अभी-अभी: हुआ बड़ा खुलासा अखिलेश यादव ने ड्रीम प्रोजेक्ट में किया ‘महा घोटाला’

यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट एक के बाद एक घोटालों में फंस रहे हैं। गोमती रिवर फ्रंट के बाद अब आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे में घोटाले का खुलासा हुआ है।

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उत्तर प्रदेश में सत्ता का निजाम क्या बदला, पुरानी सरकार के दौरान हुए घोटाले भी सामने आने लगे हैं। अखिलेश यादव जिन कामों के दम पर जनता से वोट अपील कर रहे थे उनमे से एक काम था आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे। इस हाईवे को लेकर अखिलेश ने जोरदार प्रचार किया था। उन्होंने कहा था कि ये हाईवे प्रदेश के विकास का हाईवे है। इस हाईवे का उद्घाटन से चुनाव से पहले उन्होंने आनन-फानन में कर दिया था। अब इस प्रोजेक्ट से एक महा घोटाला निकल कर सामने आ रहा है। आपको बता दें कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ पहले ही अखिलेश के दो ड्रीम प्रोजेक्ट गोमती रिवर फ्रंट और जय प्रकाश इंटरनेशनल सेंटर में अनियमितताओं की जांच का आदेश दे चुके हैं। अब आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे में घोटाले से अखिलेश की छवि पर दाग लग रहा है।

बता दें कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे को लेकर अखिलेश यादव ने खूब प्रचार किया था। इसके लिए जब जमीन का अधिग्रहण किया गया था, तो उसके बदले मुआवजा दिया गया था। अब सामने आ रहा है कि मुआवजा बांटने के नाम पर घोटाला हुआ है। ये बात सामने आने के बाद 27 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। ये अखिलेश के लिए झटके वाली खबर है। उनके ड्रीम प्रोजेक्ट के नाम पर घोटाला हुआ और उन्हे पता तक नहीं चला। सूत्रों के मुताबिक इस एक्सप्रेस वे के लिए अधिकारियों ने कृषि वाली भूमि को आबादी वाली भूमि बताकर ज्यादा मुआवजा दिया था। इस तरह से अधिकारियों ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे में करोड़ों रूपये का मुआवजा घोटाले को अंजाम दिया। इस मामले में 27 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

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जिन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है उनमें चकबंदी अधिकारी भी शामिल हैं। बता दें कि पूरा मामला सिरसागंज तहसील के गांव बछेला-बछेली से जुड़ा है। इस गांव से एक्सप्रेस वे को गुजरना था। इसके लिए जमीन का अधिग्रहण के लिए सात अक्टूबर और 30 दिसंबर 2013 को नोटिफिकेशन जारी की गई थी। बता दें कि मुआवजा घोटाले की जानकारी यूपी एक्सप्रेसवे डेवलपमेंट इंडस्ट्रियल अथॉरिटी के स्पेशल फील्ड ऑफिसर ने दी। उन्होंने बताया कि बैनामे के दौरान कुछ जमीन को आबादी वाले इलाके में दिखा दिया गया था। ऐसा करने के कारण 3.29 करोड़ रुपये ज्यादा मुआवजे का भुगतान करना पड़ा। इस खुलासे के बाद डीएम नेहा शर्मा के आदेश पर केस दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि इस घोटाले में कई नेताओं के नाम भी सामने आ सकते हैं।

आपको बता दें कि जिन लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है उनमें तत्कालीन बंदोबस्त अफसर, चकबंदी मैनपुरी/फिरोजाबाद, तत्कालीन सहायक चकबंदी अफसर फिरोजाबाद और तत्कालीन रीडर न्यायलय बंदोबस्त अधिकारी और लेखपाल के नाम शामिल हैं। योगी सरकार पहले ही कह चुकी है कि अगर भ्रष्टाचार का कोई मामला सामने आता है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में अखिलेश यादव के लिए ये बुरी खबर है। इस से उनकी छवि पर तो दाग लग ही रहा है ये भी कहा जा रहा है कि वो पार्टी के बड़े नेताओं के दबाव में भ्रष्टाचार होते देखते रहे। बता दें कि गोमती रिवर फ्रंट को लेकर पहले ही अखिलेश पर उंगली उठ रही है। ऐसे में उनके विकास के प्रतीक अब घोटाले में फंसते जा रहे हैं।

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