उम्रकैद नहीं इस सीरियल रेपिस्ट को हो सकती है फांसी, 700 बच्चियों का किया रेप

नई दिल्ली: सीरियल रेपिस्ट को फांसी हो सकती है। कानून के मुताबिक रेप मामले में दोषी को अगर दोबारा रेप में दोषी पाया जाता है तो उसे उम्रकैद से लेकर फांसी तक की सजा हो सकती है। निर्भया कांड के बाद कानून में यह बदलाव किया गया है।

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दिल्ली गैंगरेप की घटना के बाद लोगों के गुस्से को देखते हुए नया एंटी रेप लॉ बना। इसी नए कानून के तहत मुंबई शक्ति मिल गैंगरेप में मुजरिमों को दोबारा रेप के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई थी। 16 दिसंबर गैंगरेप के मामले में मुजरिमों को हत्या के लिए फांसी की सजा सुनाई गई थी, जबकि रेप के लिए तब के कानून के तहत उम्रकैद की सजा दी गई। नए कानून के बाद दोबारा रेप में दोषी मुजरिम के लिए फांसी तक की सजा का प्रावधान किया गया है।

कानूनी जानकार बताते हैं कि केंद्र सरकार ने रेप लॉ की समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस जे.एस. वर्मा की अगुवाई में वर्मा कमिशन का गठन किया। वर्मा कमिशन ने कानून में बदलाव के लिए तमाम सिफारिशें कीं। इसके बाद सरकार ने एंटी रेप लॉ के लिए 2013 में कानून में बदलाव किया।
 
निर्भया कांड के बाद 2013 में रेप लॉ में बदलाव के तहत रेप और गैंगरेप की नई परिभाषा तय की गई है। आईपीसी की धारा-375 के तहत रेप की परिभाषा में बताया गया है कि अगर किसी महिला के साथ कोई पुरुष जबरन शारीरिक संबंध बनाता है तो वह रेप होगा। महिला के साथ किया गया यौनाचार या दुराचार दोनों ही रेप के दायरे में होगा। इसके अलावा महिला के शरीर के किसी भी हिस्से में अगर पुरुष अपना प्राइवेट पार्ट डालता है तो वह भी रेप के दायरे में होगा। इतना ही नहीं महिला के प्राइवेट पार्ट में अगर पुरुष कोई भी ऑब्जेक्ट डालता है तो वह भी रेप के लिए दोषी होगा।

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साथ ही महिला के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाने के लिए उसके शरीर को उस तरह से मैनुपुलेट किया जाता है तो वह भी रेप के दायरे में होगा। महिला की इच्छा या सहमति के बिना किया गया ऐसी कोई भी हरकत रेप के दायरे में होगा। महिला की उम्र अगर 18 साल से कम है और उसकी सहमति भी है तो भी वह रेप होगा। 

 
नाबालिग लड़की की सहमति नहीं मानी जाएगी। रेप के लिए 376 के तहत कम से कम 7 साल और ज्यादा से ज्यादा उम्रकैद की सजा का प्रावधान किया गया। इसके अलावा 376 ए के तहत प्रावधान किया गया कि अगर रेप के कारण महिला विजिटेटिव स्टेज (मरने जैसी स्थिति) में चली जाए तो दोषी को अधिकतम फांसी की सजा हो सकती है।

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