अमरनाथ यात्रा में खुफिया अलर्ट और 40 हजार जवानों की तैनाती के बाद भी कैसे हो गया हमला?

सोमवार को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में अमरनाथ यात्रियों पर आतंकियों ने हमला कर दिया. हमले में 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई है. इस हमले ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. ये हमला उस स्थिति में हुआ जब यात्रा के लिए सुरक्षाबलों की संख्या पिछले साल से बढ़ाकर लगभग दोगुनी की गई थी. बाइक पर आए दो आतंकियों ने ही इस हमले को अंजाम दिया. अमरनाथ यात्रा 29 जून को शुरू हुई थी. यात्रा शुरू होने से पहले ही हमले का खुफिया अलर्ट जारी किया गया था. जिसके बाद अमरनाथ यात्रा को लेकर सुरक्षा और पुख्ता की गई थी.

अमरनाथ यात्रा में खुफिया अलर्ट और 40 हजार जवानों की तैनाती के बाद भी कैसे हो गया हमला?

ये किए गए सुरक्षा के खास इंतजाम:

-केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तीर्थयात्रा के शांतिपूर्ण संचालन के लिए अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की है.

-केंद्र ने राज्य को पैरामिलिट्री फोर्स की 250 अतिरिक्त कंपनियां दी हैं.

-सीमा सुरक्षा बल ने यात्रा के लिए 2000 जवान तैनात किए हैं.

-सेना ने 5 बटालियन और 54 अतिरिक्त कंपनी सुरक्षाबल दिए हैं.

-पुलिस, सेना, बीएसएफ और सीआरपीएफ के जवान सुरक्षा में तैनात.

-300 किलोमीटर लंबी अमरनाथ यात्रा के लिए लगभग 40 हजार सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं.

यात्रा की निगरानी के भी खास इंतजाम

सिर्फ सुरक्षाबल ही नहीं बल्कि तकनीकी तौर पर अमरनाथ यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित संपन्न कराने के इंतजाम किए गए थे. यात्रा की निगरानी के लिए सीसीटीवी, जैमर्स, डॉग स्कॉड की तैनाती की गई है. वहीं आतंकियों से निपटने के लिए बुलेट प्रूफ बंकर्स भी बनाए गए हैं. इसके अलावा आसमान से भी आतंकी हमलों पर पैनी नजर रखी जा रही है. सेटेलाइट ट्रैकिंग के जरिए आतंकियों के नापास मंसूबों को नाकामयाब करने की व्यवस्था की गई है.

40 दिन लंबी यात्रा

इस साल अमरनाथ यात्रा 40 दिनों तक चलेगी. यात्रा 29 जून से शुरू हुई थी, जो 7 अगस्त तक चलेगी. हालांकि, पिछली बार ये यात्रा 48 दिनों तक चली थी. वहीं इस बार बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए 2 लाख 12 हज़ार अमरनाथ यात्रियों ने पंजीकरण कराया था.

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