केजरीवाल को विश्वास ने दी बड़ी धमकी, कहा- राजनीति में BJP-कांग्रेस को जिताने नहीं आए

आम आदमी पार्टी में इन दिनों राजनीतिक खींचतान उफान पर है. धीरे-धीरे पार्टी में माहौल कुमार विश्वास बरक्स अरविंद केजरीवाल बनता जा रहा है. अभी हाल ही में दिल्ली के रामलीला मैदान में पार्टी की बड़ी बैठक हुई थी, जिसमें अरविंद केजरीवाल ने गुजरात चुनाव में बीजेपी को हराने के लिए वोट देने की अपील की थी. इस मसले पर आप नेता कुमार विश्वास ने आज तक के साथ खास बातचीत करते हुए कहा कि मैं स्प्ष्ट कर दूं कि हमारे यहां सारे राजनीतिक निर्णय PAC में होते हैं, PAC में गुजरात चुनाव में किसे वोट दें इसपर निर्णय नहीं हुआ है, PAC हुई ही नहीं है.केजरीवाल को विश्वास ने दी बड़ी धमकी, कहा- राजनीति में BJP-कांग्रेस को जिताने नहीं आएगुजरात में वोटिंग से पहले CM के लिए पटेल चेहरे की घोषणा कर सकती है PM मोदी

कुमार विश्वास के मुताबिक, ‘ऐसा कुछ तय नहीं हुआ है, अरविंद अपने आप में एक निजी इकाई हैं. अरविंद के निजी विचार से सहमत-असहमत होना हमारा अधिकार है. रामलीला मैदान में जो कहा वो अरविंद का निजी विचार था कि किसी दूसरे पार्टी को वोट दे देना वह दूसरी पार्टी निश्चित तौर पर कांग्रेस ही है, मेरी कोई अपील गुजरात में पूछता हो हालांकि कौन हमें पूछ रहा है मगर मेरी राय है कि गुजरात में जो आप प्रत्याशी बिना मदद के चुनाव लड़ रहे हैं. उन्हें वोट दीजिए, और जहां आम आदमी पार्टी नही हैं वहां NOTA को वोट दीजिए. हम राजनीति में बीजेपी या कांग्रेस को जिताने नहीं आए हैं.

कुमार ने आगे कहा, ‘अरविंद की निजता पर मैं सवाल नही उठा रहा, वो सीधे आए और बोल दिया. मगर मैं साफ कहूं ये पार्टी का निर्णय नहीं है. कई कार्यकर्ता अरविंद की इस बात से असहज हुए, कई मुझसे पूछ रहे हैं कि अरविंद के इस बयान पर क्या कहा जाए. मैं कहता हूं कि गुजरात में नोटा दबा देना. अच्छे निर्दलीय को वोट दे देना मगर बीजेपी या कांग्रेस को वोट मत देना.

पुराने लोगों को पार्टी में जुड़ने के मसले पर कुमार ने कहा कि, ‘जब हम चले थे तो रामलीला मैदान में ऊंचे मंच पर थे अब हम नीचे आ गए हैं. हम 5 लाख कुर्सी से 5 हजार कुर्सी पर आ गए हैं. बीच में कुछ साथी छूटे हैं जो कि अच्छी बात नहीं है, मेरी अपील कार्यकर्ताओं को मार्मिक लगी है, तभी से सैकड़ो हजारों पुराने कार्यकर्ता मुझसे मिलने आ रहे हैं. कई लोग पंजाब में दलित उप मुख्यमंत्री वाले बयान से नाराज हो गए थे. हजारों पुराने लोग वापस आ रहे हैं, कई को पार्टी से सुनियोजित तरीके से बाहर किया गया. मगर इससे कुछ हासिल नहीं होगा. हम लगातार कई चुनाव हारे हैं, इसलिए हम लोगों ने आंदोलन चलाया था हमें वापस लौटना चाहिए.

लालू यादव के साथ आम आदमी पार्टी के गठबंधन पर कुमार विश्वास ने कहा, ‘लालू जी 1977 में वंशवाद के खिलाफ लड़े थे ऐसे में वो आज बेटे-बेटी की राजनीति में पहुंच गए हैं, ये सोचना भी सम्भव नहीं है कि हम उनके साथ लड़ेंगे. अन्ना आंदोलन का कार्यकर्ता और पार्टी का संस्थापक सदस्य कुमार विश्वास पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहा है कि जबतक मैं हूं हम लालू जी के साथ कोई एलायन्स नही करेंगे. लालू-नीतीश शपथग्रहण में अरविंद गए थे ना मुझे पूछा गया था ना बताया गया था वो उनका निजी निर्णय था. मैं तो किसी पद पर हूं नही भैया, मगर चीफ मिनिस्टर के प्रोटोकॉल होते हैं. 

‘मैं ये जरूर कहूंगा कि इस देश में साम्प्रदायिकता और धर्मनिरपेक्षता की नौटंकी के नाम पर सत्ता के गठबंधन की चाह इस देश के नेताओं के खून में है . रामविलास पासवान को जब बीजेपी के साथ सरकार बनानी होती है तो गैर कांग्रेसवाद के साथ आते हैं और जब कांग्रेस का साथ चाहते हैं तो साम्प्रदायिकता विरोधी हो जाते हैं. सेक्युलरिज्म और कंम्यूनलिस्म इन दो कार्डों को खेलना बेकार है, जो छल धर्मनिरपेक्षता शब्द पर कांग्रेस और उसकी साथी पार्टी करती हैं वो ही छल राष्ट्रवाद नाम पर बीजेपी और उसकी साथी पार्टी करती हैं.

जाहिर है अपरोक्ष रूप से कुमार विश्वास ने अरविंद केजरीवाल और उनकी निर्णायक मंडली पर निशाना साधा है और यह कहीं ना कहीं जाहिर करता है कि आने वाले दिनों में आम आदमी पार्टी में माहौल कुमार विश्वास बनाम अरविंद केजरीवाल होने जा रहा है.

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