ई-कॉमर्स नीति पर होगी दोबारा चर्चा: सुरेश प्रभु

ई-कॉमर्स क्षेत्र की कंपनियों के लिए हाल में जारी नई नीति के मसौदे में शामिल कुछ प्रस्तावों पर चिंता जताई गई है। इसके बाद सरकार ने नीति के मसौदे पर सभी पक्षों के साथ दूसरे दौर के परामर्श का फैसला किया है। वाणिज्य व उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा है कि उन्होंने अधिकारियों से मसौदे पर विभिन्न पक्षों से दोबारा विचार विमर्श करने का निर्देश दिया है।ई-कॉमर्स क्षेत्र की कंपनियों के लिए हाल में जारी नई नीति के मसौदे में शामिल कुछ प्रस्तावों पर चिंता जताई गई है। इसके बाद सरकार ने नीति के मसौदे पर सभी पक्षों के साथ दूसरे दौर के परामर्श का फैसला किया है। वाणिज्य व उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा है कि उन्होंने अधिकारियों से मसौदे पर विभिन्न पक्षों से दोबारा विचार विमर्श करने का निर्देश दिया है।   मंत्रालय ने ट्वीट के जरिये इसके बारे में जानकारी दी है। मंत्रालय ने कहा कि उसे ई-कॉमर्स पॉलिसी के मसौदे के संबंध में कुछ आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। इसके बाद मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए दोबारा चर्चा करें। मसौदा दोबारा तैयार होने के बाद मंत्री खुद इसकी समीक्षा करेंगे।  ई-कॉमर्स पॉलिसी के शुरुआती मसौदे में तेजी से बढ़ते इस सेक्टर के विकास को प्रोत्साहन देने के लिए कई उपाय सुझाए गए है। मसौदे के अनुसार सुरक्षा और निजता के लिहाज से ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने यूजर्स का डाटा देश में ही सुरक्षित रखना होगा। मसौदे में एक अन्य प्रस्ताव है कि ऑनलाइन रिटेल कंपनी या पोर्टल की किसी भी ग्रुप कंपनी को वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करने की अनुमति नहीं होगी। माना जा रहा है कि इस प्रावधान से ई-कॉमर्स कंपनियां भारी डिस्काउंट पर वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री नहीं कर पाएंगी।   ई-कॉमर्स नीति: ऑनलाइन शॉपिंग में भारी डिस्काउंट पर लगाम लगाने की तैयारी यह भी पढ़ें मसौदे की सिफारिशों के अनुसार इन्वेंट्री आधारित बिजनेस-टू-बिजनेस ई-कॉमर्स मॉडल में 49 फीसद विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआइ) की अनुमति होगी। इसमें कोई ई-कॉमर्स कंपनी दूसरे कारोबारियों को माल बेचती है। अभी इस तरह की कंपनियों में एफडीआइ पर पाबंदी है। अभी सिर्फ मार्केटप्लेस मॉडल में एफडीआइ की अनुमति है। इसमें कंपनियां उपभोक्ताओं को वस्तुएं और सेवाएं बेचती हैं। घरेलू नीतियां बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वार्ताओं के उद्देश्य से मसौदे में ई-कॉमर्स के लिए सर्वमान्य परिभाषा अपनाने की भी बात कही गई है। अभी इस तरह की कोई परिभाषा नहीं है।  मसौदे के अनुसार सरकारी पेमेंट गेटवे रुपे का इस्तेमाल बढ़ाने के उपाय होंगे। रुपे कार्ड के व्यापक इस्तेमाल के लिए इसके लिए जरूरी बुनियादी ढांचा बनाने, ब्रांडिंग आदि पर खास ध्यान दिया जाएगा। कुछ ऑनलाइन कंपनियों ने नीति के मसौदे का स्वागत भी किया है। ट्रैवल ई-कॉमर्स फर्म ट्रैवल हॉलीडेज ने सेक्टर के लिए रेगुलेटर बनाने के प्रस्ताव का स्वागत किया है। कंपनी के डायरेक्टर सौरभ शर्मा ने कहा कि इस कदम से ऑनलाइन ट्रैवल कारोबार संगठित होगा।   ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर खाद्य वस्तुएं नहीं बेच पाएंगे गैर लाइसेंसी विक्रेता यह भी पढ़ें रेगुलेटर होने से कारोबार की चेन में जुड़े सभी पक्षों खासकर उपभोक्ताओं को मदद मिलेगी। रेगुलेटर होने से अनुपालन संबंधी जटिलता कम होगी और कारोबार का विकास तेजी से हो सकेगा। उन्होंने कहा कि मसौदे के प्रावधानों से बड़ी कंपनियों की एकाधिकारवादी गतिविधियों पर अंकुश लगेगा और बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा।

मंत्रालय ने ट्वीट के जरिये इसके बारे में जानकारी दी है। मंत्रालय ने कहा कि उसे ई-कॉमर्स पॉलिसी के मसौदे के संबंध में कुछ आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। इसके बाद मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए दोबारा चर्चा करें। मसौदा दोबारा तैयार होने के बाद मंत्री खुद इसकी समीक्षा करेंगे।

ई-कॉमर्स पॉलिसी के शुरुआती मसौदे में तेजी से बढ़ते इस सेक्टर के विकास को प्रोत्साहन देने के लिए कई उपाय सुझाए गए है। मसौदे के अनुसार सुरक्षा और निजता के लिहाज से ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने यूजर्स का डाटा देश में ही सुरक्षित रखना होगा। मसौदे में एक अन्य प्रस्ताव है कि ऑनलाइन रिटेल कंपनी या पोर्टल की किसी भी ग्रुप कंपनी को वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करने की अनुमति नहीं होगी। माना जा रहा है कि इस प्रावधान से ई-कॉमर्स कंपनियां भारी डिस्काउंट पर वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री नहीं कर पाएंगी।

मसौदे की सिफारिशों के अनुसार इन्वेंट्री आधारित बिजनेस-टू-बिजनेस ई-कॉमर्स मॉडल में 49 फीसद विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआइ) की अनुमति होगी। इसमें कोई ई-कॉमर्स कंपनी दूसरे कारोबारियों को माल बेचती है। अभी इस तरह की कंपनियों में एफडीआइ पर पाबंदी है। अभी सिर्फ मार्केटप्लेस मॉडल में एफडीआइ की अनुमति है। इसमें कंपनियां उपभोक्ताओं को वस्तुएं और सेवाएं बेचती हैं। घरेलू नीतियां बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वार्ताओं के उद्देश्य से मसौदे में ई-कॉमर्स के लिए सर्वमान्य परिभाषा अपनाने की भी बात कही गई है। अभी इस तरह की कोई परिभाषा नहीं है।

मसौदे के अनुसार सरकारी पेमेंट गेटवे रुपे का इस्तेमाल बढ़ाने के उपाय होंगे। रुपे कार्ड के व्यापक इस्तेमाल के लिए इसके लिए जरूरी बुनियादी ढांचा बनाने, ब्रांडिंग आदि पर खास ध्यान दिया जाएगा। कुछ ऑनलाइन कंपनियों ने नीति के मसौदे का स्वागत भी किया है। ट्रैवल ई-कॉमर्स फर्म ट्रैवल हॉलीडेज ने सेक्टर के लिए रेगुलेटर बनाने के प्रस्ताव का स्वागत किया है। कंपनी के डायरेक्टर सौरभ शर्मा ने कहा कि इस कदम से ऑनलाइन ट्रैवल कारोबार संगठित होगा।

रेगुलेटर होने से कारोबार की चेन में जुड़े सभी पक्षों खासकर उपभोक्ताओं को मदद मिलेगी। रेगुलेटर होने से अनुपालन संबंधी जटिलता कम होगी और कारोबार का विकास तेजी से हो सकेगा। उन्होंने कहा कि मसौदे के प्रावधानों से बड़ी कंपनियों की एकाधिकारवादी गतिविधियों पर अंकुश लगेगा और बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा।

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