आयकर विभाग ने बिटक्वाइन में निवेश करने वालों को भेजा एक लाख नोटिस, होगी सख्त कार्रवाई

आयकर विभाग ने बिटक्वाइन जैसी क्रिप्टो करेंसी में निवेश करने वालों को करीब एक लाख नोटिस भेजा है. यह नोटिस उन्हें भेजा गया है जिन्होंने अपने इनकम टैक्स रिटर्न में इसका खुलासा नहीं किया है. ऐेसे सभी निवेशकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन सुशील चंद्रा ने उद्योग चैंबर एसोचैम के एक कार्यक्रम में यह जानकारी दी.आयकर विभाग ने बिटक्वाइन में निवेश करने वालों को भेजा एक लाख नोटिस, होगी सख्त कार्रवाई

सुशील चंद्रा ने कहा, ‘जिन लोगों ने क्रिप्टो करेंसी में निवेश किया है और इनकम टैक्स रिटर्न में इसका उल्लेख नहीं किया है और इससे कमाई पर टैक्स नहीं दी है, हमें उन्हें नोटिस भेज रहे हैं. बिट्क्वाइन निवेशकों को करीब एक लाख इनकम टैक्स नोटिस भेजा गया है.’

उन्होंने बताया कि आयकर विभाग ने क्रिप्टो करेंसी एक्सचेंज के बारे में कई सर्वे किए हैं, कि कितने लोग इसमें नियमित निवेश कर रहे हैं, कितनों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है और कितने लोग इसकी ट्रेडिंग कर रहे हैं . उन्होंने कहा, ‘बिटक्वाइन में निवेश करने वालों से उनकी आय का स्रोत पूछा जाएगा. वे अगर टैक्स नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.’

उन्होंने कहा, ‘हमने यह पाया है कि कई लोगों ने अपने इस निवेश के बारे में साफ जानकारी नहीं दी है, इसका मतलब यह है कि उन्होंने इसकी घोषणा नहीं की है.

गौरतलब है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट 2018 में कहा है कि बिटक्वाइन में निवेश अवैध है और सरकार इस पर अंकुश के लिए पूरी कोशिश करेगी. वित्त मंत्री ने कहा था, ‘सरकार क्रिप्टो करेंसी को लीगल टेंडर नहीं मानती और इनके इस्तेमाल को खत्म करने के लिए सभी उपाय किए जाएंगे.’ 

सरकार पेमेंट सिस्टम में भी क्रिप्टो करेंसीज को अवैध बनाने और इनके ट्रेडिंग करने वाले एक्सचेंज पर निगरानी के लिए रेगुलेटर बनाने की तैयारी कर रही है. सरकार ने क्रिप्टो करेंसी से जुड़े मसलों को देखने के लिए एक समिति बनाई है जो 31 मार्च तक अपनी रिपोर्ट देगी.

10 हजार करोड़ का कारोबार!

एक अनुमान के अनुसार भारत में बिटक्वाइन का कारोबार 5,000 से 10,000 करोड़ रुपये तक का है और बिटक्वाइन एक्सचेंजों में हर महीने औसतन दो लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है. गौरतलब है कि बिटक्वाइन की कीमत दिसंबर 2017 तक 19,000 डॉलर की ऊंचाई तक पहुंच गई थी, लेकिन कई देशों में नियामक सख्ती की वजह से अब इसकी कीमत महज 7,000 डॉलर रह गई है.

You May Also Like

English News