एसटीएफ ने पकड़ा अब तक का सबसे बड़ा फ्राड़ ! 3700 करोड़ रुपये ठगे गये

लखनऊ : यूपी एसटीएफ ने जब अब तक आनलाइन ठगी करने वाले सबसे बड़े फ्राड का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने सोशल मीडिया की मदद से अब तक 6 लाख लोगों से करीब 3700 करोड़ रुपये की ठगी की जा चुकी है। इस मामले में एसटीएफ ने नोएडा जनपद से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। यह लोग एक कम्पनी बनाकर लोगों से ठगी करते थे। एसटीएफ ने इनके तीन बैंक खाते से करीब 500 करोड़ रुपये फ्रीज किये हैं।

एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि एसटीएफ की टीम को इस बात की सूचना मिली थी कि नोएडा के सेक्टर-63 में सोशलट्रेड बिज के नाम एक कम्पनी चल रही है। यह कम्पनी आनलाइन ग्राहकों को जोडऩे के साथ ही उनको ठगने का काम कर रही है। इस सूचना पर काम करते हुए एसटीएफ की टीम ने बुधवार को कम्पनी के दफ्तर पर छापा मारा। एसटीएफ की टीम ने वहां से कम्पनी के तीन लोगों निदेश गाजियाबाद निवासी अनुभव मित्तल, नोएडा निवासी श्रीधर प्रसाद और मथुरा निवासी महेश दयाल को गिरफ्तार किया।

 एसटीएफ को कम्पनी के केनरा बैंक के तीन खाते मिले, जिसमें करीब 500 करोड़ रुपये थे। एसटीएफ ने उक्त तीनों खातों को सीज करा दिया है। इसके अलावा मौके से एसटीएफ की टीम को कंपनियों से सम्बन्धित बैलेन्स सीट, निवेशकों की सूची, कम्पनियों के कर्मचारियों की सूची व बैंक खातों की सूची, बेवसाइट निवेशकों के बेवसाइट यूआरएल की सूची, निवेशकों द्वारा कंपनी को की गयी शिकायतो की सूची और बैंक खातों में जमा कराई गयी धनराशि के ट्रान्जेक्शन की सूची हासिल की है। एसटीएफ का कहना है कि इस मामले में अभी छानबीन की जा रही है और कुछ और लोगों की भी आगे गिरफ्तारी की जा सकती है।
इस तरह लोगों से करते थे ठगी
जालसाजों ने अब्लेज इन्फ्रो सोल्यूशन प्रा.लि की फ्लैगशिप के तहत सोशलट्रेड़. बिज नाम की एक सोशल मीडिया प्लेटफार्म अगस्त 2015 में लॉच किया। इसमें यह ऑफर दिया गया कि इस प्लेटफार्म से जुडऩे पर ग्राहक को एक यूजर्र आइडी व पासवर्ड दिया जायेगा। इस पोर्टल से जुडऩे के लिए ग्राहक को कंपनी के एकाउन्ट में 1- 5,750 रूपये 2- 11,500 रूपये 3- 28,750 रूपये 4- 57,500 रूपये जमा करने होते थे। रुपये जमा कराने के बाद मेम्बर को यूजर आईडी एवं पासवर्ड दिया जाता था और जिसका इस्तेमाल करके मेम्बर ऑनलाइन पोर्टल को लॉगिन करना होता था और उसे कुछ पेज के लिंक को लाइक करने होगे । कंपनी हर लाईक पर मेम्बर को 5 रूपये देगी।

प्रतिदिन सदस्यों को जितनी लाईक उपलब्ध होगी वह उनके पैकेज के अनुसार रुपये मिलते थे। जैसे 5,750 रुपये पर 25 लाईक, 11,500 रुपये पर 50 लाईक, 28,750 रुपये पर 75 लाईक और 57,500 रुपये पर 125 लाईक। कंपनी के कथित रेवेन्यू मॉडल के अनुसार हर लाईक पर विज्ञापन कराने वाले सदस्य या संस्था के द्वारा 6 रूपये कंपनी को दिये जाते हैं, जिसमें से 5 रू0 मेम्बर को देता है और एक रूपया कंपनी खुद रखती हैं । जब इस बिजनेस मॉडल की जॉच की गयी तो पाया गया कि कंपनी के ने अपने ग्राहकों को धोखे में रखकर उनसे पैसे एकान्टस में जमा कराते थे और जब मेम्बर अपने पेज को लॉगिन करते थे तो विज्ञापन पेजों के या तो गलत यूआरएल होते थे या उन्ही सदस्यों के यूआरएल को आपस में ही लाईक कराया जा रहा था। इस प्रकार कंपनी के द्वारा कोई वास्तविक विज्ञापन या कोई लॉजिकल,रियल सर्विस नहीं उपलबध कराया जा रहा था। कम्पनी असल में ग्राहकों से जमा कराये गये धन में से ही थोडे से धन को सदस्यो के बीच में बॉट देते थे और अधिकॉश सदस्यों के पैसे नहीं देते थे। वहीं ग्राहको अगर कोई नया सदस्य जोड़ता था तो कम्पनी उसको अतिरिक्त लाभ देने की बात कहती थी। लालच में आकर लोग अपनी नीचे और लोगों को भी जोड़ते थे। इस तरह पूरी चेन तैयार हो जाती है और जालसाज बड़ी आराम से रुपये ठगते थे।

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