आपको पता है चीन के शंघार्इ में लगता है शादी के लिए रिश्तों का बाजार

चीन के शंघार्इ में पीपुल्स स्क्वायर के पीपुल्स पार्क में कर्इ सालों से एक अनोखा शादी बाजार लगता है। इस बाजार में शादी का सामान नहीं बल्कि रिश्ते उपलब्ध कराये जाते हैं। एक चीनी वेबसाइट के अनुसार ये बाजार यहां लगभग 2005 से लग रहा है। हर वीकएंड में शनिवार के दिन इस बाजार का आयोजन होता है। कड़कड़ाती ठंड हो, बारिश हो या गर्मी किसी भी स्थिति में ये बाजार ना लगा हो एेसा कम ही मौकों पर देखा गया है। चीन के शंघार्इ में पीपुल्स स्क्वायर के पीपुल्स पार्क में कर्इ सालों से एक अनोखा शादी बाजार लगता है। इस बाजार में शादी का सामान नहीं बल्कि रिश्ते उपलब्ध कराये जाते हैं। एक चीनी वेबसाइट के अनुसार ये बाजार यहां लगभग 2005 से लग रहा है। हर वीकएंड में शनिवार के दिन इस बाजार का आयोजन होता है। कड़कड़ाती ठंड हो, बारिश हो या गर्मी किसी भी स्थिति में ये बाजार ना लगा हो एेसा कम ही मौकों पर देखा गया है।   मार्निंग वाकर्स की बातचीत से हुर्इ शुरूआत   ये बताना तो मुश्किल है कि वास्तव में ये विचार किसका था आैर आैपचारिक रूप से इस बाजार की शुरूआत कैसे हुर्इ पर एक अनुमान के अनुसार ये लोगों की मार्निंग वाॅक के दौरान शुरू हुर्इ बातचीत से शुरू हुआ होगा। बताते हैं कि पहले पीपुल्स पार्क में लोग सुबह सवेरे घूमने आते थे आैर एक दूसरे से अपने परिवार में मौजूद शादी योग्य बच्चों के बारे में चर्चा करते थे। बाद में धीरे धीरे लोग इसे रिश्तों की बात करने की अनौपचारिक जगह के तौर पर इस्तेमाल करने लगे। अब ये एक रिश्ता बाजार के रूप में तब्दील हो चुका है।    सौराठ गांव, जहां लगता है दूल्‍हों का मेला यह भी पढ़ें कैसे करता है काम   इस बाजार में लोग सड़क किनारे कागज की शीट पर चीनी भाषाआें विशेष रूप से मैंडरीन में विवाह योग्य लड़के लड़कियों के बायोडेटा लेकर बैठे रहते हैं। इसमें लड़के या लड़की की उम्र, सालाना तन्ख्वाह, पढ़ाई-लिखाई का ब्योरा, जन्मदिन और ज़ोडिएक साइन वगैरह लिखा होता है। विवाह योग्य लोगों माता-पिता या दादा-दादी आदि आपस में इन बायोडाटा को बदल  लेते हैं या फिर बाजार में आने वाले दूसरे लोगों को देते लेते हैं। कुछ लोगों को मानना है कि इस बाजार में बढ़ती भीड़ की एक बड़ी वजह चीन में  सेक्स रेशियो का असंतुलन भी है जहां लड़कों की तादात लड़कियों से कहीं ज्यादा है।    आखिर आनंद महिंद्रा ने जख्मी जूतों के डाक्टर को गिफ्ट कर दिया नया क्लीनिक यह भी पढ़ें शादी का पारंपरिक तरीका नहीं  वैसे ये चीन में शादी करने का पारंपरिक तरीका नहीं है। इसके बावजूद यहां कई रूढ़िवादी परिवार के लोग आते हैं जिनके परिवार में 35, 40 या उससे ज़्यादा उम्र के अविवाहित बच्चे हैं आैर उनके पास यहां आने के अलावा और कोई चारा नहीं होता।  लोग मानते हैं कि शादी के लिए ये अच्छा प्लेटफ़ॉर्म है जहां लोग आपस में मिल सकते हैं, एेसे में अगर बात बन जाती है तो क्या बुरा है। वर्चुअल ब्वायफ़्रेंड्स, ऑनलाइन मैरिज वेबसाइट्स, मैचमेकिंग पार्टीज़ से हट कर शादी के इस अनोखे बाज़ार में रिश्ते जोड़ने की कोशिश हो रही है, पर फिल्हाल इसे सफ़लता कम ही मिल पा रही है।

मार्निंग वाकर्स की बातचीत से हुर्इ शुरूआत 

ये बताना तो मुश्किल है कि वास्तव में ये विचार किसका था आैर आैपचारिक रूप से इस बाजार की शुरूआत कैसे हुर्इ पर एक अनुमान के अनुसार ये लोगों की मार्निंग वाॅक के दौरान शुरू हुर्इ बातचीत से शुरू हुआ होगा। बताते हैं कि पहले पीपुल्स पार्क में लोग सुबह सवेरे घूमने आते थे आैर एक दूसरे से अपने परिवार में मौजूद शादी योग्य बच्चों के बारे में चर्चा करते थे। बाद में धीरे धीरे लोग इसे रिश्तों की बात करने की अनौपचारिक जगह के तौर पर इस्तेमाल करने लगे। अब ये एक रिश्ता बाजार के रूप में तब्दील हो चुका है। 

कैसे करता है काम 

इस बाजार में लोग सड़क किनारे कागज की शीट पर चीनी भाषाआें विशेष रूप से मैंडरीन में विवाह योग्य लड़के लड़कियों के बायोडेटा लेकर बैठे रहते हैं। इसमें लड़के या लड़की की उम्र, सालाना तन्ख्वाह, पढ़ाई-लिखाई का ब्योरा, जन्मदिन और ज़ोडिएक साइन वगैरह लिखा होता है। विवाह योग्य लोगों माता-पिता या दादा-दादी आदि आपस में इन बायोडाटा को बदल  लेते हैं या फिर बाजार में आने वाले दूसरे लोगों को देते लेते हैं। कुछ लोगों को मानना है कि इस बाजार में बढ़ती भीड़ की एक बड़ी वजह चीन में  सेक्स रेशियो का असंतुलन भी है जहां लड़कों की तादात लड़कियों से कहीं ज्यादा है। 

शादी का पारंपरिक तरीका नहीं

वैसे ये चीन में शादी करने का पारंपरिक तरीका नहीं है। इसके बावजूद यहां कई रूढ़िवादी परिवार के लोग आते हैं जिनके परिवार में 35, 40 या उससे ज़्यादा उम्र के अविवाहित बच्चे हैं आैर उनके पास यहां आने के अलावा और कोई चारा नहीं होता।  लोग मानते हैं कि शादी के लिए ये अच्छा प्लेटफ़ॉर्म है जहां लोग आपस में मिल सकते हैं, एेसे में अगर बात बन जाती है तो क्या बुरा है। वर्चुअल ब्वायफ़्रेंड्स, ऑनलाइन मैरिज वेबसाइट्स, मैचमेकिंग पार्टीज़ से हट कर शादी के इस अनोखे बाज़ार में रिश्ते जोड़ने की कोशिश हो रही है, पर फिल्हाल इसे सफ़लता कम ही मिल पा रही है।

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