आतंकियों की तरह नक्सली भी कर रहे बच्चों को भर्ती, भारत करे कार्रवाई: यूएन

कश्मीर में सक्रिय आतंकी समूह की तरह नक्सली भी बच्चों की भर्ती कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतेरस की रिपोर्ट में यह कहा गया है। यूएन महासचिव ने भारत सरकार से बच्चों को जो लोग भर्ती कर रहे हैं उनके खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया है।शांति बहाली के लिए संयुक्त राष्ट्र उपमहासचिव जेआन पिएरे लाक्रोइक्स ने यूएन के शांति अभियानों में सहयोग के लिए भारत को धन्यवाद दिया। शनिवार को उपमहासचिव ने कहा कि वह भारत को धन्यवाद देने और शांति अभियान से संबंधित ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा के लिए नई दिल्ली आए हैं। यूएन शांति अभियान में बड़ी संख्या में सैनिकों को भेजने वाले देशों में भारत शामिल है। पिछले 70 वर्षो के दौरान शांति अभियानों में बड़ी संख्या में भारत के लोग मारे जा चुके हैं।

गुतेरस की सशस्त्र संघर्ष में बच्चे रिपोर्ट 2017 में जैश-ए-मोहम्मद एवं हिजबुल मुजाहिदीन की पहचान की गई है। ये दोनों आतंकी संगठन कश्मीर में हथियारबंद कारनामों को अंजाम देने के लिए बच्चों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘संयुक्त राष्ट्र को नक्सलियों द्वारा लगातार बच्चों की भर्ती और उनके इस्तेमाल पर रिपोर्ट मिल रही है। खास तौर से छत्तीसगढ़ और झारखंड में नक्सली ऐसा कर रहे हैं। झारखंड में बच्चों को जबरन भर्ती करने के लिए नक्सली कथित रूप से लाटरी प्रणाली का इस्तेमाल करते हैं। जम्मू एवं कश्मीर में राष्ट्रीय सुरक्षा बलों के साथ टकराव के परिप्रेक्ष्य में बच्चों की भर्ती और उनके इस्तेमाल की तीन घटनाओं की जानकारी मिली है। इसमें एक जैश-ए-मोहम्मद और दो हिजबुल मुजाहिदीन से संबंधित है।’

इसी सप्ताह महासभा में पेश अपनी रिपोर्ट में गुतेरस ने कहा है कि वह सरकार से बच्चों की भर्ती और उनका इस्तेमाल करने वालों को दबोचने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। बच्चों के खिलाफ हिंसा की स्थिति समाप्त करने को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र के साथ काम करने को कहेंगे।

शांति बहाली के लिए संयुक्त राष्ट्र उपमहासचिव जेआन पिएरे लाक्रोइक्स ने यूएन के शांति अभियानों में सहयोग के लिए भारत को धन्यवाद दिया। शनिवार को उपमहासचिव ने कहा कि वह भारत को धन्यवाद देने और शांति अभियान से संबंधित ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा के लिए नई दिल्ली आए हैं। यूएन शांति अभियान में बड़ी संख्या में सैनिकों को भेजने वाले देशों में भारत शामिल है। पिछले 70 वर्षो के दौरान शांति अभियानों में बड़ी संख्या में भारत के लोग मारे जा चुके हैं।

 

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