इस मंदिर में पति-पत्नी भूलकर भी न करें एक साथ पूजा, वरना…

अक्सर आपने सुना होगा कि मंदिर में अगर पति-पत्नी एक साथ पूजा करें तो उनका जीवन हमेशा खुशियों से भरा रहता है और वे अगले सात जन्मों तक एक दूसरे के साथ रहते हैं. यही नहीं बल्कि ऐसा माना गया है कि पति-पत्नी के एक साथ पूजा करने पर घर में किसी प्रकार की समस्या नहीं आती और उन दोनों के बीच के रिश्ते भी कभी नहीं बिगड़ते हैं. लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे मंदिर के बारे में जंहा पति पत्नी एक साथ पूजा नहीं कर सकते. अगर वे पूजा करते है तो उन्हें इसकी सजा भुगतनी पड़ती है.अक्सर आपने सुना होगा कि मंदिर में अगर पति-पत्नी एक साथ पूजा करें तो उनका जीवन हमेशा खुशियों से भरा रहता है और वे अगले सात जन्मों तक एक दूसरे के साथ रहते हैं. यही नहीं बल्कि ऐसा माना गया है कि पति-पत्नी के एक साथ पूजा करने पर घर में किसी प्रकार की समस्या नहीं आती और उन दोनों के बीच के रिश्ते भी कभी नहीं बिगड़ते हैं. लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे मंदिर के बारे में जंहा पति पत्नी एक साथ पूजा नहीं कर सकते. अगर वे पूजा करते है तो उन्हें इसकी सजा भुगतनी पड़ती है.    जी हाँ आप ये सुनकर हैरान जरूर हुए होंगे लेकिन देवभूमि हिमाचल प्रदेश के शिमला में मां दुर्गा का एक ऐसा मंदिर हैं जिसमें पति-पत्नी एक साथ पूजा नहीं कर सकते. यह मंदिर श्राई कोटि माता के नाम से पूरे हिमाचल में प्रसिद्ध है. इस मंदिर के बारे में कहा गया है कि अगर यह पति पत्नी साथ जाते है तो उन्हें एक बार में किसी एक ही व्यक्ति को दर्शन करना होता है.    यह मंदिर शिमला के रामपुर में समुद्र तल से 11000 फुट की ऊंचाई पर है जिसमें मां दुर्गा का एक स्वरूप विराजमान है जिन्हे श्राई कोटि माता के नाम जाना जाता है. दरअसल इस मंदिर का एक गहरा रहस्य है. एक कहानी के अनुसार बताया जाता है कि जब भगवान शिव ने अपने दोनों पुत्रों गणेश और कार्तिकेय को ब्रह्मांड का चक्कर लगाने को कहा था तब कार्तिकेय अपने वाहन पर बैठकर ब्रह्मांड का चक्कर लगाने निकल गए लेकिन गणेश जी ने अपने माता पिता के ही चक्कर लगा दिए और कह दिया कि माता पिता के चरणों में ही पूरा ब्रह्मांड है.    जब कार्तिकेय ब्रह्मांड का चक्कर लगाकर आए तब गणेश जी ने अपना विवाह रचा लिया था. जब वह आये तो इस बात से बेहद ही नाराज हुए और उन्होंने कभी शादी नहीं करने का संकल्प ले लिए और इस फैसले से माता पार्वती बहुत रुष्ट हुई थीं. इस दौरान माता पार्वती ने कहा था कि यंहा जो भी पति-पत्नी उनके दर्शन करेंगे वह एक दूसरे से अलग हो जाएंगे. बस उसी के बाद से यह परम्परा चली आ रही है और आज भी इस मंदिर में पति पत्नी एक साथ पूजा नहीं करते हैं.

जी हाँ आप ये सुनकर हैरान जरूर हुए होंगे लेकिन देवभूमि हिमाचल प्रदेश के शिमला में मां दुर्गा का एक ऐसा मंदिर हैं जिसमें पति-पत्नी एक साथ पूजा नहीं कर सकते. यह मंदिर श्राई कोटि माता के नाम से पूरे हिमाचल में प्रसिद्ध है. इस मंदिर के बारे में कहा गया है कि अगर यह पति पत्नी साथ जाते है तो उन्हें एक बार में किसी एक ही व्यक्ति को दर्शन करना होता है.

यह मंदिर शिमला के रामपुर में समुद्र तल से 11000 फुट की ऊंचाई पर है जिसमें मां दुर्गा का एक स्वरूप विराजमान है जिन्हे श्राई कोटि माता के नाम जाना जाता है. दरअसल इस मंदिर का एक गहरा रहस्य है. एक कहानी के अनुसार बताया जाता है कि जब भगवान शिव ने अपने दोनों पुत्रों गणेश और कार्तिकेय को ब्रह्मांड का चक्कर लगाने को कहा था तब कार्तिकेय अपने वाहन पर बैठकर ब्रह्मांड का चक्कर लगाने निकल गए लेकिन गणेश जी ने अपने माता पिता के ही चक्कर लगा दिए और कह दिया कि माता पिता के चरणों में ही पूरा ब्रह्मांड है.

जब कार्तिकेय ब्रह्मांड का चक्कर लगाकर आए तब गणेश जी ने अपना विवाह रचा लिया था. जब वह आये तो इस बात से बेहद ही नाराज हुए और उन्होंने कभी शादी नहीं करने का संकल्प ले लिए और इस फैसले से माता पार्वती बहुत रुष्ट हुई थीं. इस दौरान माता पार्वती ने कहा था कि यंहा जो भी पति-पत्नी उनके दर्शन करेंगे वह एक दूसरे से अलग हो जाएंगे. बस उसी के बाद से यह परम्परा चली आ रही है और आज भी इस मंदिर में पति पत्नी एक साथ पूजा नहीं करते हैं.

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