अयलान के गम में आंसू सूखे भी नहीं थे, अब दुनिया को रुला गया शोहयात

इंस्तांबुल। तुर्की के बीच पर पड़ी सीरिया के मासूम रिफ्यूजी अयलान कुर्दी की लाश की तस्वीर सबके जेहन में होगी। देश में चल रहे गृहयुद्ध से बचकर सितंबर 2015 में कुर्दी और उसका परिवार दूसरे देश में शरण लेने जा रहा था। मगर ऐसा नहीं हो सका। पूरी दुनिया में अलयान की वह तस्वीर चर्चा में रही।अयलान के गम में आंसू सूखे भी नहीं थे, अब दुनिया को रुला गया शोहयात

अब म्यांमार से एक और झकझोर देने वाली फोटो सामने आई है। 16 महीने के एक बच्चे की लाश की फोटो जो कीचड़ में सनी है, वो म्यांमार में रोहिंग्या समुदाय की बदहाली की कहानी खुद बयां करती है। बच्चे का नाम मोहम्मद शोहयात था। वह अपने परिवार के साथ म्यांमार छोड़कर बांग्लादेश जा रहा था। समुदाय के लोग बताते हैं कि उन्हें म्यांमार की सेना सता रही है। देश छोड़कर जाने वाले कई लोगों ने सुरक्षा बलों के हाथों बलात्कार, हत्या और लूट का शिकार होने की बात कही है।

बड़ी खबर: वायुसेना ने की सर्जिकल स्ट्राइक, बॉर्डर पारकर मारे आतंकी

शोहयात भी अपनी मां और भाई के साथ नाफ नदी पार करके बांग्लादेश जाने की कोशिश कर रहा था। तभी उनकी नाव डूब गई। सभी लोगों की मौत हो गई। शोहयात की लाश बाद में कीचड़ में सनी हुई मिली। इस तस्वीर की तुलना अयलान कुर्दी की फोटो से की जा रही है। शोहयात के पिता जफर आलम तो पहले ही बांग्लादेश पहुंच चुके हैं।

आलम ने दुनिया से अपील की है कि, ‘रोहिंग्या समुदाय के लोगों की व्यथा पर ध्यान दें।’ उन्होंने सीएनएन को बताया,’हमारे गांव में, हेलिकॉप्टर्स ने हम पर गोलियां बरसाईं। म्यांमार के सैनिकों ने हमारे ऊपर गोलियां दागी। मेरे दादा और दादी को जिंदा जला दिया। हमारे पूरे गांव को सेना ने आग लगा दी। कुछ नहीं बचा। जब मैं यह फोटो देखता हूं तो मर जाने को दिल करता है। इस दुनिया में रहने का कोई मतलब नहीं है।’

बड़ी खबर: मोसुल से फिर भाग गया बगदादी

आलम ने कहा, ‘मैं पूरी दुनिया को यह बात बताना चाहता हूं। म्यांमार की सरकार को और वक्त नहीं दिया जाना चाहिए। अगर आप कार्रवाई करने में देर करेंगे तो वो सभी लोग रोहिंग्या समुदाय के लोगों को मार डालेंगे।’

आपको बता दें कि रोहिंग्या समुदाय के लोग म्यांमार में बौद्ध धर्म के अनुयायियों के बहुमत से घुटन महसूस कर रहे हैं। यही कारण है कि हजारों लोग सीमा पार कर बांग्लादेश जा रहे हैं। 2012 में रखीन प्रांत में भड़की हिंसा के बाद से 1 लाख 20 हजार से ज्यादा लोग विस्थापन कैंपों में फंसे हुए हैं। यहां न उन्हें नागरिकता मिल रही है और न ही स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा।

 

You May Also Like

English News