कर्नाटक की अगले 5 साल कमान संभालने का पूरा भरोसा: सिद्धारमैया

कर्नाटक में बीजेपी और कांग्रेस की भारी लड़ाई तथा काफी जुबानी गर्मी वाले चुनाव प्रचार का आज अंतिम दिन है. सिद्धारमैया ने साफ कह दिया है कि यह उनकी अंतिम चुनावी लड़ाई है, लेकिन वह इस बात को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि अगले पांच साल तक कांग्रेस के दक्ष‍िण में गढ़ कर्नाटक की कमान उनके ही हाथ में ही रहेगी.कर्नाटक में बीजेपी और कांग्रेस की भारी लड़ाई तथा काफी जुबानी गर्मी वाले चुनाव प्रचार का आज अंतिम दिन है. सिद्धारमैया ने साफ कह दिया है कि यह उनकी अंतिम चुनावी लड़ाई है, लेकिन वह इस बात को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि अगले पांच साल तक कांग्रेस के दक्ष‍िण में गढ़ कर्नाटक की कमान उनके ही हाथ में ही रहेगी.  आजतक-इंडिया टुडे को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कर्नाटक के मौजूदा मुख्यमंत्री ने कहा, 'राज्य में किसी तरह की एंटी-इनकम्बेंसी नहीं है और 100 फीसदी तय है कि मैं पुन: चुनकर आऊंगा. उनसे हमने सवाल किया था कि कर्नाटक में साल 1985 के बाद ऐसा देखा गया है कि कोई भी पार्टी पांच साल बाद सत्ता में वापस नहीं आई है, वह इस इतिहास को किस तरह से बदलेंगे?  खंडित जनादेश वाले तमाम ओपिनियन पोल को खारिज करते हुए सिद्धारमैया ने कहा, 'इस तरह के प्री-पोल सर्वे जमीनी वास्तविकता पर आधारित नहीं होती. मैं इन पर भरोसा नहीं करता.'  अपने बेटे यतींद्र को वरुणा सीट से चुनाव लड़ाने और वंशवादी राजनीति को बढ़ावा देने के बीजेपी के आरोप पर उन्होंने कहा, 'वरुणा से मैं लड़ता, यदि यह मेरा अंतिम चुनाव नहीं होता. मैं अब 70 पार कर चुका हूं.'  न तो कोई किंग और न ही किंगमेकर    राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि पूर्व सीएम और जनता दल (सेक्युलर) के नेता एच. डी. देवगौड़ा किंगमेकर बन सकते हैं और त्रिशंकु विधानसभा होने की स्थ‍िति में वह बीजेपी से हाथ मिला सकते हैं. इस पर सिद्धारमैया ने कहा, 'साल 2004 और 2006 में भी ऐसा हुआ है, जब जेडी (एस) ने क्रमश: कांग्रेस और बीजेपी के साथ गठबंधन किया था.'  सिद्धारमैया ने कहा, ' इसी वजह से देवगौड़ा अपने को किंगमेकर मानते हैं. लेकिन इस बार जेडी (एस) 20 सीटें ही जीत पाएगी, इसलिए न तो वह किंग रहने वाले हैं और न किंगमेकर. त्रिशंकु विधानसभा जैसी स्थति नहीं आएगी.  सिद्धारमैया ने इस बात को भी खारिज किया कि वह हारने के डर से दो सीटों चामुंडेश्वरी और बदामी से लड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि जनता और कांग्रेस के कार्यकर्ता, विधायक यह चाहते थे कि वह दो जगह से लड़ें. उन्होंने कहा कि 'चामुंडेश्वरी में तो आसानी से जीत मिल जाएगी. बीजेपी और जेडी(एस) के बीच यहां एक रणनीतिक समझदारी बनी है, लेकिन जेडी(एस) कैंडिडेट जी. टी. देवगौड़ा बहुत मुश्किल नहीं पैदा कर पाए हैं.  राजनीतिक फायदे की बात नहीं  सिद्धारमैया ने कहा कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है कि कन्नड़ गौरव और लिंगायतों के लिए अलग झंडा, अल्पसंख्यक दर्जे का मसला उठाकर कोई राजनीतिक फायदा उठाया जाए. वह विधायक चुने जाने के बाद फिर से यह मसले उठाएंगे.  क्यों किया मानहानि का केस  क्या यह चुनाव पीएम मोदी और उनके बीच की व्यक्तिगत लड़ाई बन गई है, इस सवाल पर सिद्धारमैया ने कहा, 'मैंने कभी भी उनकी व्यक्तिगत आलोचना नहीं की है और वे ही मेरे खिलाफ झूठे और निराधार आरोप लगाते रहे हैं. मोदी ऐसा बार-बार करते रहे, इसलिए मुझे मानहानि का केस दायर करना पड़ा.'  कोई मोदी लहर नहीं  मोदी की भीड़ में जुट रही रैलियों के सवाल पर उन्होंने कहा, 'राज्य में कोई मोदी लहर नहीं है, उनके भाषण खोखले होते हैं. महिलाओं और युवाओं में राहुल गांधी के प्रति आकर्षण है.'

आजतक-इंडिया टुडे को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कर्नाटक के मौजूदा मुख्यमंत्री ने कहा, ‘राज्य में किसी तरह की एंटी-इनकम्बेंसी नहीं है और 100 फीसदी तय है कि मैं पुन: चुनकर आऊंगा. उनसे हमने सवाल किया था कि कर्नाटक में साल 1985 के बाद ऐसा देखा गया है कि कोई भी पार्टी पांच साल बाद सत्ता में वापस नहीं आई है, वह इस इतिहास को किस तरह से बदलेंगे?

खंडित जनादेश वाले तमाम ओपिनियन पोल को खारिज करते हुए सिद्धारमैया ने कहा, ‘इस तरह के प्री-पोल सर्वे जमीनी वास्तविकता पर आधारित नहीं होती. मैं इन पर भरोसा नहीं करता.’

अपने बेटे यतींद्र को वरुणा सीट से चुनाव लड़ाने और वंशवादी राजनीति को बढ़ावा देने के बीजेपी के आरोप पर उन्होंने कहा, ‘वरुणा से मैं लड़ता, यदि यह मेरा अंतिम चुनाव नहीं होता. मैं अब 70 पार कर चुका हूं.’

न तो कोई किंग और न ही किंगमेकर  

राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि पूर्व सीएम और जनता दल (सेक्युलर) के नेता एच. डी. देवगौड़ा किंगमेकर बन सकते हैं और त्रिशंकु विधानसभा होने की स्थ‍िति में वह बीजेपी से हाथ मिला सकते हैं. इस पर सिद्धारमैया ने कहा, ‘साल 2004 और 2006 में भी ऐसा हुआ है, जब जेडी (एस) ने क्रमश: कांग्रेस और बीजेपी के साथ गठबंधन किया था.’

सिद्धारमैया ने कहा, ‘ इसी वजह से देवगौड़ा अपने को किंगमेकर मानते हैं. लेकिन इस बार जेडी (एस) 20 सीटें ही जीत पाएगी, इसलिए न तो वह किंग रहने वाले हैं और न किंगमेकर. त्रिशंकु विधानसभा जैसी स्थति नहीं आएगी.

सिद्धारमैया ने इस बात को भी खारिज किया कि वह हारने के डर से दो सीटों चामुंडेश्वरी और बदामी से लड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि जनता और कांग्रेस के कार्यकर्ता, विधायक यह चाहते थे कि वह दो जगह से लड़ें. उन्होंने कहा कि ‘चामुंडेश्वरी में तो आसानी से जीत मिल जाएगी. बीजेपी और जेडी(एस) के बीच यहां एक रणनीतिक समझदारी बनी है, लेकिन जेडी(एस) कैंडिडेट जी. टी. देवगौड़ा बहुत मुश्किल नहीं पैदा कर पाए हैं.

राजनीतिक फायदे की बात नहीं

सिद्धारमैया ने कहा कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है कि कन्नड़ गौरव और लिंगायतों के लिए अलग झंडा, अल्पसंख्यक दर्जे का मसला उठाकर कोई राजनीतिक फायदा उठाया जाए. वह विधायक चुने जाने के बाद फिर से यह मसले उठाएंगे.

क्यों किया मानहानि का केस

क्या यह चुनाव पीएम मोदी और उनके बीच की व्यक्तिगत लड़ाई बन गई है, इस सवाल पर सिद्धारमैया ने कहा, ‘मैंने कभी भी उनकी व्यक्तिगत आलोचना नहीं की है और वे ही मेरे खिलाफ झूठे और निराधार आरोप लगाते रहे हैं. मोदी ऐसा बार-बार करते रहे, इसलिए मुझे मानहानि का केस दायर करना पड़ा.’

कोई मोदी लहर नहीं

मोदी की भीड़ में जुट रही रैलियों के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘राज्य में कोई मोदी लहर नहीं है, उनके भाषण खोखले होते हैं. महिलाओं और युवाओं में राहुल गांधी के प्रति आकर्षण है.

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