अस्पताल से मरीज को डिस्चार्ज होने के लिए देने पड़े 40 हजार के सिक्के

नही  : 500-1000 के नोट 8 नवंबर से देश में बैन हो गए हैं। आम आदमी को इस मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है।

 सबसे ज्यादा दिक्कत उन लोगों को है जिनके परिजन अस्पताल में भर्ती हैं। ऐसा ही वाकया कोलकाता शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में देखने को मिला। जहां एक डेंगू मरीज के परिजनों ने अस्पताल का 40 हजार रुपये का बिल सिक्कों में जमा किया।
अस्पताल से मरीज को डिस्चार्ज होने के लिए देने पड़े 40 हजार के सिक्के
बुधवार को बीपी पोद्दार हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर ने मरीज सुकांत शौले के परिजनों को उनके डिस्चार्ज के लिए 40 हजार रुपये का बंदोबस्त करने को कहा। परिजनों के पास न तो कार्ड था और न ही 500 और 1000 रुपये से छोटे नोट। उन्होंने अस्पताल से पुराने नोट स्वीकार करने को कहा लेकिन अस्पताल ने मना कर दिया। अस्पताल ने चेक से भी पेमेंट लेने से मना कर दिया।
ऐसी स्थिति देखकर परिवार ने अपने वॉट्सऐप के जरिए दोस्तों को छुट्टे पैसे देने के लिए मैसेज किया। इस मैसेज को देख लोगों ने जो प्रतिक्रिया दी उस पर विश्वास नहीं होता। सुबह 3 बजे तक ही परिवारवालों के पास 40 हजार रुपये के सिक्के जमा हो चुके थे। गुरुवार सुबह ही इन सिक्कों को एक बड़े जूट बैग में लेकर परिवार अस्पताल पहुंच गया।
 अस्पताल प्रशासन इतने सिक्के देख हैरान तो हुआ ही साथ ही सिक्के स्वीकार करने से भी मना कर दिया। अस्पताल ने इसकी जगह डिमांड ड्राफ्ट देने की मांग की। इस पर परिवारवालों ने पुलिस में शिकायत करने की चेतावनी दी। फिर अस्पताल ने यह सिक्के गिनने शुरू किए। अस्पताल के 6 स्टाफ ने 3 घंटे में सिक्कों की गिनती पूरी की और मरीज सुकांत को दोपहर 3 बजे डिस्चार्ज किया।
सुकांत के भाई स्नेहाशिष ने बताया कि ‘हमने पहले अस्पताल से पुराने नोट लेने की अपील की लेकिन उन्होंने मना कर दिया। तो हमने सिक्के जमा करने के बारे में सोचा, जो मुश्किल काम तो था लेकिन नामुमकिन नहीं था। कई लोगों ने अपने बच्चों के पिगी बैंक से सिक्के लाकर दिए। हमें आधी रात तक लोग सिक्के देने आए।

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