबाल ने बताया कि इसके लिए बीजिंग की कंपनी को चुन लिया गया है, जो अपने स्थानीय पार्टनर के साथ मिलकर 10 सालों में डैम का निर्माण पूरा करेगी. उन्होंने बताया कि अगले साल जुलाई से शुरू होने वाले नए वित्तीय वर्ष में इस बांध का निर्माण शुरू हो जाएगा.

बता दें कि पाकिस्तान सरकार ने सिंधु पर दियामेर-भाशा बांध की योजना 2009-10 में बनाई गई थी. भारत की तत्कालीन यूपीए सरकार ने इस पर पाकिस्तान की तत्कालीन आसिफ अली जरदारी सरकार के समक्ष आपत्ति जताई थी. भारत की आपत्ति के बावजूद पाकिस्तान ने इस योजना को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया. जवाब में भारत ने ऐसी परियोजनाओं के लिए फंड देने वाली विश्व बैंक और एशियन बैंक जैसी संस्थाओं में अपनी आपत्ति दर्ज कराई. इस वजह से विश्व बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) ने बांध बनाने के लिए पाकिस्तान को 14 अरब डॉलर का कर्ज देने से इनकार कर दिया था.

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