इटली सरकार ने जेरोसा के प्रत्यर्पण से इन्कार किया

अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे में बिचौलिये की भूमिका वाले कार्लो जेरोसा को इटली सरकार ने भारत को प्रत्यर्पित करने से इन्कार कर दिया है। जेरोसा पर सौदे में कमीशनखोरी का आरोप है। इटली सरकार ने कहा है कि उसका भारत के साथ कानूनी प्रक्रिया में सहायता करने का कोई समझौता नहीं है। इटली के इस रुख से भारत में मामले की जांच कर रही सीबीआइ को बड़ा झटका लगा है।

इटली के जेरोसा का प्रत्यर्पण न करने के फैसले के बाद सीबीआइ ने विदेश मंत्रालय से संपर्क किया है कि अब वह आरोपी को किस तरह से भारत ला सकती है। दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण का औपचारिक समझौता न होने की वजह से अब जेरोसा को कूटनीतिक प्रयास से ही भारत लाया जा सकता है। 

इटली और स्विट्जरलैंड की दोहरी नागरिकता वाले जेरोसा को हेलीकॉप्टर सौदे का मुख्य सूत्रधार माना जाता है। माना जाता है कि जेरोसा की पूर्व वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी के रिश्ते के भाइयों के साथ हुई बैठक के बाद रिश्वतखोरी का सिलसिला आगे बढ़ा। 

इंटरपोल ने जेरोसा के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर रखा है। उसके आधार पर इटली से उसे हिरासत में लिया गया लेकिन दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण समझौता न होने का वह लाभ पा गया। 12 अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर भारत में अति महत्वपूर्ण लोगों के आवागमन के लिए 3,600 करोड़ रुपये में खरीदे जाने थे। रिश्वतखोरी की बात सामने आने पर भारत ने यह सौदा रद कर दिया था।

मामले की जांच कर रहे सीबीआइ और प्रवर्तन निदेशालय ने सौदे में रिश्वतखोरी के लिए जिन तीन लोगों को आरोपी बनाया है उनमें जेरोसा शामिल है। दो अन्य आरोपी क्रिश्चियन मिशेल और गुइडो हैश्के हैं।

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