आतंक का राजा परवेज ने मात्र 17 हजार रुपए में अमरोहा से खरीदा था कट्टा..

आतंकी कनेक्शन में अमरोहा का नाम आते ही यहां खलबली मच गई। यहां पर दिल्ली पुलिस के साथ ही अमरोहा के कई थाना की फोर्स के साथ एलआइयू की टीम की पड़ताल में लगी है।

दिल्ली में कल पकड़े गए आतंकियों के बाद अमरोहा में खलबली मची हुई है। डीएनएस कालेज, डिडौली के साथ वेंकेटेश्वर यूनिवर्सिटी में दिल्ली पुलिस की एक टीम, अमरोहा पुलिस व एलआईयू की टीमों ने जाकर डेरा डाल दिया। दोनों कालेज से आतंकियों का रिकार्ड खंगाला जा रहा है। स्टाफ व छात्रों से पूछताछ चल रही है।

खुफिया विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि आतंकियों से बरामद एक पिस्टल मूल रूप से रजबपुर थाना क्षेत्र के गांव रामपुर घना निवासी ठेकेदार शाह आलम की लाइसेंसी पिस्टल है। बीती एक सितंबर को शाह आलम की तबीयत खराब हुई थी। परिवार के लोगों ने ïउसे मुरादाबाद के साईं हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। वर्तमान में शाह आलम का परिवार देहात थाना क्षेत्र में आशियाना कालोनी में रहता है। जब वह दो सितंबर को घर पहुंचा तो उसे पिस्टल नहीं मिली। उसने परिवार के लोगों से पूछा तो पता चला कि एक सितंबर को रामपुर घना निवासी उसका भांजा काशिफ घर आया था। उससे पूछताछ की गई तो पहले काशिफ मना करता रहा, लेकिन बाद में पिस्टल चोरी करना कबूल कर लिया।

काशिफ ने यह पिस्टल गांव के ही शहजाद को दे दी थी। शहजाद ने डिडौली कोतवाली के गांव मुंढा इम्मा के अपने दोस्त मोहसिन से संपर्क कर पिस्टल बेचने की बात कही। मोहसिन डीएनएस इंटर कालेज में कक्षा नौ का छात्र है। दिल्ली में पकड़े गए आतंकी परवेज राशिद ने उसे चार माह तक कालेज में पढ़ाया भी था। दोनों के बीच बात भी होती रहती है। जांच में सामने आया है कि जब चार सितंबर को परवेज व जमशेद डिडौली आए तो मोहसिन ने उससे पिस्टल बेचने की बात कही। परवेज ने मात्र 17 हजार रुपए में पिस्टल खरीद ली।

उसके साथ आए दूसरे आतंकी जमशेद भी मुरादाबाद के पाकबड़ा स्थित कालेज में बीडीएस में एडमिशन लेने की तैयारी कर रहा था। इसके लिए दोनों ने वहां जानकारी भी की थी। उधर जब तक शाह आलम दोनों युवकों शहजाद व मोहसिन के जरिए आतंकी परवेज तक पहुंच पाता। उस समय तक दोनों डिडौली से दिल्ली जा चुके थे। कोई अधिकारी जांच पूरी होने से पहले बोलने को तैयार नहीं है।

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