इलाहाबाद: नैनी जेल में बनती थी इंदिरा के खिलाफ रणनीति

25 जून 1975 यह तिथि इतिहास के पन्नों में प्रमुखता से दर्ज है। यह वो तिथि थी जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने स्वयं के खिलाफ उठ रही आवाज को दबाने के लिए देश में आपातकाल लागू किया था। देशभर में लाखों लोगों की गिरफ्तारियां हुई। सरकार के खिलाफ जिसने भी मुंह खोला, उसे सलाखों के अंदर डाल दिया गया। आपातकाल में नैनी सेंट्रल इंदिरा सरकार के खिलाफ रणनीति तैयार करने का प्रमुख केंद्र बना। जेल में स्व. जनेश्वर मिश्र, डॉ. मुरली मनोहर जोशी के संयोजन में प्रतिदिन गोष्ठी होती, उसमें इमरजेंसी की स्थिति पर चर्चा कर प्रस्ताव पास करके उसे बाहर से मिलने आने वालों के जरिए जनता तक पहुंचाया जाता था।

आपातकाल लगने के बाद इलाहाबाद में 26 जून की सुबह समाजवादी नेता स्व. जनेश्वर मिश्र, तत्कालीन जनसंघ के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी, समाजवादी नेता बाबा रामआधार यादव, भारतीय लोकदल नेता पूर्व मुख्यमंत्री रामनरेश यादव, नरेंद्रदेव पांडेय, कैलाश प्रकाश, हृदयनारायण शुक्ल, डॉ. कृष्ण बहादुर सहित सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार करके मीसा में नैनी जेल भेजा गया। जुलाई माह में यहां वर्तमान गृहमंत्री राजनाथ सिंह को मिर्जापुर जेल से लाया गया। जबकि यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री व राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह अक्टूबर माह में अलीगढ़ जेल से नैनी जेल आए। सबको जेल में बने सर्किल नंबर पांच के स्कूल में रखा गया था।

छा गया था अंधकार : नरेंद्रदेव

मीसा बंदी रहे वरिष्ठ भाजपा नेता नरेंद्रदेव पांडेय बताते हैं कि विपक्षियों की गिरफ्तारी और अखबारों पर सेंसर लगने से हर ओर अंधकार छा गया। मैं सुबह 10.30 बजे कचहरी गया और वहीं पर गिरफ्तारी हो गई। इमरजेंसी लगे एक साल हो गया तो ऐसा लगा कि पूरी जिंदगी जेल में बीतेगी। जेल में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. रघुवंश से मुलाकात हुई, उनके दोनों हाथ में लकवा ग्रस्त था वह पांव से लिखते थे वह खंभे में चढ़कर तार काटने के आरोप में बंद थे।

अंग्रेजी हुकूमत की याद आयी : हरिनारायण

समाजवादी नेता हरिनारायण मिश्र बताते हैं मैं इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एमए का छात्र था, साथ ही राजनारायण के नेतृत्व वाली संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के युवामोर्चा का अध्यक्ष भी। इमरजेंसी लगने पर कुछ समय के लिए बाहर चला गया, परंतु लेकिन वापस आने पर गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया। जेल में हमें अंग्रेजों की गुलामी की याद आ गई।

जेल में दी परीक्षा : लक्ष्मीशंकर

वरिष्ठ भाजपा नेता लक्ष्मीशंकर ओझा भी आपातकाल के दौरान जेल में बंद हुए थे। पुलिस ने उन्हें रामपुर सेमरहा करछना से गिरफ्तार किया गया। लक्ष्मीशंकर उस समय इलाहाबाद डिग्री कालेज के छात्रसंघ के अध्यक्ष के रूप में जेपी आंदोलन में सक्रिय थे। उन्होने जेल में रहकर बीए द्वितीय वर्ष की परीक्षा दी थी। वह 18 मार्च 1977 तक बंद रहे।

रात में सुनते थे बीबीसी : कृपाशंकर

मीसा बंदी रहे वरिष्ठ कर्मचारी नेता कृपाशंकर श्रीवास्तव बताते हैं कि जेल में हमें बाहर की कोई सूचना नहीं मिलती थी। तब हमारे एक साथी के पास ट्रांजिस्टर था, उसमें रात आठ बजे बीबीसी का समाचार सब लोग साथ मिलकर सुनते थे, उससे सही जानकारी मिलती थी। हम उसकी जानकारी के अनुरूप जेल से सरकार के खिलाफ रणनीति बनाते थे।

वेष बदल कर रहा : विनोद

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता विनोद चंद्र दुबे बताते हैं कि इमरजेंसी में मैं गिरफ्तार नहीं हुआ। परंतु घर में रह भी नहीं पाया। गिरफ्तारी से बचने के लिए मुस्लिमों की भांति दाढ़ी बढ़ाकर सिर पर टोपी रखकर वेष बदल लिया। बिहार के बेगूसरांय में जार्ज फर्नाडीज से मुलाकात हुई। वहां सरकार के खिलाफ पर्चा बांटने का निर्णय हुआ। मैं यूपी आकर सिनेमा हाल, बस अड्डा व रेलवे स्टेशनों पर सरकार के खिलाफ पर्चा बटवाता था।

बंदियों को मिले सुविधा : केके श्रीवास्तव

वरिष्ठ समाजवादी नेता केके श्रीवास्तव आपातकाल में बंद लोगों को उचित सुविधा देने की मांग की। कहा कि प्रदेश सरकार ने आपातकाल में बंद लोगों की पेंशन में बढ़ोत्तरी किया था। मौजूदा सरकार पेंशन की धनराशि में और बढ़ोत्तरी करे। मीसा बंदियों को यातायात, चिकित्सा व आवास की सुविधा भी मुहैया कराई जानी चाहिए।

अंधकारमय था जीवन : राजेश

वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश गुप्त भी आपातकाल में जेल में बंद हुए थे। वह उस समय कुलभाष्कर आश्रम इंटर कालेज में छात्रसंघ उपाध्यक्ष थे। जुलाई माह में संजय गांधी शहर आए तो उन्हें काला झंडा दिखाने के लिए सड़क पर आ गए। इस पर राजेश को नैनी जेल में बंद कर दिया गया। बताते हैं कि जेल में जीवन अंधकारमय लग रहा था। वहां न खाने का उचित प्रबंध था, न रहने का।

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