अमेरिका में प्रवासी बच्चों की, माता-पिता से ऐसे हो रही मुलाकात

अमेरिका-मेक्सिको बॉर्डर पर अवैध प्रवासी मां-बाप से अलग किए गए बच्चों को उनसे मिलाने का काम शुरू किया जा चूका है.  इन बच्चो को मिलाने से पहले इनके कुछ टेस्ट किये जा रहे है. अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर अवैध प्रवासी मां-बाप से अलग किए गए बच्चों को उनसे मिलाने से पहले उनका डीएनए टेस्ट किया जा रहा है. अमेरिका-मेक्सिको बॉर्डर पर अवैध प्रवासी मां-बाप से अलग किए गए बच्चों को उनसे मिलाने का काम शुरू किया जा चूका है.  इन बच्चो को मिलाने से पहले इनके कुछ टेस्ट किये जा रहे है. अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर अवैध प्रवासी मां-बाप से अलग किए गए बच्चों को उनसे मिलाने से पहले उनका डीएनए टेस्ट किया जा रहा है.   इस मामले में अमेरिका के एक अधिकारी ने बुधवार देर शाम को जानकारी देते हुए बताया कि , "बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इन बच्चों के माता-पिता होने का दावा कर बच्चो की तस्करी करना काफी आसान है. इसलिए पूरी जांच और बच्चों के माता-पिता होने की पुष्टि के बाद ही बच्चों को उन्हें सौंपा जाएगा." इस अधिकारी ने यह जानकारी देने से इनकार कर दिया कि क्या डीएनए जांच के लिए सहमति जरूरी है या स्टोरेज डेटाबेस के जरिए डीएनए की जांच की जाएगी.  इसके बाद टेक्सास में एक गैरलाभकारी संस्था 'आरएआईसीईएस' की संचार निदेशक जेनिफर के.फाल्कन ने शरणार्थियों और प्रवासियों के लिए निशुल्क और कम दर पर कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराने की पेशकश की है.  उन्होंने इस पूरे कदम को निंदनीय बताया है क्योंकि इस तरह के संवेदनशील डेटा को संग्रहित करने से सरकार इन बच्चों पर जीवन भर अपनी नजर रख सकती है

इस मामले में अमेरिका के एक अधिकारी ने बुधवार देर शाम को जानकारी देते हुए बताया कि , “बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इन बच्चों के माता-पिता होने का दावा कर बच्चो की तस्करी करना काफी आसान है. इसलिए पूरी जांच और बच्चों के माता-पिता होने की पुष्टि के बाद ही बच्चों को उन्हें सौंपा जाएगा.” इस अधिकारी ने यह जानकारी देने से इनकार कर दिया कि क्या डीएनए जांच के लिए सहमति जरूरी है या स्टोरेज डेटाबेस के जरिए डीएनए की जांच की जाएगी.

इसके बाद टेक्सास में एक गैरलाभकारी संस्था ‘आरएआईसीईएस’ की संचार निदेशक जेनिफर के.फाल्कन ने शरणार्थियों और प्रवासियों के लिए निशुल्क और कम दर पर कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराने की पेशकश की है.  उन्होंने इस पूरे कदम को निंदनीय बताया है क्योंकि इस तरह के संवेदनशील डेटा को संग्रहित करने से सरकार इन बच्चों पर जीवन भर अपनी नजर रख सकती है

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