केन्द्र सरकार का बड़ा फैसला: अब दलाल स्ट्रीट पर कालाधन नहीं होगा सफेद, आधार करेगा निगरानी

शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए आधार नंबर को अनिवार्य किया जा सकता है. केन्द्र सरकार और वित्तीय नियामक सेबी इस योजना पर काम कर रहे हैं. यह कदम इस लिए उठाया जा रहा है जिससे कि शेयर बाजार और अन्य वित्तीय बाजारों में कालेधन को सफेद करने की कोशिश पर लगाम लगाया जा सके.केन्द्र सरकार का बड़ा फैसला: अब दलाल स्ट्रीट पर कालाधन नहीं होगा सफेद, आधार करेगा निगरानीफोर्ब्स की टॉप 10 इनोवेटिव कंपनियों की लिस्ट में 2 इंडियन कंपनी भी हुई शामिल…

इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक केन्द्र सरकार का मानना है कि पैन कार्ड देश में टैक्स चोरी को रोकने में पूरी तरह सफल नहीं है बड़ी मात्रा में टैक्स लीक की घटनाएं सामने आती रही हैं. लिहाजा केन्द्र सरकार ने वित्तीय मार्केट के अन्य किरदारों से आधार और उनके ट्रांजैक्शन को लिंक करने की संभावनाओं पर अपनी राय व्यक्त करने को कहा है.

हालांकि फाइनेंनशियल मार्केट से आधार की लिंकिंग कब से शुरू की जाएगी इस पर कुछ नहीं कहा गया है. न ही यह साफ किया गया है कि क्या आधार लिंकिंग के बाद वित्तीय मामलों के लिए पैन की जगह आधार सबसे महत्पूर्ण दस्तावेज बन जाएगा.

टैक्स रिटर्न के लिए जरूरी है आधार

इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने वालों पर अपने पैन नंबर को आधार से जोडने के लिए दबाव बढ़ता जा रहा है. 30 जून यानी शुक्रवार को आधार और पैन लिंक करने का आखिरी दिन है. अगर आपने पहले ही लिंक कर लिया है तो ठीक है, नहीं तो इस प्रोसेस के जरिए आप लिंक कर सकते हैं.

कैसे लिंक करें पैन और आधार?

– सबसे पहले अपने पास पैन और आधार के नंबर पर रख लें.

– इसके बाद इनकम टैक्स की वेबसाइट पर जाएं. वहां आपको लिंक आधार का ऑप्शन मिलेगा. उस पर क्लिक करें (यहां क्लिक कर आप उस वेबसाइट पर पहुंच सकते हैं ) 

– इस पेज पर पहुंचते ही आपको अपने आधार और पैन का नंबर फिल करना होगा. एक कैप्चा कोड होगा जिसे आपको भरना होगा और सबमिट करते ही आपका प्रोसेस पूरा हो जाएगा.

– अगर आपका आधार पहले से ही पैन से लिंक है तो इस बात का भी मैसेज आ जाएगा.

क्यों आधार पैन लिंक करना जरूरी?

1 जुलाई से इनकम टैक्स रिटर्न भरने और नया पैन नंबर प्राप्त करने के लिए 12 अंक का आधार नंबर देना अनिवार्य हो जाएगा. आधार के जरिए मिलने वाली बायोमेट्रिक सुविधा से टैक्स विभाग को टैक्स फर्जीवाड़ा पकड़ने में आसानी होगी. वहीं टैक्स चोरी और एक से अधिक पैन नंबर की समस्या पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा.

गौरतलब है कि आधार किसी की पहचान स्थापित करने के लिए पैन से अधिक व्यापक है. लिहाजा, इन दोनों को जोड़ने के बाद टैक्स विभाग की आंकड़ा एकत्र करने और उसे समझने की क्षमता में इजाफा देखने को मिलेगा.

गौरतलब है कि इस लिंकिंग के बाद देश में आम आदमी द्वारा खर्च किए जा रहे पैसे का पूरा आंकड़ा टैक्स विभाग के पास पहुंचेगा जिससे वह टैक्स संबंधी नए नियम कानून बना सकेगा. इसका बड़ा फायदा उसे देश में टैक्स बेस बढ़ाने में मिलेगा.

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