ऐसे करोड़ों के नोट बिक रहे कौड़ी के भाव, एक टन की कीमत 128 रुपये

जिन नोटों को आप कभी अपनी तिजोरी में बहुत ही सुरक्षित तरीके से रखते थे, आज वही नोट कौड़ी के भाव बिक रहे हैं. पिछले साल नोटबंदी के बाद से 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट किसी भी काम के नहीं रहे. न भारतीय रिजर्व बैंक के ही ये किसी काम आ रहे हैं और न ही आप इनका किसी तरह इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन एक कंपनी है, जो इनसे अपना कारोबार चला रही है. यह कंपनी आरबीआई से महज 128 रुपये प्रति टन के हिसाब से इन नोटों को खरीद रही  है.ऐसे करोड़ों के नोट बिक रहे कौड़ी के भाव, एक टन की कीमत 128 रुपयेअभी-अभी: RBI के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन ने ठुकराया केजरीवाल का ‘ऑफर’

निपटारा करना था मुश्क‍िल

दरअसल नोटबंदी के बाद वापस बैंकिंग सिस्टम में लौटे 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट अब किसी काम के नहीं रह गए हैं. ऐसे में इनका निपटारा करना आसान नहीं था. भारतीय रिजर्व बैंक ने इन्हे जलाकर खत्म करने पर विचार किया, लेकिन ऐसा नहीं किया जा सकता था. क्योंकि ये एक खास पेपर से बनते हैं. अगर इन्हें जलाया जाता, तो काफी बड़े स्तर पर प्रदूषण हो सकता था.

ये कंपनी खरीद रही  है आरबीआई से

500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों के इस अंबार का निपटारा करने के लिए आखिरकार आरबीआई को खरीददार मिल ही गया. यह खरीददार आरबीआई से इन नोटों को खरीद कर आपके लिए कार्डबोर्ड तैयार कर रहा है.  वेस्टर्न इंडिया प्लायवुड्स (WPI) नाम की कंपनी इन पुराने नोटों से कार्डबोर्ड तैयार कर रही है.

दक्ष‍िण अफ्रीका में होंगे ये इस्तेमाल 

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक यह कंपनी 1 टन 500 और 1000 रुपये के नोटों के लिए महज 128 रुपये चुका रही है. रिपोर्ट की मानें तो इन नोटों से कार्डबोर्ड तैयार किए जा रहे हैं. इन कार्डबोर्ड का इस्तेमाल दक्ष‍िण अफ्रीका में किया जाएगा.

चुनाव में होगा इस्तेमाल

रिपोर्ट  के मुताबिक दक्ष‍िण अफ्रीका में 2019 में होने वाले चुनावों में इनका इस्तेमाल किया जाएगा. चुनाव में बैनर और स्लोगन लिखने के लिए इनका यूज होगा. कंपनी के एक अध‍िकारी ने बताया कि इन नोटों से बने कार्डबोर्ड देश में भी बेचे जा रहे हैं. 

दक्षि‍ण अफ्रीका में भारी मांग

अध‍िकारी के मुताबिक दक्ष‍िण अफ्रीका की तरफ से कार्डबोर्ड  की काफी बड़े स्तर मांग है. कंपनी बड़े स्तर पर दक्ष‍िण अफ्रीका में निर्यात करती है. इन नोटों को एक खास प्रक्रिया के तहत कार्डबोर्ड  में तब्दील किया जाता है और फिर उन्हें भारत में यूज किया जाता है और अब इन्हें दक्ष‍िण अफ्रीका भी भेजने की तैयारी है.

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