एक्टिव मोड में आए ISI के स्लिपर सेल, भारत के युवाओं को बनाया अपना निशाना…

भारत को नुकसान पहुंचाने के आईएसआई के स्लिपर सेल नापाक साजिश रच रहे हैं। सीमा से लगे क्षेत्रों पर ये स्पिलर सेल एक्टिव हैं।एक्टिव मोड में आए ISI के स्लिपर सेल, भारत के युवाओं को बनाया अपना निशाना...कप‌िल म‌िश्रा के खिलाफ मानहान‌ि मामले में स्वास्थ मंत्री ने कराया अपना बयान दर्ज…

जीवन तबाह करने वाले स्मैक जैसे नशीले पदार्थों के कारोबारियों का नेटवर्क नेपाल से सटे कस्बों में तेजी से फैल रहा है। टनकपुर में भी इस काले कारोबार का नेटवर्क पांव पसार रहा है।

इस नशे की गिरफ्त में आ रहे युवाओं की बढ़ती संख्या न सिर्फ सामाजिक चिंता बढ़ा रही है, बल्कि नशे के कारण युवाओं के कदम अपराध की ओर भी बढ़ रहे हैं। नशे के लिए युवा चोरी जैसी घटनाओं को भी अंजाम दे रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय ड्रग माफिया के कारिंदे भी सक्रिय होने का अंदेशा

इसके अलावा क्षेत्र से सटी नेपाल सीमा अफीम एवं स्मैक तस्करी के लिए भी सुर्खियों में है। इससे सटे बनबसा, खटीमा के नेपाल से लगे क्षेत्र में बीते दिनों अफीम की खेप भी बरामद हुई।

इसमें अंतरराष्ट्रीय ड्रग माफिया के कारिंदे भी सक्रिय होने का अंदेशा है। तीन साल पहले पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई का गुर्गा आतंकी टुंडा इसी संवेदनशील क्षेत्र में पकड़ा गया था।

सूत्रों के अनुसार अब आतंकी फंडिंग के लिए नेपाल सीमा से होकर नशीले पदार्थों की तस्करी में उनके एजेंट भी सक्रिय हैं। इधर, तस्कर स्थानीय स्तर पर अपने स्लीपर सेल बनाने के लिए स्मैक जैसे नशे के कारोबार को बढ़ावा दे रहे हैं।

इसके लिए स्मैक की आड़ में नेपाल एवं सीमांत क्षेत्र में सक्रिय आईएसआई से किसी न किसी रूप में झुकाव रखने वाले गुर्गे अफीम समेत अन्य घातक हथियारों की खेप आतंकी वारदातों के लिए लाने की साजिश रच सकते हैं।

सीमा क्षेत्र में संदिग्ध लोगों की आवाजाही बढ़ी
अब तक इन राष्ट्र विरोधी तत्वों को स्थानीय एजेंट यानि गुर्गे मिल पाने में दिक्कत आ रही थी। अब स्मैक को हथियार के रूप में लेकर इसका नेटवर्क सीमांत जिलों में फैलाया जा रहा है।

नेपाल सीमा से सटे यूपी के पीलीभीत, बरेली आदि जिलों के स्लीपर सेल की मदद ली जा रही है। इन माफिया के नेटवर्क को समय रहते तोड़ा नहीं गया तो यह घातक साबित होगा।

यह भी देखने को मिल रहा है कि कुछ वर्षों से सीमा क्षेत्र में संदिग्ध लोगों की आवाजाही बढ़ी है। इसमें अक्सर तस्करी की आड़ में ऐसे तत्व अपनी पैठ बना रहे हैं। वहीं, सीमांत क्षेत्र में नशे के कारोबार के तेजी से फैलने से सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मचा है।

एनडीपीएस के मामलों में आईएसआई की संलिप्तता

इतना ही नहीं नेपाल से सटे पहाड़ी क्षेत्र के कस्बों में भी अब फैलता स्मैक कारोबारियों का नेटवर्क युवाओं को न सिर्फ राह से भटका रहा है, उनके कदम अपराध की ओर भी बढ़ा रहा है।

बनबसा में बीते दिनों 4.35 किग्रा (करीब बीस लाख कीमत की) अफीम के साथ नेपाली युवक को पकड़ा था, जबकि खटीमा में भी अफीम बरामद हुई। खटीमा में 15 हजार कीमत की स्मैक के साथ भी एक तस्कर दबोचा गया था। इसके अलावा अकेले नानकमत्ता क्षेत्र में ही स्मैक तस्करी के आधा दर्जन से अधिक मामले पकड़ में आ चुके हैं।  

अब तक पकड़े एनडीपीएस के मामलों में आईएसआई की संलिप्तता सामने नहीं आई है, लेकिन नेपाल मादक पदार्थों की तस्करी की रूट बनता जा रहा है। ज्यादातर मामलों में नेपाल के कैरियरों की संलिप्तता सामने आई है। नेपाल के पुलिस अधिकारियों के साथ इस पर चर्चा हुई है। अफीम का मुख्य उत्पादक क्षेत्र बरेली या फिर नेपाल है। यूपी एसटीएफ द्वारा एनडीपीएस का एक संदिग्ध मामला पकड़ा गया था, लेकिन इसमें भी आईएसआई की संलिप्तता सामने नहीं आई। बहरहाल इस धंधे के पीछे लिप्त गिरोह का पता लगाने को खुफिया एजेंसियों को लगाया गया है।

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