कैराना में कारगर दिख रही विपक्षी एकता

भाजपा सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद खाली हुई कैराना लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने उनकी बेटी मृगांका सिंह को उतारा , जबकि विपक्षी दलों ने साझा उम्मीदवार के तौर पर आरएलडी की तबस्सुम हसन को मैदान में उतारा था.लेकिन मतगणना के जो नतीजे आ रहे हैं उसमें तबस्सुम हसन करीब 75 हजार वोटों से आगे चल रही है . जबकि मृगांका सिंह बहुत पीछे चल रही है .ऐसा लगता है कि भाजपा इस सीट पर फिर गोरखपुर और फूलपुर में हार का इतिहास दोहराएगी.कैराना में कारगर दिख रही विपक्षी एकता

दरअसल विपक्ष कैराना के नतीजों के लिए पहले से ही आश्वस्त था, क्योंकि इस सीट पर भी सपा, बसपा, आरएलडी, कांग्रेस जैसे विपक्षी दल एक साथ ताल ठोंक रहे थे. जाहिर है गोरखपुर और फूलपुर में हुए लोक सभा उप चुनाव में मिली जीत ने विपक्ष का हौंसला बढ़ा दिया था. यदि यहां से विपक्ष की उम्मीदवार जीत हासिल करती है तो भाजपा अपनी रणनीति की नाकामयाबी का रोना भी नहीं रो सकती, क्योंकि इस बार उसने भी आरएलडी के पारंपरिक जाट वोटरों में सेंधमारी की थी . फिर भी नतीजे नकारात्मक नज़र आ रहे हैं .ऐसे में कैराना के जरिये भाजपा का पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर पकड़ बनाये रखने का मंसूबा पूरा होता नहीं दिखाई दे रहा है

जबकि दूसरी ओर इस प्रतिष्ठापूर्ण सीट पर विपक्ष की जीत होती है, तो इससे आगामी लोक सभा चुनाव में विपक्षी एकता को बल मिलेगा. महागठबंधन की उम्मीदें परवान चढ़ सकती है , जो भाजपा के लिए खतरा बन सकती है. लेकिन इस विपक्षी एकता में एक पेंच सर्वाधिक सीटें अपने दल को मिलने की इच्छा और पीएम पद के लिए कई लोगों की महत्वाकांक्षा के चलते इसमें भी दरार पड़ सकती है.

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