ये मौलवी हलाला से लेता है कमसीन महिलाओं से सेक्स का मजा! देखे विडियो

इस्लामी पारिभाषिक शब्दों में “हलाल , और “हलाला ” यह ऐसे दो शब्द हैं , जिनका कुरान और हदीसों में कई जगह प्रयोग किया गया है| दिखने में यह दोनों शब्द एक जैसे लगते हैं यह बात तो सभी जानते हैं कि, जब मुसलमान किसी जानवर के गले पर अल्लाह के नाम पर छुरी चलाकर मार डालते हैं , तो इसे हलाल करना कहते हैं .हलाल का अर्थ “अवर्जित ” होता है . लेकिन हलाला के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं .क्योंकि इस शब्द का सम्बन्ध मुसलमानों वैवाहिक जीवन और कुरान के महिला विरोधी कानून से है .क्योंकि कुरान में अल्लाह के बनाये हुए इस जंगली ,और मूर्खता पूर्ण कानून की आड़ में मुल्ले , मौलवी और मुफ्ती खुल कर अय्याशी करते हैं|

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इस बात को ठीक से समझने के लिए अल्लाह की औरतों के प्रति घोर नफ़रत , और मुसलमानों की पारिवारिक स्थितियों के बारे में जानना बहुत जरूरी है,मुसलमानों में दो दो , तीन तीन औरतें रखना साधारण सी बात है . और फिर मुसलमान रिश्ते की बहिनों से भी शादियाँ कर लेते हैं .और अक्सर संयुक्त परिवार में रहना पसंद करते हैं .इसलिए पति पत्नी में झगड़े होते रहते हैं. और कभी पति गुस्से में पत्नी को तलाक भी दे देता है . चूंकि अल्लाह की नजर में औरतें पैदायशी अपराधी होती है , इसलए कुरान में पति की जगह पत्नी को ही सजा देने का नियम है .यद्यपि तलाक देने के कई कारण और तरीके हो सकते हैं , लेकिन सजा सिर्फ औरत को ही मिलती है . इसे विस्तार से प्रमाण सहित बताया गया है .जो कुरान और हदीसों पर आधारित है .

1. तलाक कैसे हो जाती है

यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी के सामने तीन बार “तलाक ” शब्द का उच्चारण कर दे , या कहे की मैंने तुझे तीनों तलाक दे दिए , तो तलाक हो जाती है ..क्योंकि इस कथन को उस व्यक्ति की कसम माना जाता है .जैसा की कुरान ने कहा है ,
” और अगर तुम पक्की कसम खाओगे तो उस पर अल्लाह जरुर पकड़ेगा “सूरा – मायदा 5 :89| तलाक के बारे में कुरान की इसी आयत के आधार पर हदीसों में इस प्रकार लिखा है ,
-“इमाम अल बगवी ने कहा है , यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी से कहे की मैंने तुझे दो तलाक दिए और तीसरा देना चाहता हूँ , तब भी तलाक वैध मानी जाएगी .और सभी विद्वानों ने इसे जायज बताया है.(Rawdha al-talibeen 7/73”
“فرع قال البغوي ولو قال أنت بائن باثنتين أو ثلاث ونوى الطلاق وقع ثم إن نوى طلقتين أو ثلاثا فذاك
-“इमाम इब्न कदमा ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी से कहे कि मैंने तुझे तीनों तलाक दे दिए हैं . लेकिन चाहे उसने यह बात एक ही बार कही हो , फिर भी तलाक हो जायेगा .Al-Kafi 3/122

إذا قال لزوجته : أنت طالق ثلاثا فهي ثلاث وإن نوى واحدة“

2. अल्लाह की तरकीब

ऐसा कई बार होता है कि व्यक्ति अपनी पत्नी को तलाक देकर बाद में पछताता है , क्योंकि औरतें गुलामों की तरह काम करती हैं , और बच्चे भी पालती हैं . कुछ पढ़ी लिखी औरतें पैसा कमा कर घर भी चलाती है . इस इसलिए लोग फिर से अपनी औरत चाहते है .

” हे नबी तू नहीं जनता कि कदाचित तलाक के बाद अल्लाह कोई नयी तरकीब सुझा दे ” सूरा -अत तलाक 65 :1

और इस आयत के बाद काफी सोच विचार कर के अल्लाह ने जो उपाय निकाला है ,वह औरतों के लिए शर्मनाक है

3. हलाला

तलाक़ दी हुई अपनी बीवी को दोबारा अपनाने का एक तरीका है जिस के तहेत मत्लूका(तलाक दी गयी पत्नी ) को किसी दूसरे मर्द के साथ निकाह करना होगा और उसके साथ हम बिस्तरी की शर्त लागू होगी फिर वह तलाक़ देगा, बाद इद्दत ख़त्म औरत का तिबारा निकाह अपने पहले शौहर के साथ होगा, तब जा कर दोनों तमाम जिंदगी गुज़ारेंगे.हलाला के बारे में कुरान और हदीसों में इस प्रकार लिखा है , और यदि किसी ने पत्नी को तलाक दे दिया , तो उस स्त्री को रखना जायज नहीं होगा . जब तक वह स्त्री किसी दूसरे व्यक्ति से सहवास न कर ले .फिर वह व्यक्ति भी उसे तलाक दे दे . तो फिर उन दौनों के लिए एक दूसरे की तरफ पलट आने में कोई दोष नहीं होगा “सूरा – बकरा 2 :230
“فَإِن طَلَّقَهَا فَلَا تَحِلُّ لَهُ مِن بَعْدُ حَتَّىٰ تَنكِحَ زَوْجًا غَيْرَهُ ۗ فَإِن طَلَّقَهَا فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِمَا أَن يَتَرَاجَعَا إِن ظَنَّا أَن يُقِيمَا حُدُودَ اللَّهِ ۗ وَتِلْكَ حُدُودُ اللَّهِ يُبَيِّنُهَا لِقَوْمٍ يَعْلَمُونَ 2:230
(नोट -इस आयत में अरबी में ” تحلّل لهُ ‘तुहल्लिल लहु”शब्द आया है , मुस्लिम इसका अर्थ “wedding ” करते हैं , जबकि sexual intercourse सही अर्थ होता है .
इसी से ” हलालाह حلالہ ” शब्द बना है . अंगरेजी के एक अनुवाद में है “uptill she consummated intercourse with another person “यानी जबतक किसी दूसरे व्यक्ति से सम्भोग नहीं करवा लेती .)और तलाक शुदा औरत का हलाला करवाकर घर वापसी को ” रजअ رجع” कहा जाता है .

हलाला इस तरह होता है, पहले तलाकशुदा महिला इद्दत का समय पूरा करे। फिर उसका कहीं और निकाह हो। शौहर के साथ उसके वैवाहिक रिश्ते बनें। इसके बाद शौहर अपनी मर्जी से तलाक दे या उसका इंतकाल हो जाए। फिर बीवी इद्दत का समय पूरा करे। तब जाकर वह पहले शौहर से फिर से निकाह कर सकती है।
बड़े बड़े इस्लाम के विद्वान् तलाक शुदा पत्नी को वापिस रखने के लिए हलाला को सही मानते हैं ,

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