आज दोपहर तक हो सकेगी तलवार दंपति की रिहाई, कैदी के तौर पर कमाया पैसा दान किया

आरुषि-हेमराज मर्डर केस में करीब चार साल जेल की सजा काट चुके आरुषि के माता-पिता डॉक्टर राजेश और नुपुर तलवार सोमवार को दोपहर करीब 2:30 बजे तक रिहा हो सकते हैं. जेल में राजेश तलवार को कैदी नंबर 9342 और नुपुर तलवार को कैदी नंबर 9343 के तौर पर जाना जाता था. सीबीआई की अदालत ने तलवार दंपति को हत्या का आरोपी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. जबकि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी कर किए जाने का फैसला सुनाया था.आज दोपहर तक हो सकेगी तलवार दंपति की रिहाई, कैदी के तौर पर कमाया पैसा दान कियाएशिया कप में भारत ने पाकिस्तान को दी करारी हार, चारों तरफ खुशी का माहौल!

आज रिहाई से पहले क्या-क्या होगा?

सुबह 10 बजे सीबीआई कोर्ट खुलेगा और उसके बाद कोर्ट की औपचारिकता शुरू होगी. करीब 11 बजे तलवार का वकील मनोज सिसोदिया कोर्ट में जाएगा और कोर्ट को हाई कोर्ट की सर्टिफाइड कॉपी सौंपेगा. कोर्ट औपचारिकता में करीब 2 घंटे का वक्त लग सकता है. करीब 1 बजे आदेश दस्ती परवाना लेकर डासना जेल के लिए चलेगा. करीब 1.30 बजे आदेश दस्ती डासना जेल पहुंचेगा. उधर, जेल में रिहाई की सारी तैयारी पहले ही हो चुकी है. करीब 1 घंटे की औपचारिकता और मेडिकल के बाद करीब 2.30 बजे तलवार दंपति जेल से रिहा हो सकते हैं.

लाइन लगाकर कैदियों ने कराया इलाज

तलवार दंपति की रिहाई को ध्यान में रखते हुए उनके साथ जेल में बंद कैदियों ने आज सुबह लाइन लगा कर अपना इलाज करवाया. माना जा रहा है कि आज तलवार दंपति जेल से रिहा हो जाएंगे.

छोड़ दिया जेल में कमाया पैसा

जेल में डेंटल क्लीनिक के सेटअप में तलवार दंपति ने अहम योगदान किया है. उन्होंने तमाम डेंटल उपकरण भी जेल को मुहैया कराए हैं. इसके अलावा जेल में रहने के दौरान कैदियों के इलाज के एवज में मिलने वाला रोजना 40 रूपए मेहनताना भी नहीं लिया है. तलवार दंपति ने जेल में बिताए अपने 1417 दिनों के दौरान करीब 99 हजार रुपये कमाए थे. इसमें राजेश तलवार का अब तक बंदी के तौर पर जेल में अपनी सजा काटने के दौरान 49 हजार 520 रुपए मेहनताना बना है.

गरीबों को बांट जाएंगे अपना सामान

राजेश और नुपुर तलवार ने जेल में जो भी अपनी जरूरतों के समान जेल मैनुअल के हिसाब से मंगाए थे (जो कैदी बुला सकते हैं). वो समान तलवार दंपति जेल में ही गरीब बंदियों को बांट कर जेल से बाहर जाएंगे. इसके साथ ही राजेश और नुपुर तलवार जेल में जो भी अपनी धामिर्क इतिहास और आध्यात्मिक किताबें लाए थे वो जेल लाइब्रेरी में जेल बंदियों के लिए छोड़कर जाएंगे.

मिलेगा अच्छा ग्रेड 

जेल में रहने के दौरान नुपुर की एक महिला बंदी से दोस्ती हो गई थी जो जेल से रिहा होने के बाद नूपुर से मिलने आया करती थी. जेल प्रशासन नुपुर और राजेश तलवार के जेल में रहने के दौरान उनके कामकाज और व्यवहार के हिसाब से उनको अच्छा ग्रेड देने की तैयारी कर रहे हैं.

तलवार दंपति ने इतने दिन काटी जेल

राजेश तलवार ने डासना जेल में 3 साल 10 माह और 21 दिन बतौर सजायाफ्ता कैदी के तौर पर काटे हैं. वहीं विचाराधीन के तौर पर 1 माह 20 दिन जेल में काटे हैं. जबकि नुपुर तलवार ने डासना जेल में 3 साल 6 माह और 22 दिन सजायाफ्ता कैदी के तौर पर काटे हैं. वहीं विचाराधीन के तौर पर 4 माह 26 दिन जेल में काटे हैं.

कोर्ट के आदेश के बाद भी गुरुवार को नहीं हुई थी रिहाई

गुरुवार, 12 अक्टूबर को ही हाई कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के बाद भी तलवार दंपति की रिहाई नहीं हो पाई क्योंकि समय से जेल प्रशासन को फैसले की कॉपी नहीं मिली थी. शनिवार और रविवार को छुट्टी रही और अब पूरी संभावना है कि दोनों की रिहाई आज हो जाएगी.

रिहा होने के बाद भी कैदियों का इलाज करेंगे तलवार दंपति

जेल से रिहा होने के बाद भी तलवार दंपति अन्य कैदियों के इलाज के लिए हर 15 दिन बाद डासना जेल जाते रहेंगे. जेल प्रशासन ने ही उनसे गुजारिश की थी, वे कैदियों के दांत के इलाज के लिए आया करें. तलवार दंपति ने जेल के अंदर डेंटल क्लिनिक का पूरा सेटअप बनाया हुआ है. उन्होंने ही वहां कई तरह के उपकरण उपलब्ध कराए. वे दोनों नियमित तौर पर जेल में बंद अन्य कैदियों के दांतों का इलाज किया करते थे. इसके एवज में तलवार दंपति को रोजाना 40 रुपये मिलता था, जिसे उन्होंने अभी तक नहीं लिया है.

सीबीआई कोर्ट ने सुनाई थी आजीवन कारावास की सजा

बताते चलें कि फैसला सुनाते हुए हाई कोर्ट ने सीबीआई की जांच में कई खामियों का जिक्र किया. कोर्ट ने कहा कि कई सबूतों कीना तो पड़ताल की गई और ना ही साक्ष्यों को वेरिफाई करने की कोशिश की गई. विशेष सीबीआई कोर्ट ने आरुषि और हेमराज की हत्या के मामले में तलवार दंपति को 26 नवंबर, 2013 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. हाई कोर्ट ने कहा कि परिस्थितियों और रिकार्ड में दर्ज साक्ष्यों के मुताबिक तलवार दंपति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता.

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