इस मंदिर के खास रहस्य को आजतक नहीं जान पाया कोई

देश के हिन्दू मंदिरों में कई ऐसी रहस्यमयी जगह हैं जहां के बारे में कोई पता नहीं कर पाया. जी हाँ, कई मंदिर ऐसे हैं जिन्हें ये माना जाता है कि वो साक्षात भगवान का आशीर्वाद है जिसके चलते उन खास मंदिरों का रहस्य बना हुआ है और चाह कर भी उसके बारे में कोई नहीं जान पाया . आज ऐसे ही एक मंदिर के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं जिसके बारे में सोचा भी नहीं होगा.देश के हिन्दू मंदिरों में कई ऐसी रहस्यमयी जगह हैं जहां के बारे में कोई पता नहीं कर पाया. जी हाँ, कई मंदिर ऐसे हैं जिन्हें ये माना जाता है कि वो साक्षात भगवान का आशीर्वाद है जिसके चलते उन खास मंदिरों का रहस्य बना हुआ है और चाह कर भी उसके बारे में कोई नहीं जान पाया . आज ऐसे ही एक मंदिर के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं जिसके बारे में सोचा भी नहीं होगा.  VIDEO : जानिए उन अजूबों के बारे में जिनके आगे वैज्ञानिक भी हुए नतमस्तक  दरअसल, ये मंदिर आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में लेपाक्षी नाम का मंदिर है जिसकी कहानी बेहद ही अद्भुत है. सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में इसके रहस्य के चर्चे हैं. कहा जाता है इस मंदिर में 70 से ज्यादा पिलर्स हैं. इन पिलर्स में खास बात ये है कि ये किसी सहारे के नहीं खड़े हैं बल्कि हवा में झूल रहे हैं. जी हाँ, हैरानी की बात तो यही है कि ये पिलर्स हवा में कैसे झूल रहे हैं. यही पिलर्स हैं जो कई सालों से मंदिर को प्रसिद्द बनाये हुए हैं. इसकी मान्यता ये भी है कि पिलर्स के नीचे से कपडा निकालने से सुख और समृद्धि आती है. इसलिए जो भी यहां आता है वो इस प्रथा को मानता है.  नियमित टैक्स भरने का महिला को मिला ये इनाम  बता दें, इस बात की पुष्टि आज तक नहीं हो पाई है कि ऐसा संभव कैसे है. कई अंग्रेजों ने भी इसका रहस्य जानने की कोशिश की लेकिन उन्हें भी कुछ हाथ नहीं लगा. बता दें, साल 1583 में विजयनगर के राजा के लिए वहां काम करने वाले दो भाईयों ने बनाया था, वहीं पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इसे ऋषि अगस्त ने बनाया था. इसे कई बार तोड़ने की कोशिश भी की है लेकिन इसे हटाने में कोई भी कामयाब नहीं रहा.

दरअसल, ये मंदिर आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में लेपाक्षी नाम का मंदिर है जिसकी कहानी बेहद ही अद्भुत है. सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में इसके रहस्य के चर्चे हैं. कहा जाता है इस मंदिर में 70 से ज्यादा पिलर्स हैं. इन पिलर्स में खास बात ये है कि ये किसी सहारे के नहीं खड़े हैं बल्कि हवा में झूल रहे हैं. जी हाँ, हैरानी की बात तो यही है कि ये पिलर्स हवा में कैसे झूल रहे हैं. यही पिलर्स हैं जो कई सालों से मंदिर को प्रसिद्द बनाये हुए हैं. इसकी मान्यता ये भी है कि पिलर्स के नीचे से कपडा निकालने से सुख और समृद्धि आती है. इसलिए जो भी यहां आता है वो इस प्रथा को मानता है.

ता दें, इस बात की पुष्टि आज तक नहीं हो पाई है कि ऐसा संभव कैसे है. कई अंग्रेजों ने भी इसका रहस्य जानने की कोशिश की लेकिन उन्हें भी कुछ हाथ नहीं लगा. बता दें, साल 1583 में विजयनगर के राजा के लिए वहां काम करने वाले दो भाईयों ने बनाया था, वहीं पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इसे ऋषि अगस्त ने बनाया था. इसे कई बार तोड़ने की कोशिश भी की है लेकिन इसे हटाने में कोई भी कामयाब नहीं रहा.

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