कही प्याज-टमाटर की बढ़ती कीमतों की असली वजह भारी निर्यात तो नहीं…

उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने कहा है कि देश में प्याज और टमाटर की कीमतों में मौजूदा तेजी सीजनल है. पासवान ने बताया कि विभिन्न उत्पादक राज्यों से प्याज और टमाटर की नई फसल जल्द ही बाजार में आना शुरू होगी जिसके बाद सप्ताह भर में स्थिति सामान्य हो जाएगी. हालांकि केन्द्रीय मंत्री का यह बयान सच्चाई से थोड़ा कम है.कही प्याज-टमाटर की बढ़ती कीमतों की असली वजह भारी निर्यात तो नहीं...इस पैरामीटर की वजह से नहीं सुधरी बिजनेस में भारत की रैंकिंग….

प्याज और टमाटर की कीमतों में इजाफा इसलिए नहीं हो रहा है कि यह इजाफे का सीजन है. इजाफा इसलिए हो रहा है कि केन्द्र सरकार ने बीते महीनों में कोल्ड स्टोरेज में रखी रबी की पैदावार को एक्सपोर्ट कर दिया है. यह एक्सपोर्ट कृषि विशेषज्ञों के उस अनुमान के बाद हुआ जिसमें चेताया गया था कि गया मानसून (दक्षिण-पश्चिम) प्याज-टमाटार की खरीफ पैदावार के लिए ठीक नहीं है और नई फसल की पैदावार में गिरावट दर्ज होने की संभावना है.

नई पैदावार से एक सप्ताह में सुधरेगी स्थिति?

प्याज की जल्द तैयार होने वाली खरीफ किस्में दिल्ली की मंडियों में आने लगी हैं तथा विभिन्न प्याज उत्पादक राज्यों में यह फसल निकाली जा रही है जो जल्द ही बाजार में आनी शुरू होगी. प्याज की देर से तैयार होने वाली किस्मों की उपज जनवरी से बाजार में आने लगेगी और अभी सप्ताह भर में स्थिति सामान्य होने की दिशा में बढ़ने लगेंगी.

केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि टमाटर और प्याज की कीमत में वृद्धि सीजनल है. प्याज की नई फसल की आवक में सुधार होने के साथ एकाध सप्ताह में कीमतें कम होना शुरु हो जायेंगी. उन्होंने कहा कि बाजार में अक्तूबर से जल्दी तैयार होने वाली किस्मों का मंडियों में आवक शुरू हो चुकी है.

51रुपये किलो प्याज और 80 रुपये किलो टमाटर

व्यापार के आंकड़ों के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी में प्याज की खुदरा कीमत 51 रुपये किलो चल रही है जबकि टमाटर की कीमत 80 रुपये किलो है. मदर डेयरी के बिक्री केन्द्र में प्याज 47 रुपये किलो बिक रहा है और टमाटर की कीमत 70 रुपये किलो है.

 खरीफ सीजन में 25 फीसदी कम रहा प्याज टमाटर की बुआई का रकबा

उपभोक्ता मामलों के सचिव अविनाश श्रीवास्तव ने कहा कि प्याज की जल्द तैयार होने वाली किस्म की पज मंडियों में आने लगी हैं तथा राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश जैसे उत्पादक राज्यों में ताजा फसल को निकाला जा रहा है. उन्होंने कहा कि प्याज की जल्द तैयार होने वाली किस्मों के खेती के रकबे में 25 प्रतिशत की कमी होने की वजह से प्याज की कीमतें दवाब में हैं. लेकिन प्याज की खरीफ फसल और देर से तैयार होने वाली खरीफ फसल का रकबा कहीं बेहतर है और उत्पादन भी बेहतर होने की संभावना है.

अगस्त में 125 फीसदी अधिक था एक्सपोर्ट

गौरतलब है कि इससे पहले अगस्त महीने में भी केन्द्र सरकार ने दावा किया था कि एक महीने में नई फसल आने के बाद कीमतों में स्थिरता आ जाएगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. दरअसल वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही के एक्सपोर्ट आंकड़ों के मुताबित इस दौरान देश के कोल्ड स्टोरेज में रखी प्याज-टमाटर की फसल को विदेश भेज दिया गया था. इस तिमाही के एक्सपोर्ट आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2017-18 के पहले महीने यानी अप्रैल में ही देश से प्याज एक्सपोर्ट में करीब 125 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी. अप्रैल के दौरान देश से कुल 3,20,943 टन प्याज एक्सपोर्ट हुआ है, जबकि पिछले साल इस दौरान देश से सिर्फ 1,42,767 टन प्याज निर्यात हो पाया था. निर्यात का यह सिलसिला लगातार पूरी तिमाही के दौरान जारी रहा.

मानसून चेतावनी के बावजूद खाली हुआ कोल्ड स्टोरेज

इस सच्चाई के साथ-साथ दक्षिण-पश्चिम मानसून की चाल पर कृषि जानकार पहले ही चेतावनी जारी कर चुके थे कि चालू सीजन में प्याज-टमाटर की खरीफ पैदावार कम रहने की उम्मीद है. इसके चलते इन फसलों के लिए अहम कई इलाकों में बुआई का रकबा कम कर दिया गया था. जिसके बाद अनुमान था कि खरीफ फसल में प्याज और टमाटर की पैदावार सामान्य से कम रहेगी. गौरतलब है कि इस चेतावनी के बाद यह जरूरी था कि देश को कोल्डस्टोरेज में रखी फसल को एक्सपोर्ट करने से ज्यादा तरजीह संभाल कर रखने पर दी जाती जिससे मौजूदा समय में बढ़ती कीमतों को लगाम लगाने के लिए स्टॉक का इस्तेमाल किया जा सकता.

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