कैग ने की IT की खिंचाई, सही प्रणाली न अपनाने का लगाया आरोप…

सरकारी ऑडिट संस्था कैग ने आयकर विभाग की खिंचाई की है। उसका कहना है कि सरकार को राजस्व में क्षति पहुंचाने वाले संदिग्ध दान और फर्जी खरीद के सौदों की जांच के लिए वह समान पद्धति अपनाने में असफल रहा। नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (कैग) ने संसद में पेश की रिपोर्ट में कहा है कि विभाग के एसेसमेंट ऑफीसरों ने अन्वेषण शाखा की रिपोर्ट पर ध्यान नहीं दिया और वे संदिग्ध दान और फर्जी खरीद की राशि को नामंजूर करने जैसे कदम उठाने में विफल रहे जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ। ऑडिट में यह पता चला कि अधिकारी एकतरफा तौर पर स्वविवेक से ऐसी धनराशि मंजूर या नामंजूर कर रहे थे।काले धन को समायोजित करने के लिए फर्जी दान व खरीद को दर्शाया जाता है।कैग ने की IT की खिंचाई, सही प्रणाली न अपनाने का लगाया आरोप...जानिए 10 ग्राम गोल्ड के नए दाम, सोने की कीमतों में आई मामूली गिरावट

सर्विस टैक्स वसूली धीमी: 

कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राजस्व विभाग वर्ष 2016-17 में बकाया सर्विस टैक्स में से सिर्फ नौ फीसद राशि वसूल कर पाया। वर्ष 2016-17 के शुरू में विभाग को 2658 करोड़ रुपये एरियर वसूलना था। इस दौरान 6176 करोड़ रुपये नया टैक्स देय हो गया। इस तरह उसे 8834 करोड़ रुपये राजस्व वसूलना था। लेकिन वह एरियर में से सिर्फ 783 करोड़ रुपये ही वसूल कर पाया।

टेलीकॉम कंपनियों ने राजस्व छिपाया: 

कैग ने कहा है कि टाटा टेलीसर्विसेज, टेलीनॉर और वीडियोकॉन समेत पांच टेलीकॉम कंपनियां ऐसी हैं जिन्होंने 14800 करोड़ रुपये कम राजस्व दिखाया। इससे सरकारी खजाने को 2578 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। इन कंपनियों में क्वाड्रेंट (वीडियोकॉन ग्रुप की फर्म) और रियालंस जियो भी शामिल थी। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2014-15 तक 14813 करोड़ रुपये कम राजस्व दिखाया गया। कंपनियों ने कम राजस्व दिखाया तो सरकार को मिलने वाले हिस्सा कम रहा।

एफएसएसएआइ की खिंचाई:

 कैग ने पूरे कागजातों के बिना फूड बिजनेस ऑपरेटरों यानी व्यापारियों को लाइसेंस जारी करने के लिए फूड रेगुलेटर एफएसएसएआइ की खिंचाई की है। उसने टेस्टिंग लैबों की क्वालिटी पर भी सवाल उठाया है। रिपोर्ट के अनुसार फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्डस अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआइ) देश में असुरक्षित खाद्य वस्तुओं का आयात रोकने में विफल रहा। रिपोर्ट में अथॉरिटी की अकुशलता, विभिन्न नियमन और मानक तय करने में विलंब और अकुशलता और सुप्रीम कोर्ट के कुछ निर्देशों को लागू करने में विफलता के लिए खिंचाई की गई है।

 

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