एमबीबीएस के बाद इलाज से पहले देनी होगी परीक्षा!

साढ़े चार साल तक एमबीबीएस की पढ़ाई और एक साल तक इंटर्नशिप के बाद भी इलाज करने का लाइसेंस मिलने में अब मुश्किल आ सकती है। वजह, केंद्र सरकार एमबीबीएस डिग्री पूरी करने के बाद नेशनल एग्जिट टेस्ट (नेक्स्ट) लेने की तैयारी कर रही है।

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एमबीबीएस के बाद इलाज से पहले देनी होगी परीक्षा!

थ्योरी और क्लीनिकल टेस्ट के लिए अलग-अलग परीक्षा होगी। इस परीक्षा को पोस्ट गे्रजुएशन (पीजी) के लिए प्रवेश परीक्षा भी माना जा सकता है। इस संबंध में केंद्र सरकार ने सभी राज्यों के चिकित्सा शिक्षा संचालकों से राय मांगी है। मध्यप्रदेश ने ‘एग्जिट” का समर्थन किया है। हालांकि, इसे पीजी के लिए प्रवेश परीक्षा मानने के पक्ष में चिकित्सा शिक्षा संचालनालय नहीं है। अभी एमबीबीएस करने के बाद इंटर्नशिप के लिए मेडिकल काउंसिल से अस्थाई रजिस्ट्रेशन मिलता है। इसके बाद स्थाई रजिस्ट्रेशन काउंसिल से मिलने के क्लीनिकल प्रैक्टिस करने का अधिकार मिल जाता था। कुछ कॉलेजों में क्लीनिकल पढ़ाई अच्छी नहीं होती है। ऐसे में मरीजों को गुण्ावत्तापूर्ण इलाज नहीं मिल पा रहा था। लिहाजा, अब एग्जिट परीक्षा कराने की तैयारी चल रही है। ये परीक्षाएं ऑनलाइन कराने की योजना बनाई गई है। थ्योरी की परीक्षा यूपीएससी से करवाने के लिए राज्यों से राय मांगी गई है।

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पीजी सीटें बढ़ाने के लिए बदलाव का प्रस्ताव

– जिला अस्पतालों और नर्सिंग होम्स में काम कर रहे पीजी डिग्री वाले डॉक्टरों को मेडिकल कॉलेजों में सीधे असिस्टेंट प्रोफेसर बनाने का प्रस्ताव है। हालांकि, राज्य सरकार इससे सहमत नहीं है।

– पीजी डिग्री और सीनियर रेसीडेंट कोर्स में सेवारत उम्मीदवारों के लिए कोटा देने का प्रस्ताव। संचालनालय चिकित्सा शिक्षा ने सिर्फ डिप्लोमा कोर्स में 50 फीसदी सीट रखने का सुझाव दिया है।

-सरकारी मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की उम्र 70 साल करने का प्रस्ताव है। अभी सेवानिवृत्ति उम्र 65 साल है। संचालनालय चिकित्सा शिक्षा इसके पक्ष में है, पर उन्हें प्रशासनिक पद देने पर सहमत नहीं है।

-मेडिकल टीचर्स को समयबद्ध पदोन्न्ति देने का प्रस्ताव है। इस पर राज्य सरकार ने हां कहा है।

काउंसलिंग को लेकर प्रस्ताव व राज्य सरकार की राय

निजी और सरकारी मेडिकल कॉलेजों की एक साथ काउंसलिंग कराने के लिए भी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रस्ताव बनाया है। संचालनालय चिकित्सा शिक्षा भी इसके पक्ष में है। काउंसलिंग के लिए अलग सरकारी एजेंसी बनाने की मांग की गई है।

यह भी हो सकता है बदलाव, मांगा सुझाव

-मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में दाखिले के लिए एआईपीएमटी में न्यूनतम अंक अनारक्षित श्रेणी के लिए 50 फीसदी व आरक्षित श्रेणी के लिए 40 फीसदी है। इसमें बदलाव के लिए सुझाव मांगे हैं। राज्य इसे कम करने के पक्ष में नहीं है।

– नेशनल इलिजबिलटी कम एंट्रेस टेस्ट (नीट) का माध्यम हिंदी, अंग्रेजी, असमी, बंगाली, तमिल, मराठी आदि भाषाओं में कराने को लेकर राय मांगी गई है।

– नीट यूजी के लिए पाठ्यक्रम सीबीएसई के 12वीं कक्षा का रखना रही है या नहीं। इस पर भी सुझाव मांगा है। 

 
 
  
 

 

 

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