कर्नाटक पर देश भर में कांग्रेस का हल्ला बोल, राष्ट्रपति से भी मांगा वक्त

कर्नाटक के सियासी घटनाक्रमों से उठी हिलोर के बीच कांग्रेस शुक्रवार को सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते गोवा और मणिपुर में राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश करेगी. वहीं, लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने भी कहा कि वह सबसे बड़ा दल होने के नाते बिहार में सरकार बनाने का दावा पेश करेगी.कर्नाटक के सियासी घटनाक्रमों से उठी हिलोर के बीच कांग्रेस शुक्रवार को सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते गोवा और मणिपुर में राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश करेगी. वहीं, लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने भी कहा कि वह सबसे बड़ा दल होने के नाते बिहार में सरकार बनाने का दावा पेश करेगी.  इस बीच कांग्रेस ने राष्ट्रपति के समक्ष इस मामले को उठाने को फैसला किया है. राज्यसभा में पार्टी के नेता गुलाम नबी आजाद कर्नाटक विधायकों को लेकर राष्ट्रपति से शनिवार को मुलाकात करेंगे. आजाद आज शाम कर्नाटक से दिल्ली के लिए रवाना होंगे.  वहीं गुरुवार शाम को कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत ने प्रदेश कांग्रेस नेताओं को पत्र लिखकर व्यापक स्तर पर कर्नाटक के राज्यपाल के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन की अपील की. जयपुर, मणिपुर, गोवा, बेंगलुरु और भोपाल सहित देश भर में कांग्रेस के कार्यकर्ता कर्नाटक मामले पर प्रदर्शन करेंगे.  हालांकि इन राज्यों में सरकार बनाने के सहयोगी दलों के दावे पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि गोवा और मणिपुर में चुनाव एक साल से अधिक समय पहले हुए थे, जबकि बिहार में चुनाव 2015 में हुए थे. ऐसे में कांग्रेस और राजद के इस कदम को भाजपा को शर्मिंदगी महसूस कराने पर केंद्रित माना जा रहा है.  गोवा और मणिपुर में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन वह सरकार नहीं बना पाई थी. बिहार में राष्ट्रीय जनता दल को सबसे ज्यादा सीटें मिली थीं और उसने जनता दल यूनाइटेड के साथ मिलकर सरकार बनाई थी, लेकिन बाद में जनता दल यूनाइटेड और भाजपा एक हो गए और सरकार बना ली.  कर्नाटक में भाजपा 104 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी जिसे बुधवार को राज्यपाल वाजूभाई वाला ने सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया.  हालांकि कांग्रेस और जेडीएस ने 117 विधायकों का समर्थन होने का जिक्र करते हुए अपनी सरकार बनाने का दावा पेश किया था, लेकिन राज्यपाल ने सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को सरकार बनाने का मौका दिया और 15 दिन में बहुमत साबित करने को कहा. भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने गुरुवार को सुबह मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली.  कर्नाटक की 224 विधानसभा सीटों में से 222 पर चुनाव हुए थे. बहुमत का आंकड़ा 112 है.  गोवा कांग्रेस विधायक दल के प्रमुख चंद्रकांत कावलेकर ने कहा कि पार्टी अपने सभी 16 विधायकों के हस्ताक्षर वाला औपचारिक पत्र सौंपकर शुक्रवार को राज्यपाल मृदुला सिन्हा के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश करेगी. राज्यपाल ने कांग्रेस नेताओं को बैठक के लिए दोपहर 12 बजे का समय दिया है.  पिछले साल मार्च में 40 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस को 17 सीट मिली थीं, लेकिन पार्टी बहुमत से चार सीट दूर रही थी. बाद में इसके एक विधायक ने इस्तीफा दे दिया और वह भाजपा में शामिल हो गया.  राज्य में भाजपा को 14 सीट मिली थीं और उसने गोवा फॉरवर्ड पार्टी और एमजीपी के साथ मिलकर सरकार बना ली थी. इन दोनों दलों को तीन-तीन सीट मिली थीं. तीन निर्दलीय भी भाजपा के पाले में चले गए थे.  कावलेकर ने कहा कि गोवा की राज्यपाल को कर्नाटक के अपने समकक्ष द्वारा स्थापित उदाहरण का अनुसरण करना चाहिए और '12 मार्च 2017 की अपनी गलती को सुधारते हुए' सरकार गठन के लिए सबसे बड़ी पार्टी को आमंत्रित करना चाहिए.  गोवा विधानसभा में नेता विपक्ष कावलेकर ने कहा, 'हमारे पास 16 विधायक हैं और इसके चलते विधानसभा (गोवा) में हम सबसे बड़ी पार्टी हैं. राज्यपाल को अपने कर्नाटक समकक्ष द्वारा स्थापित उदाहरण के अनुरूप गोवा में हमें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना चाहिए.'  यह रेखांकित किए जाने पर कि सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए कम से कम 21 विधायकों का समर्थन चाहिए, कावलेकर ने कहा कि एक बार राज्यपाल कांग्रेस के मुख्यमंत्री को शपथ दिला दें तो फिर वह सदन में बहुमत साबित करने में सफल होंगे. हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि पार्टी किस तरह बहुमत जुटाएगी.  गोवा कांग्रेस के प्रमुख गिरीश चूड़ांकर ने कहा कि राज्यपाल दो तरह के नियम नहीं रख सकते. उन्होंने कहा, 'जब कर्नाटक के राज्यपाल ने सबसे बड़ी पार्टी को आमंत्रित किया है तो गोवा में भी वही नज़ीर दी जानी चाहिए.'  चूडांकर ने कहा कि कांग्रेस, 'गोवा की राज्यपाल को पिछले साल उनके द्वारा की गई गलती को सुधारने का मौका दे रही है.' गोवा में भाजपा नीत सरकार के मुखिया मनोहर पर्रिकर हैं जो वर्तमान में अग्नाशय संबंधी बीमारी का उपचार कराने के लिए अमेरिका में हैं.  वहीं, बिहार में राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि उनकी पार्टी भी बिहार के राज्यपाल से विधानसभा को भंग करने और कर्नाटक की तरह सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का आग्रह करेगी. उन्होंने कहा कि राज्य में उनकी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी है.  लालू प्रसाद के बेटे और विधानसभा में नेता विपक्ष तेजस्वी ने उन्होंने राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मिलने का समय मांगा है, जिनके समक्ष 'हम यह कहना चाहते हैं कि दोहरे मानक नहीं हो सकते.'  जदयू-भाजपा गठबंधन के पास 243 सदस्यीय विधानसभा में से 131 सीट हैं, लेकिन अब भी राजद 80 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है.  तेजस्वी ने कहा कि यदि कर्नाटक के राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं तो राजद को भी सरकार बनाने का अधिकार है.  उन्होंने कहा, 'हम बिहार के राज्यपाल से राज्य सरकार को बर्खास्त करने और राजद को सरकार गठन के लिए आमंत्रित करने का आग्रह करेंगे.'  तेजस्वी ने ट्वीट किया, 'मैं अपने विधायकों के साथ राज्यपाल से मिलूंगा क्योंकि हम बिहार में सबसे बड़ी पार्टी हैं.'  वहीं, मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता इबोबी सिंह ने भी कहा कि वह सरकार गठन का दावा करने के लिए राज्यपाल से मिलने का समय मांगेंगे. मणिपुर में पिछले साल हुए चुनाव में कांग्रेस को 60 सदस्यीय विधानसभा में 28 सीट मिली थीं. भाजपा के खाते में 21 सीट आई थीं.  भाजपा ने क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन कर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया था. तब राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला ने कांग्रेस के दावे को नजरअंदाज कर भाजपा और क्षेत्रीय दलों के गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था.  माकपा प्रमुख सीताराम येचुरी ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा नियुक्त राज्यपालों ने न तो गोवा में, न मणिपुर में और न ही मेघालय में सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया और केंद्रीय मंत्रियों ने उनके समर्थन में दलीलें दीं.

इस बीच कांग्रेस ने राष्ट्रपति के समक्ष इस मामले को उठाने को फैसला किया है. राज्यसभा में पार्टी के नेता गुलाम नबी आजाद कर्नाटक विधायकों को लेकर राष्ट्रपति से शनिवार को मुलाकात करेंगे. आजाद आज शाम कर्नाटक से दिल्ली के लिए रवाना होंगे.

वहीं गुरुवार शाम को कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत ने प्रदेश कांग्रेस नेताओं को पत्र लिखकर व्यापक स्तर पर कर्नाटक के राज्यपाल के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन की अपील की. जयपुर, मणिपुर, गोवा, बेंगलुरु और भोपाल सहित देश भर में कांग्रेस के कार्यकर्ता कर्नाटक मामले पर प्रदर्शन करेंगे.

हालांकि इन राज्यों में सरकार बनाने के सहयोगी दलों के दावे पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि गोवा और मणिपुर में चुनाव एक साल से अधिक समय पहले हुए थे, जबकि बिहार में चुनाव 2015 में हुए थे. ऐसे में कांग्रेस और राजद के इस कदम को भाजपा को शर्मिंदगी महसूस कराने पर केंद्रित माना जा रहा है.

गोवा और मणिपुर में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन वह सरकार नहीं बना पाई थी. बिहार में राष्ट्रीय जनता दल को सबसे ज्यादा सीटें मिली थीं और उसने जनता दल यूनाइटेड के साथ मिलकर सरकार बनाई थी, लेकिन बाद में जनता दल यूनाइटेड और भाजपा एक हो गए और सरकार बना ली.

कर्नाटक में भाजपा 104 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी जिसे बुधवार को राज्यपाल वाजूभाई वाला ने सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया.

हालांकि कांग्रेस और जेडीएस ने 117 विधायकों का समर्थन होने का जिक्र करते हुए अपनी सरकार बनाने का दावा पेश किया था, लेकिन राज्यपाल ने सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को सरकार बनाने का मौका दिया और 15 दिन में बहुमत साबित करने को कहा. भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने गुरुवार को सुबह मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली.

कर्नाटक की 224 विधानसभा सीटों में से 222 पर चुनाव हुए थे. बहुमत का आंकड़ा 112 है.

गोवा कांग्रेस विधायक दल के प्रमुख चंद्रकांत कावलेकर ने कहा कि पार्टी अपने सभी 16 विधायकों के हस्ताक्षर वाला औपचारिक पत्र सौंपकर शुक्रवार को राज्यपाल मृदुला सिन्हा के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश करेगी. राज्यपाल ने कांग्रेस नेताओं को बैठक के लिए दोपहर 12 बजे का समय दिया है.

पिछले साल मार्च में 40 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस को 17 सीट मिली थीं, लेकिन पार्टी बहुमत से चार सीट दूर रही थी. बाद में इसके एक विधायक ने इस्तीफा दे दिया और वह भाजपा में शामिल हो गया.

राज्य में भाजपा को 14 सीट मिली थीं और उसने गोवा फॉरवर्ड पार्टी और एमजीपी के साथ मिलकर सरकार बना ली थी. इन दोनों दलों को तीन-तीन सीट मिली थीं. तीन निर्दलीय भी भाजपा के पाले में चले गए थे.

कावलेकर ने कहा कि गोवा की राज्यपाल को कर्नाटक के अपने समकक्ष द्वारा स्थापित उदाहरण का अनुसरण करना चाहिए और ’12 मार्च 2017 की अपनी गलती को सुधारते हुए’ सरकार गठन के लिए सबसे बड़ी पार्टी को आमंत्रित करना चाहिए.

गोवा विधानसभा में नेता विपक्ष कावलेकर ने कहा, ‘हमारे पास 16 विधायक हैं और इसके चलते विधानसभा (गोवा) में हम सबसे बड़ी पार्टी हैं. राज्यपाल को अपने कर्नाटक समकक्ष द्वारा स्थापित उदाहरण के अनुरूप गोवा में हमें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना चाहिए.’

 

यह रेखांकित किए जाने पर कि सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए कम से कम 21 विधायकों का समर्थन चाहिए, कावलेकर ने कहा कि एक बार राज्यपाल कांग्रेस के मुख्यमंत्री को शपथ दिला दें तो फिर वह सदन में बहुमत साबित करने में सफल होंगे. हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि पार्टी किस तरह बहुमत जुटाएगी.

गोवा कांग्रेस के प्रमुख गिरीश चूड़ांकर ने कहा कि राज्यपाल दो तरह के नियम नहीं रख सकते. उन्होंने कहा, ‘जब कर्नाटक के राज्यपाल ने सबसे बड़ी पार्टी को आमंत्रित किया है तो गोवा में भी वही नज़ीर दी जानी चाहिए.’

चूडांकर ने कहा कि कांग्रेस, ‘गोवा की राज्यपाल को पिछले साल उनके द्वारा की गई गलती को सुधारने का मौका दे रही है.’ गोवा में भाजपा नीत सरकार के मुखिया मनोहर पर्रिकर हैं जो वर्तमान में अग्नाशय संबंधी बीमारी का उपचार कराने के लिए अमेरिका में हैं.

वहीं, बिहार में राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि उनकी पार्टी भी बिहार के राज्यपाल से विधानसभा को भंग करने और कर्नाटक की तरह सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का आग्रह करेगी. उन्होंने कहा कि राज्य में उनकी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी है.

लालू प्रसाद के बेटे और विधानसभा में नेता विपक्ष तेजस्वी ने उन्होंने राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मिलने का समय मांगा है, जिनके समक्ष ‘हम यह कहना चाहते हैं कि दोहरे मानक नहीं हो सकते.’

जदयू-भाजपा गठबंधन के पास 243 सदस्यीय विधानसभा में से 131 सीट हैं, लेकिन अब भी राजद 80 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है.

तेजस्वी ने कहा कि यदि कर्नाटक के राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं तो राजद को भी सरकार बनाने का अधिकार है.

उन्होंने कहा, ‘हम बिहार के राज्यपाल से राज्य सरकार को बर्खास्त करने और राजद को सरकार गठन के लिए आमंत्रित करने का आग्रह करेंगे.’

तेजस्वी ने ट्वीट किया, ‘मैं अपने विधायकों के साथ राज्यपाल से मिलूंगा क्योंकि हम बिहार में सबसे बड़ी पार्टी हैं.’

वहीं, मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता इबोबी सिंह ने भी कहा कि वह सरकार गठन का दावा करने के लिए राज्यपाल से मिलने का समय मांगेंगे. मणिपुर में पिछले साल हुए चुनाव में कांग्रेस को 60 सदस्यीय विधानसभा में 28 सीट मिली थीं. भाजपा के खाते में 21 सीट आई थीं.

भाजपा ने क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन कर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया था. तब राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला ने कांग्रेस के दावे को नजरअंदाज कर भाजपा और क्षेत्रीय दलों के गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था.

माकपा प्रमुख सीताराम येचुरी ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा नियुक्त राज्यपालों ने न तो गोवा में, न मणिपुर में और न ही मेघालय में सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया और केंद्रीय मंत्रियों ने उनके समर्थन में दलीलें दीं

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