औरंगाबाद की स्वच्छता सर्वेक्षण टीम पर रिश्वत मांगने का आरोप

500 शहरों की साफ सफाई के स्वच्छता सर्वेक्षण के दूसरे संस्करण में रिश्वत लेने के आरोप लगे हैं। सर्वेक्षण करने वाली एक टीम ने बेहतर रैंकिंग देने के लिए औरंगाबाद नगर निगम के अधिकारियों से रिश्वत की मांग की थी।

औरंगाबाद की स्वच्छता सर्वेक्षण टीम पर रिश्वत मांगने का आरोप

सूत्रों ने बताया कि इसकी जानकारी मिलते ही क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआइ) ने कड़ी कार्रवाई करते हुए सर्वेक्षण करने वाली एजेंसी को निलंबित कर दिया। शहरी विकास मंत्रालय ने “स्वच्छ भारत मिशन” की प्रगति का व्यापक सर्वेक्षण करने और साफ सफाई के आधार पर 500 शहरों की रैंकिंग का जिम्मा क्यूसीआइ को सौंपा है।

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क्यूसीआइ ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा “औरंगाबाद के आकलन में जुटी एक टीम (सैकड़ों में से) ने आपत्तिजनक हरकत की है। इसने कथित तौर पर नगर निगम अधिकारियों से रिश्वत ली और उन्हें पकड़ लिया गया। यह टीम निरीक्षण संस्था मूडी इंटरनेशनल (इंटरटेक) से आई थी, जो 44 देशों में आकलन का कार्य कर रही है और 130 सालों से अस्तित्व में है।

यह पहली बार है जब क्यूसीआइ द्वारा विकसित आकलन की निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था में समझौते के गंभीर आरोप लगे हैं।” स्वच्छता अनुपालन की जांच के लिए क्यूसीआइ ने आइएसओ 17020 वाले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त चार निरीक्षण निकायों को जिम्मा सौंपा है।

क्यूसीआइ के चेयरमैन आदिल जैनुलभाई ने बताया, “उल्लंघन का यह व्यक्तिगत मामला है, जिसे जल्द ही पकड़ लिया गया और तत्काल कार्रवाई की गई। हम इस बात के लिए दृढ़प्रतिज्ञ हैं कि औरंगाबाद का उपयोग सिस्टम को मजबूत करने के लिए ही हो।”

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उन्होंने बताया कि क्यूसीआइ ने सिस्टम को पुनर्मान्य बनाने और सिक्स सिग्मा स्तर की गुणवत्ता देने के लिए कई विशेष कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया, “औरंगाबाद के आकलन को अमान्य कर दिया गया है। औरंगाबाद को नई टीम के साथ नई तारीखें दी जाएंगी।

इसके अलावा मूडी इंटरनेशनल (इंटरटेक) को भी आगे का आकलन करने से अलग कर दिया गया है।” जहां पर भी उक्त टीम ने दौरे किए हैं उन सभी जगहों की जांच के लिए एक आंतरिक समिति गठित की गई है। जिस टीम पर सवालिया निशान लगे हैं उसने पांच अन्य शहरों में भी सर्वेक्षण किए थे।

क्यूसीआइ के मुताबिक, “औरंगाबाद के सभी आंकड़ों को जांच के लिए अलग कर लिया गया है। आकलन के नए आंकड़े जुटाए जाएंगे ताकि औरंगाबाद के परिणामों को बाद में संकलित किया जा सके।”

 

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